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ओवरलोड कैसे रोकेंगे जब किसी वाहन को चैक ही नहीं कर रहे
Updated Tue, 26 Dec 2017 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
अमर उजाला टीम ने सोमवार रात बालसमंद के स्थायी नाके की लाइव कवरेज की। टीम ने देखा कि नाका सुनसान पड़ा है। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके से गुजर रहे वाहनों की चेकिंग नहीं कर रहे थे। इसके बाद रात 10 बजे वाली शिफ्ट में खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर राजेंद्र जांगड़ा की निगरानी में टीम ड्यूटी पर थी। उनके पास ड्यूटी का एक आदेश पत्र था। इसमें ओवरलोड वाहनों के चालान का निर्देश था। इसके बावजूद टीम वहां से गुजर रहे किसी वाहन को चेक नहीं कर रही थी।
अमर उजाला टीम ने रात 8 बजकर 10 मिनट से रात 10 बजकर 21 मिनट तक बालसमंद नाके पर स्टिंग ऑपरेशन किया। इसमें यहां से आठ भारी वाहन गुजरे। इसमें से किसी को भी टीम ने नहीं जांचा। यहां जांच के नाम पर केवल सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हो रही थी। यहां लाइट गुल होने पर सीसीटीवी की रिकार्डिंग भी बंद हो गई। अधिकारियों से चालान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी चालान बुक ही नहीं। कुल मिलाकर पिछले सात दिन में अधिकारी यहां पहुंचकर नाके पर बैठकर खाली हाथ ही लौट जाते हैं। निगरानी की पूरी जिम्मेदारी सीसीटीवी पर है।
वाहन चालकों ने अपनाए चोर रास्ते
टोल टैक्स नाके के साथ में ढाबा चलाने वाले मोनू शर्मा ने बताया कि पहले यहां से रात के समय रोजाना 50 से 60 भारी वाहन गुजरते थे। अब इनकी संख्या 20 से 25 रह गई है। नाके से पहले हिसार के गांव सरसाना से बासड़ा होते हुए शहर तक आने का रास्ता है। इसके अलावा मंडी आदमपुुर जाने के लिए भी रास्ता है। भारी वाहन चालक अब नाके की बजाय उन रूट को अपना रहे हैं।
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हिसार।
अमर उजाला टीम ने सोमवार रात बालसमंद के स्थायी नाके की लाइव कवरेज की। टीम ने देखा कि नाका सुनसान पड़ा है। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके से गुजर रहे वाहनों की चेकिंग नहीं कर रहे थे। इसके बाद रात 10 बजे वाली शिफ्ट में खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर राजेंद्र जांगड़ा की निगरानी में टीम ड्यूटी पर थी। उनके पास ड्यूटी का एक आदेश पत्र था। इसमें ओवरलोड वाहनों के चालान का निर्देश था। इसके बावजूद टीम वहां से गुजर रहे किसी वाहन को चेक नहीं कर रही थी।
अमर उजाला टीम ने रात 8 बजकर 10 मिनट से रात 10 बजकर 21 मिनट तक बालसमंद नाके पर स्टिंग ऑपरेशन किया। इसमें यहां से आठ भारी वाहन गुजरे। इसमें से किसी को भी टीम ने नहीं जांचा। यहां जांच के नाम पर केवल सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हो रही थी। यहां लाइट गुल होने पर सीसीटीवी की रिकार्डिंग भी बंद हो गई। अधिकारियों से चालान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी चालान बुक ही नहीं। कुल मिलाकर पिछले सात दिन में अधिकारी यहां पहुंचकर नाके पर बैठकर खाली हाथ ही लौट जाते हैं। निगरानी की पूरी जिम्मेदारी सीसीटीवी पर है।
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वाहन चालकों ने अपनाए चोर रास्ते
टोल टैक्स नाके के साथ में ढाबा चलाने वाले मोनू शर्मा ने बताया कि पहले यहां से रात के समय रोजाना 50 से 60 भारी वाहन गुजरते थे। अब इनकी संख्या 20 से 25 रह गई है। नाके से पहले हिसार के गांव सरसाना से बासड़ा होते हुए शहर तक आने का रास्ता है। इसके अलावा मंडी आदमपुुर जाने के लिए भी रास्ता है। भारी वाहन चालक अब नाके की बजाय उन रूट को अपना रहे हैं।
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