{"_id":"5a9074404f1c1b78028b622b","slug":"21519416384-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंदर दो मंत्री किसानों की आय दोगुनी करने पर कर रहे थे मंथन, बाहर काले झंडे लेकर बैठे किसान मांगते रहे पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंदर दो मंत्री किसानों की आय दोगुनी करने पर कर रहे थे मंथन, बाहर काले झंडे लेकर बैठे किसान मांगते रहे पानी
Updated Sat, 24 Feb 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ और सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर एचएयू में आयोजित समिट में किसानों को आय दोगुनी करने पर मंथन कर रहे थे, वहीं बाहर किसान अपने सूखे खेतों में फसल उगाने के लिए दो सप्ताह नहरी पानी मांग रहे थे।
दो सप्ताह नहरी पानी की मांग को लेकर पिछले 38 दिन से लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने 21 फरवरी से असहयोग आंदोलन चलाया हुआ है। इसमें किसानों ने 23 फरवरी को कृषि मंत्री ओपी धनखड़, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर को एचएयू में आयोजित होने वाली एग्री टॉप 100 समिट में न घुसने देने का एलान किया था। खुफिया रिपोर्ट के बाद कृषि मंत्री शुक्रवार सुबह साढे़ 11 बजे शुरू होने वाले कार्यक्रम के लिए वीरवार रात करीब 11 बजे एचएयू में पहुंच गए। किसानों को पता लगा तो वे एचएयू के गेट नंबर एक पर काले झंडे लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पहुंच गए। पुलिस की ओर से गेट बंद किए जाने के बाद किसान वहीं पर धरना देकर बैठ गए। एचएयू के गेट नंबर चार पर आंगनबाड़ी वर्कर्स काले झंडे लेकर मंत्रियों का विरोध करने के लिए बैठ गईं। एचएयू के गेट नंबर एक पर बैठे किसान प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नहरी पानी की मांग करते रहे।
एक घंटा देरी से पहुंचे सहकारिता मंत्री
सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर करीब एक घंटा लेट साढे़ 12 बजे एचएयू पहुंचे। सहकारिता मंत्री को पुलिस गेट नंबर दो से अंदर समिट में लेकर पहुंची। गेट नंबर दो और तीन का उपयोग कभी कभार ही किया जाता है। इन दोनों गेट पर भी भारी पुलिस बल लगाकर बेरिकेड्स लगाकर इसे बंद किया गया था।
विज्ञापन
किसान बोले - जो मंत्री एक गिलास पानी नहीं पिला सका, नहर में पानी कहां से देगा
दोपहर बाद करीब दो बजे कृषि मंत्री ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। किसानों ने दो सप्ताह पानी मांगा तो ओपी धनखड़ बोले, मेरे पास सिंचाई विभाग नहीं है। मैं सीएम साहब से अनुरोध करूंगा कि खनोरी हेड से किसानों को पूरा पानी दिलाया जाए। इसके लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी प्रयास करेंगे। किसानों ने कहा आप तीन साल पहले आश्वासन देकर हमें धरने से उठा गए थे। इस बार हम आश्वासन पर नहीं उठेंगे। कृषि मंत्री ने जवाब में कहा कि अब मेरे पास सिंचाई विभाग नहीं है। इसके बाद किसान बातचीत छोड़कर बाहर आ गए। किसानों ने धरना खत्म करने से इनकार कर दिया। बाहर आकर किसान बोले, जो कृषि मंत्री हमें मीटिंग में एक गिलास पानी नहीं पिला सका, वो हमें नहर में पानी कैसे देगा।
एसवाईएल से भी पूरा नहीं होगा पानी
किसानों के सामने आंकडे़ रखते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि एसवाईएल से भी पानी की पूर्ति नहीं होने वाली। एसवाईएल से हमें केवल 19 लाख एकड़ फीट पानी मिलेगा। हमें करीब 40 लाख एकड़ फीट पानी की कमी है। सरकार किसी हिस्से का पानी काटकर किसी दूसरे को नहीं दे सकती। संतुलन बनाना भी सरकार का काम है।
विरोध पर बोले मंत्री, मैं अपना काम करता रहूंगा, वे अपना करें
मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि मैं आंदोलन का आदमी रहा हूं। अभी तीन साल से ही सरकार में काम कर रहा हूं। मैं अपना काम करता रहूंगा, वो अपना काम करें। जिसको राजनीति करनी हो राजनीति करें। कृषि मंत्री ने कहा कि लाठीचार्ज गलत है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात उठाने और आंदोलन का हक है।
विज्ञापन
हिसार।
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ और सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर एचएयू में आयोजित समिट में किसानों को आय दोगुनी करने पर मंथन कर रहे थे, वहीं बाहर किसान अपने सूखे खेतों में फसल उगाने के लिए दो सप्ताह नहरी पानी मांग रहे थे।
दो सप्ताह नहरी पानी की मांग को लेकर पिछले 38 दिन से लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने 21 फरवरी से असहयोग आंदोलन चलाया हुआ है। इसमें किसानों ने 23 फरवरी को कृषि मंत्री ओपी धनखड़, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर को एचएयू में आयोजित होने वाली एग्री टॉप 100 समिट में न घुसने देने का एलान किया था। खुफिया रिपोर्ट के बाद कृषि मंत्री शुक्रवार सुबह साढे़ 11 बजे शुरू होने वाले कार्यक्रम के लिए वीरवार रात करीब 11 बजे एचएयू में पहुंच गए। किसानों को पता लगा तो वे एचएयू के गेट नंबर एक पर काले झंडे लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पहुंच गए। पुलिस की ओर से गेट बंद किए जाने के बाद किसान वहीं पर धरना देकर बैठ गए। एचएयू के गेट नंबर चार पर आंगनबाड़ी वर्कर्स काले झंडे लेकर मंत्रियों का विरोध करने के लिए बैठ गईं। एचएयू के गेट नंबर एक पर बैठे किसान प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नहरी पानी की मांग करते रहे।
विज्ञापन
एक घंटा देरी से पहुंचे सहकारिता मंत्री
सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर करीब एक घंटा लेट साढे़ 12 बजे एचएयू पहुंचे। सहकारिता मंत्री को पुलिस गेट नंबर दो से अंदर समिट में लेकर पहुंची। गेट नंबर दो और तीन का उपयोग कभी कभार ही किया जाता है। इन दोनों गेट पर भी भारी पुलिस बल लगाकर बेरिकेड्स लगाकर इसे बंद किया गया था।
विज्ञापन
किसान बोले - जो मंत्री एक गिलास पानी नहीं पिला सका, नहर में पानी कहां से देगा
दोपहर बाद करीब दो बजे कृषि मंत्री ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। किसानों ने दो सप्ताह पानी मांगा तो ओपी धनखड़ बोले, मेरे पास सिंचाई विभाग नहीं है। मैं सीएम साहब से अनुरोध करूंगा कि खनोरी हेड से किसानों को पूरा पानी दिलाया जाए। इसके लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी प्रयास करेंगे। किसानों ने कहा आप तीन साल पहले आश्वासन देकर हमें धरने से उठा गए थे। इस बार हम आश्वासन पर नहीं उठेंगे। कृषि मंत्री ने जवाब में कहा कि अब मेरे पास सिंचाई विभाग नहीं है। इसके बाद किसान बातचीत छोड़कर बाहर आ गए। किसानों ने धरना खत्म करने से इनकार कर दिया। बाहर आकर किसान बोले, जो कृषि मंत्री हमें मीटिंग में एक गिलास पानी नहीं पिला सका, वो हमें नहर में पानी कैसे देगा।
एसवाईएल से भी पूरा नहीं होगा पानी
किसानों के सामने आंकडे़ रखते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि एसवाईएल से भी पानी की पूर्ति नहीं होने वाली। एसवाईएल से हमें केवल 19 लाख एकड़ फीट पानी मिलेगा। हमें करीब 40 लाख एकड़ फीट पानी की कमी है। सरकार किसी हिस्से का पानी काटकर किसी दूसरे को नहीं दे सकती। संतुलन बनाना भी सरकार का काम है।
विरोध पर बोले मंत्री, मैं अपना काम करता रहूंगा, वे अपना करें
मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि मैं आंदोलन का आदमी रहा हूं। अभी तीन साल से ही सरकार में काम कर रहा हूं। मैं अपना काम करता रहूंगा, वो अपना काम करें। जिसको राजनीति करनी हो राजनीति करें। कृषि मंत्री ने कहा कि लाठीचार्ज गलत है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात उठाने और आंदोलन का हक है।