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बेटे- बेटियों में कभ फर्क नहीं समझा तो लायक बेटियों ने दिलाई पहचान
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हमने कभी अपनी बेटियों को बेटे से कम नहीं समझा। हमारी बेटियों ने हमारा बेटों से अधिक नाम चमकाया। आज हमारी दोनों बेटियों के कारण हमें पहचान मिल रही है। एक बेटी आईएएस बनकर यूपी में सेवा कर रही है। दूसरी बेटी एमबीबीएस कर रही है।
सेक्टर 9-11 में रहने वाले डॉ. कर्ण सिंह लाठर ने कहा कि मुझे अपनी बेटियों पर नाज है। मैं कहता हूं कि बेटी हो या बेटी उसे लायक बनाना चाहिए। अपनी बेटी को इतना लायक बनाओ कि आपकी बेटी से आपकी पहचान बने। डॉ. कर्ण सिंह और सरोज ने कहा कि उन्होंने तय कर लिया था कि बेटा हो या बेटी हम दो बच्चे ही रखेंगे। करीब 25 साल पहले हमारे घर पहली बेटी हुई। इसके बाद दूसरी बेटी हुई। दोनों बेटियों के बाद हमने अपनी बेटियों को ही संसार मानते हुए उनका पालन पोषण शुरू किया। अपनी बेटियों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देने के लिए हमने गांव छोड़कर शहर में शिफ्ट किया।
माता सरोज लाठर ने कहा कि मेरे पति ने मुझे काफी सहयोग किया। मुझे गांव राजगढ़ की चौधर के लिए सरपंची के मैदान में उतारा। मैं सरपंच बनकर पांच साल तक लोगों की सेवा की।
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हमने दोनों बेटियों को एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। दोनों ने एम्स में दाखिला लिया। इसके बाद बड़ी बेटी अंकुर ने कहा कि वह समाज सेेवा के लिए आईएएस की तैयारी करना चाहती है। हमने उसे आईएएस की तैयारी कराई। आल इंडिया रैंकिंग में अंकुर ने 72वां स्थान हासिल कर आईएएस को ब्रेक किया। अब अंकुर लाठर यूपी के लखनऊ में बतौर आईएएस अधिकारी सेवा कर रही हैं।
दो बेटियों के बाद नहीं चाहिए बेटा..
जिले में हजारों की संख्या में ऐसे दंपति हैं, जिन्होंने दो बेटियों के बाद बेटे की चाहत नहीं की। दो बेटी वाले दंपति को सरकार की ओर 1600 रुपये पेंशन दी जाती है। जिले में इस समय करीब 2861 परिवार यह पेंशन हासिल कर रहे हैं।
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हिसार।
हमने कभी अपनी बेटियों को बेटे से कम नहीं समझा। हमारी बेटियों ने हमारा बेटों से अधिक नाम चमकाया। आज हमारी दोनों बेटियों के कारण हमें पहचान मिल रही है। एक बेटी आईएएस बनकर यूपी में सेवा कर रही है। दूसरी बेटी एमबीबीएस कर रही है।
सेक्टर 9-11 में रहने वाले डॉ. कर्ण सिंह लाठर ने कहा कि मुझे अपनी बेटियों पर नाज है। मैं कहता हूं कि बेटी हो या बेटी उसे लायक बनाना चाहिए। अपनी बेटी को इतना लायक बनाओ कि आपकी बेटी से आपकी पहचान बने। डॉ. कर्ण सिंह और सरोज ने कहा कि उन्होंने तय कर लिया था कि बेटा हो या बेटी हम दो बच्चे ही रखेंगे। करीब 25 साल पहले हमारे घर पहली बेटी हुई। इसके बाद दूसरी बेटी हुई। दोनों बेटियों के बाद हमने अपनी बेटियों को ही संसार मानते हुए उनका पालन पोषण शुरू किया। अपनी बेटियों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देने के लिए हमने गांव छोड़कर शहर में शिफ्ट किया।
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माता सरोज लाठर ने कहा कि मेरे पति ने मुझे काफी सहयोग किया। मुझे गांव राजगढ़ की चौधर के लिए सरपंची के मैदान में उतारा। मैं सरपंच बनकर पांच साल तक लोगों की सेवा की।
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हमने दोनों बेटियों को एमबीबीएस डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। दोनों ने एम्स में दाखिला लिया। इसके बाद बड़ी बेटी अंकुर ने कहा कि वह समाज सेेवा के लिए आईएएस की तैयारी करना चाहती है। हमने उसे आईएएस की तैयारी कराई। आल इंडिया रैंकिंग में अंकुर ने 72वां स्थान हासिल कर आईएएस को ब्रेक किया। अब अंकुर लाठर यूपी के लखनऊ में बतौर आईएएस अधिकारी सेवा कर रही हैं।
दो बेटियों के बाद नहीं चाहिए बेटा..
जिले में हजारों की संख्या में ऐसे दंपति हैं, जिन्होंने दो बेटियों के बाद बेटे की चाहत नहीं की। दो बेटी वाले दंपति को सरकार की ओर 1600 रुपये पेंशन दी जाती है। जिले में इस समय करीब 2861 परिवार यह पेंशन हासिल कर रहे हैं।