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राज्यकवि उदयभानु हंस को दी श्रद्घापूर्ण अंतिम विदाई
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। हरियाणा के राज्य कवि, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, महाकाव्यकार, मुक्तककार, गीतकार, दोहाकार, समीक्षक, गजल-प्रणेता एवं रूबाई-सम्राट उदयभानु हंस को शहरवासियों ने बुधवार को श्रद्धा पूर्वक अंतिम विदाई दी। सेक्टर 16-17 के श्मशानघाट में उनके पुत्र शशिभानु हंस ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम परमजीत सिंह व डीएसपी सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि 2 अगस्त 1926 को दायरा दीन पनाह तहसील कोट अद्दू जिला मुजफ्फरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे उदयभानु हंस का मंगलवार रात उनके हिसार स्थित निवास स्थान पर निधन हो गया था। उनके निधन का समाचार सुनकर पूरे प्रदेश के साहित्यिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम संस्कार में साहित्यिक जगत के अनेक व्यक्ति व गणमान्य शहरवासी शामिल हुए।
बड़े कवियों की श्रेणी में थे शामिल
कविवर ‘हंस’ के साहित्य-सृजन की परिधि अत्यंत व्यापक और गहन है। गीतकार के रूप में वे हरिवंश राय बच्चन, शिवमंगल सिंह सुमन, भवानी प्रसाद मिश्र, नीरज तथा राम अवतार त्यागी जैसे कवियों की श्रेणी में आते हैं। मुक्तककार के रूप में वे अपने मुक्तकों की उत्तमता, गुणवत्ता तथा परिमाण की दृष्टि से बिना किसी रियायत के अद्वितीय श्रेष्ठतम मुक्तककार के उच्च पद के निर्विरोध अधिकारी हैं।
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देशप्रेम से सराबोर संग्रह
उदयभानु हंस ने स्वतंत्रता-संग्राम के दौरान 1943 से 1946 तक हिंदी और उर्दू में देशभक्ति की कविताएं लिखकर महत्वपूर्ण कार्य किया। ‘धडकन’ नामक गीत-संग्रह में उनकी ओजस्वी कविताओं का संग्रह किया गया है। इनकी राष्ट्रभक्ति भावना को देखकर डॉ. शिवकुमार शर्मा लिखते हैं- देशप्रेम से सराबोर इनके राष्ट्र-गीतों के कारण इन्हें नि:संकोच राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, भारतीय-आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी तथा रामधारी सिंह दिनकर की कोटि में रखा जा सकता है।
1967 में मिला था राज्यकवि सम्मान
पंजाब से अलग राज्य बनने के बाद हरियाणा सरकार ने 1967 में उदयभानु हंस को राज्य कवि का सम्मान प्रदान किया। हंस को श्रेष्ठ साहित्यकार के रूप में अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से नवाजा गया है। गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखने की लालसा से वे मुलतान (वर्तमान पाकिस्तान) से एक महीना पहले भारत चले आए थे और फिर हिंसा के कारण वापस नहीं जा सके थे।
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हिसार। हरियाणा के राज्य कवि, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, महाकाव्यकार, मुक्तककार, गीतकार, दोहाकार, समीक्षक, गजल-प्रणेता एवं रूबाई-सम्राट उदयभानु हंस को शहरवासियों ने बुधवार को श्रद्धा पूर्वक अंतिम विदाई दी। सेक्टर 16-17 के श्मशानघाट में उनके पुत्र शशिभानु हंस ने उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम परमजीत सिंह व डीएसपी सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि 2 अगस्त 1926 को दायरा दीन पनाह तहसील कोट अद्दू जिला मुजफ्फरगढ़ (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे उदयभानु हंस का मंगलवार रात उनके हिसार स्थित निवास स्थान पर निधन हो गया था। उनके निधन का समाचार सुनकर पूरे प्रदेश के साहित्यिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम संस्कार में साहित्यिक जगत के अनेक व्यक्ति व गणमान्य शहरवासी शामिल हुए।
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बड़े कवियों की श्रेणी में थे शामिल
कविवर ‘हंस’ के साहित्य-सृजन की परिधि अत्यंत व्यापक और गहन है। गीतकार के रूप में वे हरिवंश राय बच्चन, शिवमंगल सिंह सुमन, भवानी प्रसाद मिश्र, नीरज तथा राम अवतार त्यागी जैसे कवियों की श्रेणी में आते हैं। मुक्तककार के रूप में वे अपने मुक्तकों की उत्तमता, गुणवत्ता तथा परिमाण की दृष्टि से बिना किसी रियायत के अद्वितीय श्रेष्ठतम मुक्तककार के उच्च पद के निर्विरोध अधिकारी हैं।
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देशप्रेम से सराबोर संग्रह
उदयभानु हंस ने स्वतंत्रता-संग्राम के दौरान 1943 से 1946 तक हिंदी और उर्दू में देशभक्ति की कविताएं लिखकर महत्वपूर्ण कार्य किया। ‘धडकन’ नामक गीत-संग्रह में उनकी ओजस्वी कविताओं का संग्रह किया गया है। इनकी राष्ट्रभक्ति भावना को देखकर डॉ. शिवकुमार शर्मा लिखते हैं- देशप्रेम से सराबोर इनके राष्ट्र-गीतों के कारण इन्हें नि:संकोच राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, भारतीय-आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी तथा रामधारी सिंह दिनकर की कोटि में रखा जा सकता है।
1967 में मिला था राज्यकवि सम्मान
पंजाब से अलग राज्य बनने के बाद हरियाणा सरकार ने 1967 में उदयभानु हंस को राज्य कवि का सम्मान प्रदान किया। हंस को श्रेष्ठ साहित्यकार के रूप में अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से नवाजा गया है। गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखने की लालसा से वे मुलतान (वर्तमान पाकिस्तान) से एक महीना पहले भारत चले आए थे और फिर हिंसा के कारण वापस नहीं जा सके थे।