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स्ट्रेन की आशंका : जीनो टाइप टेस्ट के लिए 10 सैंपल दिल्ली भेजे, सीटी वैल्यू 25 से कम मिली

Fri, 22 Jan 2021 12:50 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 12:50 AM IST
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10 sample sent Delhi from Hisar for geno type test
हिसार। जिला स्वास्थ्य विभाग ने सीटी वैल्यू (वायरस की मात्रा) कम मिलने वाले कुल सैंपल में से 10 सैंपल दिल्ली स्थित लैब में जीनो टाइप टेस्ट के लिए भेजे हैं। विभाग के अनुसार इनमें से 6 सैंपल हिसार जिले के हैं और 4 सैंपल भिवानी जिले के हैं।
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इन सभी सैंपल की जांच एनआरसीई सहित अन्य प्राइवेट लैब में हुई थी। इसके बाद इन सभी सैंपल को एक ही जगह पर एनआरसीई लैब में माइनस 70 डिग्री के तापमान पर रखा गया था। यहीं से यह सभी सैंपल माइनस 70 डिग्री के तापमान पर दिल्ली लैब में भेजे गए हैं। वहां से करीब एक सप्ताह में सभी सैंपल की रिपोर्ट आएगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी सैंपल पर कोरोना के नए वायरस स्ट्रेन की आशंका जताई है। इसलिए इन सभी सैंपल पर रिसर्च कर वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में पता लगाया जाएगा, ताकि इसके बाद सभी मरीजों को समय पर उपचार दिया जा सके। राहत की बात यह है कि जिले में ब्रिटेन से लौटने वाले सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। अब जो सैंपल विभाग ने भेजे हैं, ये सभी मरीज जिले के रहने वाले हैं। इसकेे बावजूद भी इनकी सीटी वैल्यू 25 से कम मिली है।
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इसलिए भेजे सैंपल
कोरोना पॉजिटिव मिलने वाले जिन मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम पाई गई है, उनके करीब 100-110 सैंपल एनआरसीई लैब में माइनस 70 डिग्री के तापमान पर रखवाए गए थे। उन्हीं में से छंटनी कर केवल 10 सैंपल भेजे गए हैं, बाकी का निर्णय भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आने पर किया जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक जिन मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम मिलती है तो वह कोरोना पॉजिटिव होने के अलावा गंभीर भी हो सकता है। जिनकी सीटी वैल्यू 30 से अधिक होती है तो वह निगेटिव माना जाता है। ऐसे में जनवरी माह के शुरू में उच्चाधिकारियों द्वारा सैंपल को अलग सेे रखने के निर्देश जारी हुए थे।
यह होती है सीटी वैल्यू
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की कोविड-19 लैब की नोडल ऑफिसर और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कंवलप्रीत कौर के अनुसार सीटी वैल्यू वायरस की एक तरह से साइक्लिंग प्रक्रिया है। इससे यह पता चलता है कि वायरस कितनी बार मल्टीप्लाई करता है। जिस मरीज में सीटी वैल्यू 15 से 20 के बीच मिलती है तो वह हाई रिस्क माना जाता है और 32 से ऊपर सिटी वैल्यू मिलने वाला व्यक्ति निगेटिव माना जाता है। इससे पहले आईसीएमआर ने सीटी वैल्यू 33 निर्धारित की थी और उसे ही निगेटिव माना जाता था। जिस मरीज में वायरस अधिक होता है और जांच के समय पहली बार में ही या जल्द पकड़ में आता है तो उसकी सीटी वैल्यू कम मिलती है। यदि किसी मरीज के सैंपल की बार-बार जांच करने या देरी से भी मिलता भी है या नहीं, उसकी सीटी वैल्यू अधिक होती है।

रिपोर्ट के बाद होगा आगे का निर्णय
हमारी ओर से 10 सैंपल दिल्ली स्थित लैब में भेजे गए हैं। इनमें 6 सैंपल हिसार के और चार भिवानी के हैं। इन सभी संक्रमित मरीजों की सीटी वैल्यूू 25 से कम मिली है। बाकी सैंपल को लैब में माइनस 70 डिग्री पर रखवाया गया है। जब 10 सैंपल की रिपोर्ट आ जाएगी, उसके आधार पर उनका निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ. जया गोयल, डिप्टी सीएमओ, हिसार।
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