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निगम की ढीली कार्रवाई, प्रोसीडिंग लिखने में लगे एक महीना दो दिन
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
शहर की सरकार हाउस में एजेंडे पास कर विकास के लिए रास्ता बनाती है, लेकिन नगर निगम इन एजेंडों की प्रोसीडिंग ही सरकार के पास देरी से भेज रहा है। 28 जुलाई को होने वाली हाउस की मीटिंग की प्रोसीडिंग निगम अधिकारियों ने देरी से भेजी। ऐसे में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेयर ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की यह कहानी एक बार की नहीं, बल्कि हर बार ही ऐसा हो रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर असर नहीं
हाउस की हर बार होने वाली मीटिंग में पार्षद चिल्लाते रहते हैं पिछली मीटिंग में भी ये एजेंडा रखा गया था, लेकिन इस पर एक्शन नहीं लिया गया अथवा कोई काम नहीं हो पाया। इस पर अधिकारी केवल एक ही जवाब देते हैं कि कोई बात नहीं, इस बार हो जाएगा। कारण केवल देरी से प्रोसीडिंग भेजना है।
प्रोसीडिंग अगर जल्द सरकार के पास न भेजें तो विकास कार्यों में देरी हो जाती है। क्योंकि जब हाउस में पास एजेंडों और चर्चा के साथ सहमति से लिए गए हाउस के फैसलों की प्रोसीडिंग लिखी जाती है। ये प्रोसीडिंग सरकार के पास भेजी जाती है, ताकि वहां से मुहर लग सके। जो एजेंडे अथवा प्रस्ताव फिजिबल होते हैं, सरकार उन पर काम करवाने की अनुमति दे देती है, जो नहीं हो सकते, उन पर ऑब्जेक्शन आ जाती है।
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एक्सपर्ट व्यू
पूर्व सचिव रिटायर्ड गिरधर गोपाल का कहना है कि कमेटियों में प्रोसीडिंग डीसी को भेजनी होती है। इसके लिए 48 घंटे का समय होता है। इसके अलावा निगमों में तीन दिन का समय होता है। यह प्रोसीडिंग यूएलबी को भेजनी होती है।
राजनीतिक दबाव वालों के बदले जाते हैं प्रस्ताव
सूत्रों का कहना है कि प्रोसीडिंग भेजने में निगम अधिकारी लापरवाही करते हैं। इसके पीछे राजनीतिक रसूख रखने वाले एजेंडे में रखे जाने वाले प्रस्तावों में फेरबदल कर देते हैं। होता ये भी है जो एजेंडे हाउस में नहीं रखे गए, कई पार्षद तो प्रोसीडिंग में लिखवा देते हैं।
इस बार निगम ने की ये अच्छी शुरुआत
नगर निगम ने पहली बार अच्छी शुरुआत की है। जो भी प्रोसीडिंग यूएलबी को भेजी गई है, उसकी एक एक प्रति नगर निगम के सभी पार्षदों को भेजी गई है। पहली बार नई शुरुआत और पारदर्शिता को लेकर निगम में इस बात की खूब चर्चा है।
हर बार प्रोसीडिंग देरी से भेजी जा रही है। अधिकारियों से इस बात का जवाब मांगा जाएगा कि आखिर वे हर बार ऐसा क्यों कर रहे हैं। जो भी काम हो वो समय पर होगा तो विकास कार्यों में भी देरी नहीं होगी।
-शकुंतला राजलीवाला, मेयर नगर निगम
पिछली मीटिंग के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता मेरे आने के बाद जो मीटिंग हुई हैं, उनकी प्रोसीडिंग समय पर भेजी जा रही है। हां इस बार कुछ देरी हुई है, इसमें सुधार किया जाएगा।
- इंद्रजीत कुल्हड़िया, ईओ नगर निगम
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हिसार।
शहर की सरकार हाउस में एजेंडे पास कर विकास के लिए रास्ता बनाती है, लेकिन नगर निगम इन एजेंडों की प्रोसीडिंग ही सरकार के पास देरी से भेज रहा है। 28 जुलाई को होने वाली हाउस की मीटिंग की प्रोसीडिंग निगम अधिकारियों ने देरी से भेजी। ऐसे में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेयर ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की यह कहानी एक बार की नहीं, बल्कि हर बार ही ऐसा हो रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर असर नहीं
हाउस की हर बार होने वाली मीटिंग में पार्षद चिल्लाते रहते हैं पिछली मीटिंग में भी ये एजेंडा रखा गया था, लेकिन इस पर एक्शन नहीं लिया गया अथवा कोई काम नहीं हो पाया। इस पर अधिकारी केवल एक ही जवाब देते हैं कि कोई बात नहीं, इस बार हो जाएगा। कारण केवल देरी से प्रोसीडिंग भेजना है।
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प्रोसीडिंग अगर जल्द सरकार के पास न भेजें तो विकास कार्यों में देरी हो जाती है। क्योंकि जब हाउस में पास एजेंडों और चर्चा के साथ सहमति से लिए गए हाउस के फैसलों की प्रोसीडिंग लिखी जाती है। ये प्रोसीडिंग सरकार के पास भेजी जाती है, ताकि वहां से मुहर लग सके। जो एजेंडे अथवा प्रस्ताव फिजिबल होते हैं, सरकार उन पर काम करवाने की अनुमति दे देती है, जो नहीं हो सकते, उन पर ऑब्जेक्शन आ जाती है।
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पूर्व सचिव रिटायर्ड गिरधर गोपाल का कहना है कि कमेटियों में प्रोसीडिंग डीसी को भेजनी होती है। इसके लिए 48 घंटे का समय होता है। इसके अलावा निगमों में तीन दिन का समय होता है। यह प्रोसीडिंग यूएलबी को भेजनी होती है।
राजनीतिक दबाव वालों के बदले जाते हैं प्रस्ताव
सूत्रों का कहना है कि प्रोसीडिंग भेजने में निगम अधिकारी लापरवाही करते हैं। इसके पीछे राजनीतिक रसूख रखने वाले एजेंडे में रखे जाने वाले प्रस्तावों में फेरबदल कर देते हैं। होता ये भी है जो एजेंडे हाउस में नहीं रखे गए, कई पार्षद तो प्रोसीडिंग में लिखवा देते हैं।
इस बार निगम ने की ये अच्छी शुरुआत
नगर निगम ने पहली बार अच्छी शुरुआत की है। जो भी प्रोसीडिंग यूएलबी को भेजी गई है, उसकी एक एक प्रति नगर निगम के सभी पार्षदों को भेजी गई है। पहली बार नई शुरुआत और पारदर्शिता को लेकर निगम में इस बात की खूब चर्चा है।
हर बार प्रोसीडिंग देरी से भेजी जा रही है। अधिकारियों से इस बात का जवाब मांगा जाएगा कि आखिर वे हर बार ऐसा क्यों कर रहे हैं। जो भी काम हो वो समय पर होगा तो विकास कार्यों में भी देरी नहीं होगी।
-शकुंतला राजलीवाला, मेयर नगर निगम
पिछली मीटिंग के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता मेरे आने के बाद जो मीटिंग हुई हैं, उनकी प्रोसीडिंग समय पर भेजी जा रही है। हां इस बार कुछ देरी हुई है, इसमें सुधार किया जाएगा।
- इंद्रजीत कुल्हड़िया, ईओ नगर निगम