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26 साल के गैप के बाद की 10वीं पास, अब पिता-पुत्र बने सहपाठी, विदेश जाकर दिखाना चाहते हैं हुनर
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संदीप रामायण
हिसार। दुनिया में बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जिन्होंने उम्र को अनदेखा करके अपने सपनों को पूरा करने के लिए पुन: पढ़ाई का रुख किया है। जिले के राजली गांव निवासी पिता व पुत्र ने एक ही कक्षा में दाखिला लेकर पढ़ाई छोड़ चुके लोगों के लिए एक मिशाल पेश की है। राजली गांव के 44 वर्षीय ईश्वर सिंह व उनका 21 साल का बेटा जेपी गवर्नमेंट आईटीआई हिसार मेें सहपाठी हैं। दोनों कारपेंटर ट्रेड के सत्र 2021-22 के विद्यार्थी हैं। खास बात ये भी है कि दोनों एक ही बेंच पर बैठते हैं। शिक्षकों द्वारा दिया गया होम वर्क व ट्रेड का प्रैक्टिकल वर्क भी समय पर पूरा करते हैं। ईश्वर सिंह के दो बेटे हैं व एक बेटी है। बड़ा बेटा जेपी उनके साथ ही आईटीआई का डिप्लोमा कर रहा है। छोटा बेटा अंकुश 10वीं कक्षा में पढ़ता है व उनकी बेटी किस्मती भी 10वीं कक्षा में ही पढ़ रही है।
ईश्वर सिंह ने बताया कि उसका पिता रामसिंह गांव में मटका बनाने का काम करता था। उम्र के साथ उनके पिता का काम छूट गया। परिवार बड़ा होने के कारण घर का गुजारा करना मुश्किल हो गया। ऐसे में ईश्वर सिंह ने कारपेंटर का काम सीखना शुरू कर दिया। काम सीखकर ईश्वर सिंह अपने घर का गुजारा चलाने लगा। ईश्वर सिंह ने बताया कि वर्ष 1992 में उसने 8वीं कक्षा पास की थी। 1997 में उसकी शादी हो गई। इसके बाद पढ़ाई छूट गई। घर का गुजर-बसर करने के लिए ईश्वर सिंह ने कारपेंटर का काम शुरू किया। ईश्वर सिंह ने कड़ी मेहनत के बाद फर्नीचर का सारा सामान बनाना सीख लिया। लेकिन समय ईश्वर सिंह ने अनुकूल नहीं था। उनका कारपेंटर का काम ज्यादा नहीं चल पाया।
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अच्छे दोस्तों ने दिया रास्ता
ईश्वर सिंह ने बताया कि उसके कुछ अच्छे दोस्तों ने बताया कि अगर वह कारपेंटर की ट्रेड से आईटीआई का डिप्लोमा कर लेता है तो काफी फायदा होगा। ईश्वर ने अपने दोस्तों की बात मानते हुए वर्ष 2018 में हरियाणा ओपन से 10वीं कक्षा पास की। इसके बाद 2020 में हरियाणा ओपन बोर्ड से ही 12वीं कक्षा पास की। इस दौरान ईश्वर सिंह का बड़ा बेटा जेपी भी 21 साल का हो चुका था। दोनों ने ही एक साथ हिसार तोशाम रोड स्थित गवर्नमेंट आईटीआई में कारपेंटर ट्रेड में दाखिला लिया। पिता-पुत्र का एक ही कक्षा में दाखिला लेना आईटीआई व गांव राजली में काफी चर्चा का विषय रहा।
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विदेश जाकर दिखाना चाहते हैं हुनर
ईश्वर सिंह ने बताया कि फिलहाल उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। आईटीआई में दाखिला लेने से पहले ईश्वर सिंह कारपेंटर का काम करके घर का गुजारा ठीक से चला रहा था। दाखिला लेने के बाद पूरा दिन आईटीआई में ही गुजर जाता है। वह सप्ताह में दो दिन ही मजदूरी कर पाता है। दो दिन की मजदूरी में ही सप्ताह के बाकी पांच दिन गुजारा करना पड़ता है। सरकारी छुट्टी वाले दिन भी मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका डिप्लोमा पूरा होने के बाद वे विदेश जाकर अपना हुनर दिखाएंगे व अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करेंगे।
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लास्ट चांस में हुआ दाखिला
गवर्नमेंट आईटीआई के जीआई सुधीर कुमार जांगड़ा ने बताया कि ये दोनों विद्यार्थी काफी होशियार हैं। पिता-पुत्र होने के बाद भी दोनों अच्छे दोस्तों की तरह रहते हैं। एक ही बैंच पर बैठते हैं। अनुदेशक द्वारा दिया गया कार्य व वर्कशॉप की जॉब सही समय पर करते हैं। कारपेंटर का काम तो इन्हें पहले ही आता था। अब आईटीआई की वर्कशॉप में इनके कार्य में और भी निखार आ रहा है व इन्हें तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो रहा है। सुधीर कुमार ने बताया कि ईश्वर सिंह व जेपी का दाखिला अंतिम चांस में हुआ था। दोनों के डॉक्यूमेंट्स में कुछ कमियां पाई गई थीं, लेकिन बाद में एडमिशन हो गया था।
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वर्जन-
पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, मन में पढ़ने के प्रति हौसला व जज्बा होना जरूरी है। हमारे कारपेंटर ट्रेड के विद्यार्थी ईश्वर सिंह ने यही साबित करके दिखाया है। उनका बेटा जेपी भी उनका सहपाठी है। मैं दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं।
- प्रेम किरण, प्राचार्या गवर्नमेंट आईटीआई हिसार।
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हिसार। दुनिया में बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जिन्होंने उम्र को अनदेखा करके अपने सपनों को पूरा करने के लिए पुन: पढ़ाई का रुख किया है। जिले के राजली गांव निवासी पिता व पुत्र ने एक ही कक्षा में दाखिला लेकर पढ़ाई छोड़ चुके लोगों के लिए एक मिशाल पेश की है। राजली गांव के 44 वर्षीय ईश्वर सिंह व उनका 21 साल का बेटा जेपी गवर्नमेंट आईटीआई हिसार मेें सहपाठी हैं। दोनों कारपेंटर ट्रेड के सत्र 2021-22 के विद्यार्थी हैं। खास बात ये भी है कि दोनों एक ही बेंच पर बैठते हैं। शिक्षकों द्वारा दिया गया होम वर्क व ट्रेड का प्रैक्टिकल वर्क भी समय पर पूरा करते हैं। ईश्वर सिंह के दो बेटे हैं व एक बेटी है। बड़ा बेटा जेपी उनके साथ ही आईटीआई का डिप्लोमा कर रहा है। छोटा बेटा अंकुश 10वीं कक्षा में पढ़ता है व उनकी बेटी किस्मती भी 10वीं कक्षा में ही पढ़ रही है।
ईश्वर सिंह ने बताया कि उसका पिता रामसिंह गांव में मटका बनाने का काम करता था। उम्र के साथ उनके पिता का काम छूट गया। परिवार बड़ा होने के कारण घर का गुजारा करना मुश्किल हो गया। ऐसे में ईश्वर सिंह ने कारपेंटर का काम सीखना शुरू कर दिया। काम सीखकर ईश्वर सिंह अपने घर का गुजारा चलाने लगा। ईश्वर सिंह ने बताया कि वर्ष 1992 में उसने 8वीं कक्षा पास की थी। 1997 में उसकी शादी हो गई। इसके बाद पढ़ाई छूट गई। घर का गुजर-बसर करने के लिए ईश्वर सिंह ने कारपेंटर का काम शुरू किया। ईश्वर सिंह ने कड़ी मेहनत के बाद फर्नीचर का सारा सामान बनाना सीख लिया। लेकिन समय ईश्वर सिंह ने अनुकूल नहीं था। उनका कारपेंटर का काम ज्यादा नहीं चल पाया।
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अच्छे दोस्तों ने दिया रास्ता
ईश्वर सिंह ने बताया कि उसके कुछ अच्छे दोस्तों ने बताया कि अगर वह कारपेंटर की ट्रेड से आईटीआई का डिप्लोमा कर लेता है तो काफी फायदा होगा। ईश्वर ने अपने दोस्तों की बात मानते हुए वर्ष 2018 में हरियाणा ओपन से 10वीं कक्षा पास की। इसके बाद 2020 में हरियाणा ओपन बोर्ड से ही 12वीं कक्षा पास की। इस दौरान ईश्वर सिंह का बड़ा बेटा जेपी भी 21 साल का हो चुका था। दोनों ने ही एक साथ हिसार तोशाम रोड स्थित गवर्नमेंट आईटीआई में कारपेंटर ट्रेड में दाखिला लिया। पिता-पुत्र का एक ही कक्षा में दाखिला लेना आईटीआई व गांव राजली में काफी चर्चा का विषय रहा।
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विदेश जाकर दिखाना चाहते हैं हुनर
ईश्वर सिंह ने बताया कि फिलहाल उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। आईटीआई में दाखिला लेने से पहले ईश्वर सिंह कारपेंटर का काम करके घर का गुजारा ठीक से चला रहा था। दाखिला लेने के बाद पूरा दिन आईटीआई में ही गुजर जाता है। वह सप्ताह में दो दिन ही मजदूरी कर पाता है। दो दिन की मजदूरी में ही सप्ताह के बाकी पांच दिन गुजारा करना पड़ता है। सरकारी छुट्टी वाले दिन भी मजदूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका डिप्लोमा पूरा होने के बाद वे विदेश जाकर अपना हुनर दिखाएंगे व अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करेंगे।
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लास्ट चांस में हुआ दाखिला
गवर्नमेंट आईटीआई के जीआई सुधीर कुमार जांगड़ा ने बताया कि ये दोनों विद्यार्थी काफी होशियार हैं। पिता-पुत्र होने के बाद भी दोनों अच्छे दोस्तों की तरह रहते हैं। एक ही बैंच पर बैठते हैं। अनुदेशक द्वारा दिया गया कार्य व वर्कशॉप की जॉब सही समय पर करते हैं। कारपेंटर का काम तो इन्हें पहले ही आता था। अब आईटीआई की वर्कशॉप में इनके कार्य में और भी निखार आ रहा है व इन्हें तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो रहा है। सुधीर कुमार ने बताया कि ईश्वर सिंह व जेपी का दाखिला अंतिम चांस में हुआ था। दोनों के डॉक्यूमेंट्स में कुछ कमियां पाई गई थीं, लेकिन बाद में एडमिशन हो गया था।
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वर्जन-
पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, मन में पढ़ने के प्रति हौसला व जज्बा होना जरूरी है। हमारे कारपेंटर ट्रेड के विद्यार्थी ईश्वर सिंह ने यही साबित करके दिखाया है। उनका बेटा जेपी भी उनका सहपाठी है। मैं दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं।
- प्रेम किरण, प्राचार्या गवर्नमेंट आईटीआई हिसार।