{"_id":"5c5dd690bdec22736c04c997","slug":"111549653648-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनौती : 15 फरवरी तक प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच का रिकॉर्ड सही कर दिया तो संस्था देगी 31 हजार का इनाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनौती : 15 फरवरी तक प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच का रिकॉर्ड सही कर दिया तो संस्था देगी 31 हजार का इनाम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर लगातार फजीहत का सामना कर रहे नगर निगम प्रशासन को अब शहर की सामाजिक संस्था जवाब दो- हिसाब दो ने चुनौती दे डाली है। संस्था ने चुनौती दी है कि अगर 15 फरवरी तक प्रॉपर्टी टैक्स का पुराना रिकॉर्ड ठीक हो गया तो ब्रांच के कर्मचारियों को 31 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। संस्था का दावा है कि ब्रांच के कर्मचारी 15 मार्च तक भी पुराने रिकॉर्ड ठीक नहीं कर पाएंगे, क्योंकि बड़े पैमाने पर धांधलियां की गई हैं।
गौरतलब है कि मेयर गौतम सरदाना ने वीरवार को पार्षदों के साथ बैठक के दौरान प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारियों व कर्मचारियों को 15 फरवरी तक पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। मेयर ने यह भी कहा था कि 28 फरवरी तक कोई भी शहरवासी प्रॉपर्टी टैक्स बिल में छूट से वंचित नहीं रहना चाहिए।
संस्था ने भी उठाई विजिलेंस जांच करवाने की मांग
पार्षदों के अलावा जवाब दो- हिसाब दो संस्था ने भी प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के पुराने रिकॉर्ड की विजिलेंस जांच करवाने की मांग का समर्थन किया है। संस्था के मुख्य पदाधिकारियों प्रशांत शर्मा, तिलकराज, आशीष जैन व होशियार सिंह का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की विजिलेंस जांच होने पर ही सच्चाई सामने आएगी। संस्था पदाधिकारियों का आरोप है कि शहरवासियों द्वारा निर्धारित समय पर जमा करवाया गया प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा ब्रांच के अधिकारी-कर्मचारी हजम कर चुके हैं। सैकड़ों शहरवासियों ने अपना बिल भरा हुआ है, लेकिन उनके पास अब रसीद नहीं है। मगर हैरानी की बात यह है कि उनकी रसीदों का नगर निगम के पास भी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
विज्ञापन
सामने आ चुके हैं गबन के मामले
गृहकर शाखा में पहले भी गबन के मामले सामने आ चुके हैं। साल 2005-06 में एक कर्मचारी को नकली रसीदें छपवाने के आरोप में पकड़ा गया था। बाद में उस कर्मचारी को सस्पेंड भी कर दिया गया था। इसी तरह एक बार पुरानी रसीद बुक ही गायब कर दी गई थी। वहीं शहर के प्रॉपर्टी सर्वे को लेकर भी सवालिया निशान लगे हुए हैं। साल 2011-12 और 2012-13 में निजी कंपनी द्वारा किए गए प्रॉपर्टी सर्वे के दौरान भी कई खामियां नजर आई थी।
शहर में कुल प्रॉपर्टी - 1 लाख 36 हजार 28
रिहायशी प्रॉपर्टी - 62 हजार 732
खाली रिहायशी प्लॉट - 49 हजार 172
कॉमर्शियल प्रॉपर्टी - 9 हजार 669
इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी - 657
निगम के भवन - 572
खाली कॉमर्शियल प्लॉट - 546
इंस्टीट्यूशन - 362
15 फरवरी तक अगर पिछली रसीदों को अपलोड नहीं किया गया तो कहीं न कहीं बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। पुरानी रसीद बुकों का डाटा अपलोड नहीं किए जाने से लोगों को परेशानी हो रही है। इस व्यवस्था में सुधार करवाकर रहेंगे। पिछले सालों के दौरान निगम द्वारा की गई गलतियों का खामियाजा शहर की जनता को भुगतने नहीं दिया जाएगा।
-अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड नंबर 14
मैं किसी भी तरह का दावा नहीं कर सकता। मगर हम अपना सौ प्रतिशत सिस्टम में सुधार करने में लगा रहे हैं। हम देर रात तक काम करके प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी फाइलों को ठीक कर रहे हैं। जनता को थोड़ा सब्र करने की जरूरत है। जिन लोगों ने पूरा बिल भरवाना है, वो 28 फरवरी के बाद भी भरवा सकते हैं।
- हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम
विज्ञापन
हिसार। प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर लगातार फजीहत का सामना कर रहे नगर निगम प्रशासन को अब शहर की सामाजिक संस्था जवाब दो- हिसाब दो ने चुनौती दे डाली है। संस्था ने चुनौती दी है कि अगर 15 फरवरी तक प्रॉपर्टी टैक्स का पुराना रिकॉर्ड ठीक हो गया तो ब्रांच के कर्मचारियों को 31 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। संस्था का दावा है कि ब्रांच के कर्मचारी 15 मार्च तक भी पुराने रिकॉर्ड ठीक नहीं कर पाएंगे, क्योंकि बड़े पैमाने पर धांधलियां की गई हैं।
गौरतलब है कि मेयर गौतम सरदाना ने वीरवार को पार्षदों के साथ बैठक के दौरान प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारियों व कर्मचारियों को 15 फरवरी तक पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। मेयर ने यह भी कहा था कि 28 फरवरी तक कोई भी शहरवासी प्रॉपर्टी टैक्स बिल में छूट से वंचित नहीं रहना चाहिए।
विज्ञापन
संस्था ने भी उठाई विजिलेंस जांच करवाने की मांग
पार्षदों के अलावा जवाब दो- हिसाब दो संस्था ने भी प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के पुराने रिकॉर्ड की विजिलेंस जांच करवाने की मांग का समर्थन किया है। संस्था के मुख्य पदाधिकारियों प्रशांत शर्मा, तिलकराज, आशीष जैन व होशियार सिंह का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच की विजिलेंस जांच होने पर ही सच्चाई सामने आएगी। संस्था पदाधिकारियों का आरोप है कि शहरवासियों द्वारा निर्धारित समय पर जमा करवाया गया प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा ब्रांच के अधिकारी-कर्मचारी हजम कर चुके हैं। सैकड़ों शहरवासियों ने अपना बिल भरा हुआ है, लेकिन उनके पास अब रसीद नहीं है। मगर हैरानी की बात यह है कि उनकी रसीदों का नगर निगम के पास भी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
विज्ञापन
सामने आ चुके हैं गबन के मामले
गृहकर शाखा में पहले भी गबन के मामले सामने आ चुके हैं। साल 2005-06 में एक कर्मचारी को नकली रसीदें छपवाने के आरोप में पकड़ा गया था। बाद में उस कर्मचारी को सस्पेंड भी कर दिया गया था। इसी तरह एक बार पुरानी रसीद बुक ही गायब कर दी गई थी। वहीं शहर के प्रॉपर्टी सर्वे को लेकर भी सवालिया निशान लगे हुए हैं। साल 2011-12 और 2012-13 में निजी कंपनी द्वारा किए गए प्रॉपर्टी सर्वे के दौरान भी कई खामियां नजर आई थी।
शहर में कुल प्रॉपर्टी - 1 लाख 36 हजार 28
रिहायशी प्रॉपर्टी - 62 हजार 732
खाली रिहायशी प्लॉट - 49 हजार 172
कॉमर्शियल प्रॉपर्टी - 9 हजार 669
इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी - 657
निगम के भवन - 572
खाली कॉमर्शियल प्लॉट - 546
इंस्टीट्यूशन - 362
15 फरवरी तक अगर पिछली रसीदों को अपलोड नहीं किया गया तो कहीं न कहीं बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। पुरानी रसीद बुकों का डाटा अपलोड नहीं किए जाने से लोगों को परेशानी हो रही है। इस व्यवस्था में सुधार करवाकर रहेंगे। पिछले सालों के दौरान निगम द्वारा की गई गलतियों का खामियाजा शहर की जनता को भुगतने नहीं दिया जाएगा।
-अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड नंबर 14
मैं किसी भी तरह का दावा नहीं कर सकता। मगर हम अपना सौ प्रतिशत सिस्टम में सुधार करने में लगा रहे हैं। हम देर रात तक काम करके प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी फाइलों को ठीक कर रहे हैं। जनता को थोड़ा सब्र करने की जरूरत है। जिन लोगों ने पूरा बिल भरवाना है, वो 28 फरवरी के बाद भी भरवा सकते हैं।
- हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम