{"_id":"582ca4344f1c1b7c228ffbda","slug":"500-and-1000-rupees-changed-in-bank-foreigner-came-in-bank-hisar","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैराथन विजेता विदेशियों के लिए मनी एक्सचेंज बना आफत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैराथन विजेता विदेशियों के लिए मनी एक्सचेंज बना आफत
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:54 PM IST
विज्ञापन
बैंकाें में लाइनें
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैराथन में हिस्सा लेने के लिए हिसार आए विजेता कीनियाई धावकों के लिए मनी एक्सचेंज आफत बन गई है। इन छह कीनियाई धावकों के पास खाने तक के खुले पैसे नहीं है। हिसार के समाजसेवी मनीष गोयल इन्हें खाना खिला रहे हैं।
विज्ञापन
इनके रहने की व्यवस्था भी वे अपने स्तर पर कर रहे हैं। दूसरे और समाजसेवी इनके सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। मैराथन में हिस्सा लेने आए इन खिलाड़ियों को आगे भी और मैराथन में हिस्सा लेना है। इनमें से कुछ को 20 नवंबर को होने वाली मैराथन में हिस्सा लेना है।
विज्ञापन
कुछ धावक गुजरात में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेंगे। हिसार मैराथन में विजेता धावक ईशाक ने 50 हजार का प्रथम पुरस्कार, जोसवा ने सेकेंड ईनाम 30 हजार, रूथ महिला धावक ने 50 हजार, वर्जिनिया ने 20 हजार व हाफ मैराथन में सिमोन ने 10 हजार का इनाम जीता था। इन्हें प्रशासन ने ओपन चेक दिए थे। मगर अब कोई बैंक इन्हें इतनी राशि कैैश कर नई करेंसी नहीं दे रहा। न ही इन्हें यूरो व डॉलर मिल रहा है।
विज्ञापन
ट्वीट भेज मांगी मदद
मनीष गोयल ने इन खिलाड़ियों की मदद के लिए पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व वित मंत्री अरुण जेटली को ट्वीट कर गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा है कि कोई इनकी मदद करो। ये मैराथन में हिस्सा लेने के लिए आए थे इनके पास 2 लाख रुपये के करीब इंडियन करेंसी है। इन्हें तीन दिन दिन बाद वापस जाना है।
मनीष ने अपने खाते से बनवाया डीडी
विदेशी महमानों की मदद कर रहे मनीष गोयल ने कीनियाई अंबेसी के नाम खुद के पैसों से इनके एक एक हजार रुपये के डीडी बनवाए हैं। इसके अलावा गुजरात व दिल्ली में होने वाली मैराथन के लिए इनका रजिस्ट्रेशन करवाया है। रजिस्ट्रेशन फीस भी खुद मनीष ने दी है। मनीष का कहना है कि हमारा देश अतिथि देवो भव: है। इनकी हर संभव मदद करना मेरा कर्तव्य है।
आईजी कार्यालय, प्रशासन कर रहा सहयोग
मनीष ने बताया कि धावक उसी दिन से बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। मगर मनी एक्सचेंज व कैश निकलवाने की लिमिट पाबंदी के कारण दिक्कत आ रही है। हालांकि आईजी ऑफिस स्टाफ व जिला प्रशासन भी इनकी मदद कर रहा है। मगर अभी तक इनका कोई समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि एसबीआई की एसएमई ब्रांच ने उन्हें कल का समय दिया है। वे वहां जाएंगे संभवत: उन्हें मदद मिल सकती है।