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सीएजी की चार सदस्यीय टीम ने देर रात तक खंगाला दवा खरीद रिकार्ड
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:55 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से आई सीएजी की चार सदस्यीय टीम ने मंगलवार देर रात तक नागरिक अस्पताल में दवा रिकॉर्ड घोटाले में करीब तीन घंटे तक जांच की। इसमें वर्ष 2014-15 के रिकॉर्ड को खंगाला। टीम ने कुछ फाइलें अपने कब्जे में लीं। इनमें दवा कंपनी के पते की जानकारी ली। दवा आपूर्ति करने वाली तीन कंपनियों के पते फर्जी निकले।
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर रमण श्योराण, सुरेश चौधरी की टीम ने मंगलवार दोपहर को मुख्यालय के निर्देश पर दवाइयों का रिकॉर्ड तलब किया। इन दोनों अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक रिकॉर्ड जांचा। इसमें नेशनल हेल्थ मिशन के वर्ष 2014-15 के रिकॉर्ड का ब्योरा लिया। सभी दस्तावेजों के सीरियल नंबर चेक किए। इसके अलावा दस्तावेजों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर को भी जांचा। दवा खरीद के लिए जारी किए गए ऑर्डर, दवा के बिल की जांच की। सीनियर अकाउंट ऑफिसर, एक अकाउंट ऑफिसर और दो सहायक शामिल थे। सीएजी की टीम ने फर्म के पते को लेकर रिपोर्ट मांगी। जांच में पाया गया कि शगुन फर्म के पास लाइसेंस नहीं था। इस फर्म से डेंटल का सामान खरीदा गया है।
इन कंपनियों के पते फर्जी निकले
दवा आपूर्ति करने वाली दो कंपनियों के पते फर्जी पाए गए। सालासर कंपनी का पता सेक्टर-13 के जिस एससीएफ दिया गया था, हुडा की ओर से यह एससीएफ कभी बनाया नहीं गया। इसके अलावा दूसरी कंपनी सेक्टर-13 के शॉप कम बूथ नंबर 92 का पता दिया गया। यहां पिछले लंबे समय से सैलून चल रहा है। शगुन कंपनी का जो पता दिखाया गया, वहां एक दंपति रहता है।
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अधिकारियों को मोबाइल स्विच ऑफ
स्वास्थ्य विभाग की इस जांच के समय नागरिक अस्पताल में हड़कंप रहा। सेंट्रल स्टोर से जुडे़ अधिकारियों के अलावा, फार्मासिस्ट, ड्रग इंस्पेक्टर सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया।
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हिसार।
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से आई सीएजी की चार सदस्यीय टीम ने मंगलवार देर रात तक नागरिक अस्पताल में दवा रिकॉर्ड घोटाले में करीब तीन घंटे तक जांच की। इसमें वर्ष 2014-15 के रिकॉर्ड को खंगाला। टीम ने कुछ फाइलें अपने कब्जे में लीं। इनमें दवा कंपनी के पते की जानकारी ली। दवा आपूर्ति करने वाली तीन कंपनियों के पते फर्जी निकले।
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर रमण श्योराण, सुरेश चौधरी की टीम ने मंगलवार दोपहर को मुख्यालय के निर्देश पर दवाइयों का रिकॉर्ड तलब किया। इन दोनों अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक रिकॉर्ड जांचा। इसमें नेशनल हेल्थ मिशन के वर्ष 2014-15 के रिकॉर्ड का ब्योरा लिया। सभी दस्तावेजों के सीरियल नंबर चेक किए। इसके अलावा दस्तावेजों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर को भी जांचा। दवा खरीद के लिए जारी किए गए ऑर्डर, दवा के बिल की जांच की। सीनियर अकाउंट ऑफिसर, एक अकाउंट ऑफिसर और दो सहायक शामिल थे। सीएजी की टीम ने फर्म के पते को लेकर रिपोर्ट मांगी। जांच में पाया गया कि शगुन फर्म के पास लाइसेंस नहीं था। इस फर्म से डेंटल का सामान खरीदा गया है।
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इन कंपनियों के पते फर्जी निकले
दवा आपूर्ति करने वाली दो कंपनियों के पते फर्जी पाए गए। सालासर कंपनी का पता सेक्टर-13 के जिस एससीएफ दिया गया था, हुडा की ओर से यह एससीएफ कभी बनाया नहीं गया। इसके अलावा दूसरी कंपनी सेक्टर-13 के शॉप कम बूथ नंबर 92 का पता दिया गया। यहां पिछले लंबे समय से सैलून चल रहा है। शगुन कंपनी का जो पता दिखाया गया, वहां एक दंपति रहता है।
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अधिकारियों को मोबाइल स्विच ऑफ
स्वास्थ्य विभाग की इस जांच के समय नागरिक अस्पताल में हड़कंप रहा। सेंट्रल स्टोर से जुडे़ अधिकारियों के अलावा, फार्मासिस्ट, ड्रग इंस्पेक्टर सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया।