{"_id":"5bf1bf18bdec22695873d49a","slug":"41542569752-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिरी दिन 40 हजार से ज्यादा ने दी ग्रुप-डी की परीक्षा, दिव्यांग परीक्षार्थियों की रही अधिक संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिरी दिन 40 हजार से ज्यादा ने दी ग्रुप-डी की परीक्षा, दिव्यांग परीक्षार्थियों की रही अधिक संख्या
Updated Mon, 19 Nov 2018 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। आखिरी दिन रविवार को 40 हजार से अधिक परीक्षार्थियों ने 99 केंद्रों पर ग्रुप डी की परीक्षा दी। आखिरी दिन दिव्यांग परीक्षार्थियों की संख्या अधिक रही, इसलिए अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर ग्राउंड फ्लोर पर ही स्पेशल सिटिंग प्लान बनाया गया। दिव्यांग परीक्षार्थियों की सुविधा का ख्याल रखते हुए राइटर प्राप्त दिव्यांग परीक्षार्थियों को आधे घंटे का समय भी अधिक दिया गया। मेडिकल बोर्ड का प्रमाणित सर्टिफिकेट लेकर आने वाले दिव्यांग परीक्षार्थियों को राइटर ले जाने की अनुमति दी गई। इसी के साथ दो दिन में 74 हजार से अधिक परीक्षार्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा दी।
अधिकारियों के अनुसार रविवार को भी 51 हजार 480 परीक्षार्थियों के लिए सिटिंग प्लान लगाया गया। इसमें से करीब 80 प्रतिशत परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे, जबकि 20 प्रतिशत गैर हाजिर रहे।
रेलवे स्टेशन की लिफ्ट हो गई बंद
रेलवे स्टेशन पर हाल ही में लगाई गई लिफ्ट अन्य दिनों में तो चालू रहती है, मगर दिव्यांग परीक्षार्थियों के परीक्षा देने के लिए आने के दौरान यह लॉक कर दी गई। रेलगाड़ी में सवार होकर आए दिव्यांगों को इस कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ी। उन्हेें ग्राउंड फ्लोर से फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने के लिए लिफ्ट की सहायता नहीं मिली। आखिरकार ऐसे परीक्षार्थी सीढ़ियों के रास्ते ही तंग होते हुए या अपने परिजनों के कंधों पर बैठकर ब्रिज पर चढ़े और वहां से स्टेशन के बाहर उतरकर ऑटो के जरिये परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। लिफ्ट की लाइट चालू थी, लेकिन उसे लॉक किया गया था। परीक्षार्थियों के साथ-साथ बुजुर्ग यात्रियों को भी लिफ्ट बंद रहने के कारण दिक्कतें उठानी पड़ीं।
विज्ञापन
झज्जर निवासी दिव्यांग सुरेंद्र ने बताया कि उसके साथ उसका भाई दीपक आया था, जिस कारण उसने सीढ़ियां पार करवा दीं, वरना उसे मुश्किल उठानी पड़ती। इसी प्रकार हिसार आजाद नगर निवासी बुजुर्ग यात्री श्योलाल ने कहा कि उसकी पत्नी सरला देवी को घुटनों का दर्द है। रेलवे की सीढ़ियां क्रॉस करते-करते आधे घंटे से ज्यादा समय लगा और परेशानी उठानी पड़ी वो अलग। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ के मुकेश ने कहा कि वह सामान्य सड़क पर भी लाठी के सहारे चल पाता है। ऐसे में लाठी के सहारे सीढ़ियां पार करने में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा।
अमर उजाला इंपेक्ट.... खबर छपते ही स्कूल के बाहर लगा बैनर हटा
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होते ही ठाकुरदास भार्गव स्कूल के बाहर मोबाइल और बैग रखने वाले परीक्षार्थियों से 10-10 रुपये लेने का बैनर रविवार को हटा लिया गया। स्कूल प्रबंधन ने कैंटीन संचालक का काउंटर भी हटवा दिया। स्कूल के बाहर कैंटीन संचालक ने 10-10 रुपये लेने बंद कर दिए। हालांकि परीक्षा केंद्रों के बाहर के दुकानदारों ने इस तरह का बिजनेस बरकरार रखा और बैग या सामान पैसे लेकर रखवाते रहे। हालांकि उन्होंने बैग या सामान को छिपाया हुआ था और इस तरह का बोर्ड लगाने से भी परहेज किया। मजबूरन परीक्षार्थियों को बैग बाहर रखने पर 10 से 20 रुपये चुकाने पड़े।
चार दिनों में करीब डेढ़ लाख ने दी परीक्षा
ग्रुप डी की परीक्षा के लिए निर्धारित चारों दिनों 10 व 11 नवंबर तथा 17 व 18 नवंबर को हिसार में करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी हैं। प्रत्येक दिन हिसार जिले के 99 परीक्षा केंद्रों पर दोनों सत्रों में 51 हजार 480 परीक्षार्थियों के अनुसार चार दिनों में 2 लाख 5 हजार 920 परीक्षार्थियों के लिए व्यवस्था की गई। इनमें से 25 से 30 प्रतिशत परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे।
रेलवे स्टेशन और रोडवेज बसों में दूसरे दिन भी रही भीड़
उधर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर रविवार को दूसरे दिन भी भारी भीड़ देखने को मिली। रोडवेज की बसों में अपेक्षा से दोगुने यात्रियों को सफर करवाना पड़ा, जबकि रेलगाड़ियों में भी खिड़कियों में लटककर सफर करने को मजबूर हुए। सुबह गंगानगर और रेवाड़ी की ओर से आने वाली पैसेंजर ट्रेनों में परीक्षार्थियों की भीड़ रही। रोडवेेज प्रबंधन की ओर से 16 स्पेशल बसों के अलावा भी जिन रूटों पर अधिक सवारियां थीं, उन पर बसों के फेरे लगवाए गए।
रविवार को दिव्यांग परीक्षार्थियों की संख्या अधिक थी, इसीलिए उनकी सुविधा के अनुसार स्पेशल सिटिंग प्लान बनाया गया। इच्छुक दिव्यांग परीक्षार्थियों को आधे घंटे का अतिरिक्त समय भी दिया गया। करीब 80 प्रतिशत तक परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी है।
-कुलवंत सिंह, प्रिंसिपल, जाट बीएड कॉलेज
विज्ञापन
हिसार। आखिरी दिन रविवार को 40 हजार से अधिक परीक्षार्थियों ने 99 केंद्रों पर ग्रुप डी की परीक्षा दी। आखिरी दिन दिव्यांग परीक्षार्थियों की संख्या अधिक रही, इसलिए अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर ग्राउंड फ्लोर पर ही स्पेशल सिटिंग प्लान बनाया गया। दिव्यांग परीक्षार्थियों की सुविधा का ख्याल रखते हुए राइटर प्राप्त दिव्यांग परीक्षार्थियों को आधे घंटे का समय भी अधिक दिया गया। मेडिकल बोर्ड का प्रमाणित सर्टिफिकेट लेकर आने वाले दिव्यांग परीक्षार्थियों को राइटर ले जाने की अनुमति दी गई। इसी के साथ दो दिन में 74 हजार से अधिक परीक्षार्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा दी।
अधिकारियों के अनुसार रविवार को भी 51 हजार 480 परीक्षार्थियों के लिए सिटिंग प्लान लगाया गया। इसमें से करीब 80 प्रतिशत परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे, जबकि 20 प्रतिशत गैर हाजिर रहे।
विज्ञापन
रेलवे स्टेशन की लिफ्ट हो गई बंद
रेलवे स्टेशन पर हाल ही में लगाई गई लिफ्ट अन्य दिनों में तो चालू रहती है, मगर दिव्यांग परीक्षार्थियों के परीक्षा देने के लिए आने के दौरान यह लॉक कर दी गई। रेलगाड़ी में सवार होकर आए दिव्यांगों को इस कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ी। उन्हेें ग्राउंड फ्लोर से फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने के लिए लिफ्ट की सहायता नहीं मिली। आखिरकार ऐसे परीक्षार्थी सीढ़ियों के रास्ते ही तंग होते हुए या अपने परिजनों के कंधों पर बैठकर ब्रिज पर चढ़े और वहां से स्टेशन के बाहर उतरकर ऑटो के जरिये परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। लिफ्ट की लाइट चालू थी, लेकिन उसे लॉक किया गया था। परीक्षार्थियों के साथ-साथ बुजुर्ग यात्रियों को भी लिफ्ट बंद रहने के कारण दिक्कतें उठानी पड़ीं।
विज्ञापन
झज्जर निवासी दिव्यांग सुरेंद्र ने बताया कि उसके साथ उसका भाई दीपक आया था, जिस कारण उसने सीढ़ियां पार करवा दीं, वरना उसे मुश्किल उठानी पड़ती। इसी प्रकार हिसार आजाद नगर निवासी बुजुर्ग यात्री श्योलाल ने कहा कि उसकी पत्नी सरला देवी को घुटनों का दर्द है। रेलवे की सीढ़ियां क्रॉस करते-करते आधे घंटे से ज्यादा समय लगा और परेशानी उठानी पड़ी वो अलग। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ के मुकेश ने कहा कि वह सामान्य सड़क पर भी लाठी के सहारे चल पाता है। ऐसे में लाठी के सहारे सीढ़ियां पार करने में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा।
अमर उजाला इंपेक्ट.... खबर छपते ही स्कूल के बाहर लगा बैनर हटा
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होते ही ठाकुरदास भार्गव स्कूल के बाहर मोबाइल और बैग रखने वाले परीक्षार्थियों से 10-10 रुपये लेने का बैनर रविवार को हटा लिया गया। स्कूल प्रबंधन ने कैंटीन संचालक का काउंटर भी हटवा दिया। स्कूल के बाहर कैंटीन संचालक ने 10-10 रुपये लेने बंद कर दिए। हालांकि परीक्षा केंद्रों के बाहर के दुकानदारों ने इस तरह का बिजनेस बरकरार रखा और बैग या सामान पैसे लेकर रखवाते रहे। हालांकि उन्होंने बैग या सामान को छिपाया हुआ था और इस तरह का बोर्ड लगाने से भी परहेज किया। मजबूरन परीक्षार्थियों को बैग बाहर रखने पर 10 से 20 रुपये चुकाने पड़े।
चार दिनों में करीब डेढ़ लाख ने दी परीक्षा
ग्रुप डी की परीक्षा के लिए निर्धारित चारों दिनों 10 व 11 नवंबर तथा 17 व 18 नवंबर को हिसार में करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी हैं। प्रत्येक दिन हिसार जिले के 99 परीक्षा केंद्रों पर दोनों सत्रों में 51 हजार 480 परीक्षार्थियों के अनुसार चार दिनों में 2 लाख 5 हजार 920 परीक्षार्थियों के लिए व्यवस्था की गई। इनमें से 25 से 30 प्रतिशत परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे।
रेलवे स्टेशन और रोडवेज बसों में दूसरे दिन भी रही भीड़
उधर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर रविवार को दूसरे दिन भी भारी भीड़ देखने को मिली। रोडवेज की बसों में अपेक्षा से दोगुने यात्रियों को सफर करवाना पड़ा, जबकि रेलगाड़ियों में भी खिड़कियों में लटककर सफर करने को मजबूर हुए। सुबह गंगानगर और रेवाड़ी की ओर से आने वाली पैसेंजर ट्रेनों में परीक्षार्थियों की भीड़ रही। रोडवेेज प्रबंधन की ओर से 16 स्पेशल बसों के अलावा भी जिन रूटों पर अधिक सवारियां थीं, उन पर बसों के फेरे लगवाए गए।
रविवार को दिव्यांग परीक्षार्थियों की संख्या अधिक थी, इसीलिए उनकी सुविधा के अनुसार स्पेशल सिटिंग प्लान बनाया गया। इच्छुक दिव्यांग परीक्षार्थियों को आधे घंटे का अतिरिक्त समय भी दिया गया। करीब 80 प्रतिशत तक परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी है।
-कुलवंत सिंह, प्रिंसिपल, जाट बीएड कॉलेज