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अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए तनाव मुक्त व दवा मुक्त जीवन पर वर्कशॉप आयोजित
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हिसार। अधिकारियों-कर्मचारियों को तनाव मुक्त करने तथा दवा मुक्त जीवन जीने के तरीके सिखाने के लिए उपायुक्त अशोक कुमार मीणा के प्रयासों से जिला सभागार में शनिवार को एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। नागपुर स्थित नेशनल एजुकेशन नामक एनजीओ से डॉ. आतीश कापसे ने बड़े ही सहज अंदाज में अधिकारियों-कर्मचारियों को दैनिक जीवन में तनाव से मुक्त रहने तथा पूरे परिवार को दवाओं के बिना ही स्वस्थ रखने के प्रभावशाली तरीके समझाए।
डॉ. कापसे ने कहा कि रोजमर्रा की समस्याओं के चलते हम हंसना भूल गए हैं। हंसने के लिए हम बड़ी खुशी मिलने का इंतजार करते हैं, जिसके कारण छोटी खुशियां अपना महत्व खो देती हैं। हमें ऐसा स्वभाव बनाना चाहिए कि हर खुशी हमारी प्रसन्नता का आधार बन जाए। उन्होंने कहा कि तनाव केवल दिमाग की एक सोच है, जिसे कुछ सामान्य उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए ध्यान, योग, प्राणायाम, श्वास प्रक्रिया पर ध्यान, संगीत, दूसरों से बातचीत, खेल, लेखन, अध्ययन व बागवानी आदि का सहारा लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीएलसी (क्लैप, लाफ व क्राई) पद्धति भी तनाव को दूर करने में मददगार साबित होती है। ताली बजाने से जहां एक्यूप्रेशर का लाभ मिलता है, वहीं हंसने व रोने से मनोभावों की निवृत्ति होती है। उन्होंने तनाव से होने वाली हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप, ब्रेन हैमरेज व हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हृदयाघात कभी भी अचानक नहीं आता, बल्कि यह 4-5 साल की प्रक्रिया है, जो हमारी गलत जीवनशैली का परिणाम होता है।
4-5 लाख लगाने से अच्छा बदलाव करें
डॉ. कापसे ने कहा कि दिल की बीमारी होने पर 4-5 लाख रुपये लगाने से अच्छा है कि हम अपने जीने के तरीके में थोड़ा बदलाव कर लें। 35-40 वर्ष की आयु के उपरांत हर व्यक्ति को प्रतिवर्ष पूरे शरीर की जांच करवानी चाहिए, जिसके आधार पर उसे अपनी जीवनशैली को निर्धारित करना चाहिए। डॉ. कापसे ने स्वस्थ रहने के लिए घरों में आसानी से उपलब्ध लहसुन, कढ़ी पत्ता, तुलसी, अर्जुन की छाल, अलसी व अन्य वस्तुओं के महत्व व इनके उपयोग के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।
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डॉ. कापसे ने कहा कि रोजमर्रा की समस्याओं के चलते हम हंसना भूल गए हैं। हंसने के लिए हम बड़ी खुशी मिलने का इंतजार करते हैं, जिसके कारण छोटी खुशियां अपना महत्व खो देती हैं। हमें ऐसा स्वभाव बनाना चाहिए कि हर खुशी हमारी प्रसन्नता का आधार बन जाए। उन्होंने कहा कि तनाव केवल दिमाग की एक सोच है, जिसे कुछ सामान्य उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए ध्यान, योग, प्राणायाम, श्वास प्रक्रिया पर ध्यान, संगीत, दूसरों से बातचीत, खेल, लेखन, अध्ययन व बागवानी आदि का सहारा लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीएलसी (क्लैप, लाफ व क्राई) पद्धति भी तनाव को दूर करने में मददगार साबित होती है। ताली बजाने से जहां एक्यूप्रेशर का लाभ मिलता है, वहीं हंसने व रोने से मनोभावों की निवृत्ति होती है। उन्होंने तनाव से होने वाली हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप, ब्रेन हैमरेज व हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हृदयाघात कभी भी अचानक नहीं आता, बल्कि यह 4-5 साल की प्रक्रिया है, जो हमारी गलत जीवनशैली का परिणाम होता है।
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4-5 लाख लगाने से अच्छा बदलाव करें
डॉ. कापसे ने कहा कि दिल की बीमारी होने पर 4-5 लाख रुपये लगाने से अच्छा है कि हम अपने जीने के तरीके में थोड़ा बदलाव कर लें। 35-40 वर्ष की आयु के उपरांत हर व्यक्ति को प्रतिवर्ष पूरे शरीर की जांच करवानी चाहिए, जिसके आधार पर उसे अपनी जीवनशैली को निर्धारित करना चाहिए। डॉ. कापसे ने स्वस्थ रहने के लिए घरों में आसानी से उपलब्ध लहसुन, कढ़ी पत्ता, तुलसी, अर्जुन की छाल, अलसी व अन्य वस्तुओं के महत्व व इनके उपयोग के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।
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