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वन्य प्राणी विभाग की टीम के इंतजार में तडफते हुए हिरण की मौत
Updated Fri, 15 Dec 2017 12:46 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
मिर्जापुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक हिरण की तड़पते हुए मौत हो गई। हिरण को बचाने के लिए गांव के युवाओं ने हिसार के वन्य विभाग का लैंडलाइन नंबर डायल किया। लैंडलाइन नंबर पर किसी कर्मचारी ने कहा कि हम नहीं आ पाएंगे।
गांव के लोगों ने बताया कि हम शाम के समय स्कूल के मैदान में कबड्डी खेलने जाते हैं। शाम करीब चार बजे एक हिरण स्कूल के मैदान में आ गया। आवारा कुत्ते हिरण का पीछा कर रहे थे। हिरण कुछ हद तक जख्मी हो चुुका था। हमने आवारा कुत्तों को वहां से भगाया। हिरण को पानी पिलाया। फिर हमने हिसार वन्य प्राणी विभाग के हिरण पार्क के लैंडलाइन नंबर पर फोन करके घटना की जानकारी दी। वहां किसी ने लैंड फोन रिसीव किया कि हम आधे घंटे में आते हैं। एक घंटा बीतने के बाद भी वन विभाग की टीम नहीं आई। युवाओं ने दोबारा फोन किया तो लैंडलाइन नंबर से किसी ने कहा कि हम नहीं आ सकते। करीब एक घंटा तड़पने के बाद उपचार न मिलने के कारण हिरण की मौत हो गई। बाद में भी वन्य प्राणी विभाग की टीम नहीं आई तो ग्रामीणों ने स्कूल के पास गड्डा खोदकर हिरण को दबा दिया। इस समय रविंद्र, सुशील, सुरेंद्र, राजेश, संदीप, सचिन, सुमित व बलवान मौजूद थे।
जो लैंडलाइन नंबर बताया गया है, वह हमारे डिविजन का नंबर है। वहां किस ने फोन उठाया और क्या जवाब दिया, इसकी जानकारी ली जाएगी। हमने वीरवार को हांसी, नंगथला में घायल हिरण और नीलगाय को बचाया है।
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-रामेश्वर दास, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग, हिसार
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हिसार।
मिर्जापुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक हिरण की तड़पते हुए मौत हो गई। हिरण को बचाने के लिए गांव के युवाओं ने हिसार के वन्य विभाग का लैंडलाइन नंबर डायल किया। लैंडलाइन नंबर पर किसी कर्मचारी ने कहा कि हम नहीं आ पाएंगे।
गांव के लोगों ने बताया कि हम शाम के समय स्कूल के मैदान में कबड्डी खेलने जाते हैं। शाम करीब चार बजे एक हिरण स्कूल के मैदान में आ गया। आवारा कुत्ते हिरण का पीछा कर रहे थे। हिरण कुछ हद तक जख्मी हो चुुका था। हमने आवारा कुत्तों को वहां से भगाया। हिरण को पानी पिलाया। फिर हमने हिसार वन्य प्राणी विभाग के हिरण पार्क के लैंडलाइन नंबर पर फोन करके घटना की जानकारी दी। वहां किसी ने लैंड फोन रिसीव किया कि हम आधे घंटे में आते हैं। एक घंटा बीतने के बाद भी वन विभाग की टीम नहीं आई। युवाओं ने दोबारा फोन किया तो लैंडलाइन नंबर से किसी ने कहा कि हम नहीं आ सकते। करीब एक घंटा तड़पने के बाद उपचार न मिलने के कारण हिरण की मौत हो गई। बाद में भी वन्य प्राणी विभाग की टीम नहीं आई तो ग्रामीणों ने स्कूल के पास गड्डा खोदकर हिरण को दबा दिया। इस समय रविंद्र, सुशील, सुरेंद्र, राजेश, संदीप, सचिन, सुमित व बलवान मौजूद थे।
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जो लैंडलाइन नंबर बताया गया है, वह हमारे डिविजन का नंबर है। वहां किस ने फोन उठाया और क्या जवाब दिया, इसकी जानकारी ली जाएगी। हमने वीरवार को हांसी, नंगथला में घायल हिरण और नीलगाय को बचाया है।
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-रामेश्वर दास, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग, हिसार