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प्रधानमंत्री का 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना नहीं हो सकता पूरा - डॉ. धनखड़

Tue, 25 Jun 2019 01:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2019 01:48 AM IST
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प्रधानमंत्री का 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना नहीं हो सकता पूरा - डॉ. धनखड़
हिसार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का विचार काफी अच्छा है। मगर वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस अवधि तक किसानों की आयु दोगुनी करना लगभग असंभव है। मगर भविष्य में सरकार इस दिशा में पॉलिसी बनाती है। मसलन बाजार तक किसानों की सीधी पहुंच करना, मध्यस्थ व्यवस्था को खत्म करना आदि पॉलिसी बनाकर इसे संभव बनाया जा सकता है।
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यह कहना है यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स यूएसए के प्रोफेसर डॉ. ओपी धनखड़ का। डॉ. धनखड़ हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में यूज ऑफ एडवांस्ड बायो टेक्नोलॉजिकल टेक्निक्स फॉर क्रॉप इंप्रूवमेंट विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप में शिरकत कर रहे हैं।
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मूल रूप से रोहतक जिले के रहने वाले डॉ. धनखड़ ने कहा कि अमेरिका और भारत की परिस्थितियां काफी भिन्न हैं। वहां ज्यादा किसानों के पास एक-एक हजार एकड़ तक जमीन है। वहां सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत किसान ही ऐसे हैं, जिनके पास 20 से 40 एकड़ जमीन है। इतनी जमीन होने के कारण किसान बढ़िया उत्पादन ले सकते हैं। इधर, भारत में ज्यादातर किसानों के पास काफी कम जमीन है। औसतन यहां किसानों के पास 2.5 एकड़ से भी कम जमीन है। इस कारण से वह ज्यादा उत्पादन नहीं ले पाते। यहां किसानों को चाहिए कि वे सिर्फ गेहूं व चावल की खेती करने के बजाय इनोवेटिव खेती करें। इसके अलावा कई किसान मिलकर सामुदायिक खेती करें। इस तरह से खेती कर वे ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं और ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।
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अमेरिका में किसानों को दी जा रही ज्यादा सब्सिडी
डॉ. धनखड़ के मुताबिक भारत के मुकाबले अमेरिकी किसानों को सरकार की तरफ से ज्यादा सब्सिडी मिल रही है। मसलन अभी अमेरिका व चीन के बीज ट्रेड वार हो गया, जिसके कारण चीन ने अमेरिका से आयात होने वाले सोयाबीन पर रोक लगा दी। इस पर अमेरिकी सरकार ने तुरंत किसानों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई। मगर भारत में किसानों को बैंकों, व्यापारियों व आढ़तियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। इस कारण से उन्हें अपने उत्पादन का सही मूल्य नहीं मिल पाता है।
भारत सरकार रिसर्च वर्क के लिए ज्यादा फंड कराए उपलब्ध
एजुकेशन व रिसर्च के मामले में अमेरिका फाफी एडवांस्ड है। हालांकि भारत सरकार भी इस कार्य के लिए काफी फंड उपलब्ध करा रही है। मगर यहां और ज्यादा फंड उपलब्ध कराने की जरूरत है। साथ ही अंग्रेजों के समय की शिक्षा पद्धति को भी बदला जाना चाहिए, जो 21वीं सदी को देखते हुए काफी पुराना है।
वेस्ट लैंड को बायो फ्यूल के लिए करें इस्तेमाल
भारत में जैटरोफा से बायो फ्यूल लिया जा रहा है। चावल के भूसे से भी बायो फ्यूल प्राप्त किया जा सकता है। इस कार्य के लिए कृषि योग्य भूमि की बजाय वेस्ट लैंड को इस्तेमाल किया जाए

चावल में सिलिका की मात्रा कम करने पर कर रहे रिसर्च
डॉ. धनखड़ ने बताय कि फिलहाल वह जीनोम एडिटिंग तकनीक के जरिये चावल में सिलिका की मात्रा कम करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। चावल मिट्टी से 10 से 20 प्रतिशत तक सिलिका लेता है और किसान चावल के भूरे को पशुओं के चारे के रूप मे इस्तेमाल नहीं कर पाते। साथ ही सिलिका की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसे जल्दी डिकंपोस्ट भी नहीं किया जा सकता। इस प्रोजेक्ट में वह उन जीन की एडिटिंग कर रहे हैं, जिनके कारण चावल में सिलिका की मात्रा बढ़ती है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो किसान चावल के भूसे को पेपर पल्प, मशरूम कल्टीवेशन व चारे के रूप में भी इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही यह जल्दी डिकंपोस्ट भी हो जाएगा।
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