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दोस्त की नाबालिग बेटी का अपहरण करने के दोषी को पांच साल की कैद
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। अपने दोस्त की नाबालिग बेटी को डरा-धमकाकर अपहरण करने के मामले में दोषी को कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. पंकज की कोर्ट ने दोषी हांसी के गांव पूठी समैण वासी 49 वर्षीय ईश्वर को पांच साल की सजा सुनाई है। ईश्वर को इस मामले में 18 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था।
दुष्कर्म की धारा में भी दर्ज हुआ था केस, कोर्ट में नहीं हुआ साबित
मामले में 14 अप्रैल 2017 को नाबालिग छात्रा के पिता के बयान पर उसकी साढ़े 17 वर्षीय 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी के गुमशुदा होने का केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उसको दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेेशन से बरामद कर लिया था। बरामदगी के बाद नाबालिग छात्रा ने आरोपी ईश्वर के खिलाफ उसको डरा-धमकाकर अपहरण करने व उसके साथ दुष्कर्म करने का बयान दर्ज करवाया था। बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट व अपहरण की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। डीएनए में फोरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म साबित नहीं होने पर इस केस में कोर्ट ने अपहरण की धारा में दोषी को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है।
इस बारे में अपने हल्फिया बयान में दोषी ईश्वर ने कुबूल किया कि वह उसी स्कूल में बस का ड्राइवर था, जहां पर छात्रा पढ़ती थी। इसी स्कूल में छात्रा का पिता भी काम करता है। दोषी के अनुसार छात्रा के पिता के साथ उसकी दोस्ती थी और अक्सर वह उसके घर भी जाता था। इसी दौरान उसने छात्रा पर गलत नजर रखनी शुरू कर दी। जब उसे मौका लगा तो वह छात्रा को डरा-धमकाकर उसे अपने साथ हैदराबाद ले गया। वहां पर उसने करीब 15 दिन तक छात्रा को अपने साथ रखा था। जब वह दोनों वापस आ रहे थे तो पुलिस ने दिल्ली स्टेशन से दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।
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हिसार। अपने दोस्त की नाबालिग बेटी को डरा-धमकाकर अपहरण करने के मामले में दोषी को कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. पंकज की कोर्ट ने दोषी हांसी के गांव पूठी समैण वासी 49 वर्षीय ईश्वर को पांच साल की सजा सुनाई है। ईश्वर को इस मामले में 18 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था।
दुष्कर्म की धारा में भी दर्ज हुआ था केस, कोर्ट में नहीं हुआ साबित
मामले में 14 अप्रैल 2017 को नाबालिग छात्रा के पिता के बयान पर उसकी साढ़े 17 वर्षीय 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी के गुमशुदा होने का केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उसको दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेेशन से बरामद कर लिया था। बरामदगी के बाद नाबालिग छात्रा ने आरोपी ईश्वर के खिलाफ उसको डरा-धमकाकर अपहरण करने व उसके साथ दुष्कर्म करने का बयान दर्ज करवाया था। बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, पोक्सो एक्ट व अपहरण की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। डीएनए में फोरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म साबित नहीं होने पर इस केस में कोर्ट ने अपहरण की धारा में दोषी को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है।
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इस बारे में अपने हल्फिया बयान में दोषी ईश्वर ने कुबूल किया कि वह उसी स्कूल में बस का ड्राइवर था, जहां पर छात्रा पढ़ती थी। इसी स्कूल में छात्रा का पिता भी काम करता है। दोषी के अनुसार छात्रा के पिता के साथ उसकी दोस्ती थी और अक्सर वह उसके घर भी जाता था। इसी दौरान उसने छात्रा पर गलत नजर रखनी शुरू कर दी। जब उसे मौका लगा तो वह छात्रा को डरा-धमकाकर उसे अपने साथ हैदराबाद ले गया। वहां पर उसने करीब 15 दिन तक छात्रा को अपने साथ रखा था। जब वह दोनों वापस आ रहे थे तो पुलिस ने दिल्ली स्टेशन से दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।
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