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उम्र 75, जोश जवानों सा
Gurgaon
Updated Fri, 08 Mar 2013 05:30 AM IST
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फरीदाबाद। उम्र भले ही 75 वर्ष की है, लेकिन उनका जोश जवानों को भी मात दे रहा है। यमुना की दुर्दशा के कारण उनके सीने में दर्द है और वह यमुना पदयात्रा में शामिल हैं।
चौमुहां निवासी करीब 75 वर्षीय किरन देवी उस परिवार से संबंध रखती हैं जो खेतीबाड़ी पर निर्भर है। उनके पति और पुत्र खेती करते हैं। तीन बेटे और दो बेटियों की वह मां हैं। 75 वर्ष की उम्र में जब शहरी माहौल में रहने वाले ज्यादातर लोग थोड़ा सा भी नहीं चल सकते, उस उम्र में किरन देवी यमुना पद यात्रा में मथुरा से पैदल चलकर यहां पहुंची हैं। पदयात्रा में रोजाना 10 से 15 किलोमीटर चला जा रहा है।
किरन देवी ने बताया कि यमुना हमारी मां की तरह है। इसकी दुर्दशा से सभी व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि यमुना में जल अगर स्वच्छ होगा तो खेती के लिए पानी भी साफ मिलेगा। अन्यथा जहरीला पानी खेती को नुकसान करेगा। खेत और फसल बचाने को वह शामिल हुई हैं।
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किरन देवी ने बताया कि उनके गांव की राजवती और रज्जो भी उनके साथ हैं। इस समय तो सारे पदयात्री ही उनका परिवार है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और पति भी आगे चलकर यात्रा में शामिल होंगे। किरन देवी ने कहा कि यमुना को शुद्ध कराकर ही दम लेंगे।
पलवल। यमुना की पीड़ा सात समुद्र पार से भी लोगों को खींच रही है। अमेरिका में ब्रज धाम सेवा समिति चलाने वाली 54 वर्षीय अरुणिमा सिन्हा इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं।
अरुणिमा कहती हैं कि देश में नदियों का पानी गंदा हो चुका है। इनके लिए इतने आंदोलन भारत में नहीं चल रहे, जितने विदेशों में लोग चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने यूएसए में ब्रज धाम सेवा समिति के नाम से एक संगठन बनाया हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की नदियों में बह रहे गंदे पानी को स्वच्छ कराना है।
गुजरात के भक्त भी हैं शामिल
जूनागढ़ जिले के लेटीया निवासी सूरदास जमदास जस्मत आंखें न होने के बाद भी यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए ब्रज से इस पद यात्रा में भक्तों के साथ-साथ दिल्ली के लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यमुना जी को हथिनी कुंड में कैद कर लिया है और दिल्ली में गंदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंखें नहीं हैं तो क्या कान्हा की आंखों से उसे सब कुछ नजर आ रहा है।
यात्रा में चल रहे मुंबई के बल्लभ, मैनपुरी से रामचंद राजपूत (किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव) ने बताया कि उनके संगठन के लोग यात्रा के साथ चल रहे है और नौ मार्च को दूसरे प्रदेशों से 37 हजार भक्त दिल्ली बॉर्डर पर यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों के भक्त शामिल हैं।
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चौमुहां निवासी करीब 75 वर्षीय किरन देवी उस परिवार से संबंध रखती हैं जो खेतीबाड़ी पर निर्भर है। उनके पति और पुत्र खेती करते हैं। तीन बेटे और दो बेटियों की वह मां हैं। 75 वर्ष की उम्र में जब शहरी माहौल में रहने वाले ज्यादातर लोग थोड़ा सा भी नहीं चल सकते, उस उम्र में किरन देवी यमुना पद यात्रा में मथुरा से पैदल चलकर यहां पहुंची हैं। पदयात्रा में रोजाना 10 से 15 किलोमीटर चला जा रहा है।
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किरन देवी ने बताया कि यमुना हमारी मां की तरह है। इसकी दुर्दशा से सभी व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि यमुना में जल अगर स्वच्छ होगा तो खेती के लिए पानी भी साफ मिलेगा। अन्यथा जहरीला पानी खेती को नुकसान करेगा। खेत और फसल बचाने को वह शामिल हुई हैं।
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किरन देवी ने बताया कि उनके गांव की राजवती और रज्जो भी उनके साथ हैं। इस समय तो सारे पदयात्री ही उनका परिवार है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और पति भी आगे चलकर यात्रा में शामिल होंगे। किरन देवी ने कहा कि यमुना को शुद्ध कराकर ही दम लेंगे।
पलवल। यमुना की पीड़ा सात समुद्र पार से भी लोगों को खींच रही है। अमेरिका में ब्रज धाम सेवा समिति चलाने वाली 54 वर्षीय अरुणिमा सिन्हा इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं।
अरुणिमा कहती हैं कि देश में नदियों का पानी गंदा हो चुका है। इनके लिए इतने आंदोलन भारत में नहीं चल रहे, जितने विदेशों में लोग चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने यूएसए में ब्रज धाम सेवा समिति के नाम से एक संगठन बनाया हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की नदियों में बह रहे गंदे पानी को स्वच्छ कराना है।
गुजरात के भक्त भी हैं शामिल
जूनागढ़ जिले के लेटीया निवासी सूरदास जमदास जस्मत आंखें न होने के बाद भी यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए ब्रज से इस पद यात्रा में भक्तों के साथ-साथ दिल्ली के लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यमुना जी को हथिनी कुंड में कैद कर लिया है और दिल्ली में गंदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंखें नहीं हैं तो क्या कान्हा की आंखों से उसे सब कुछ नजर आ रहा है।
यात्रा में चल रहे मुंबई के बल्लभ, मैनपुरी से रामचंद राजपूत (किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव) ने बताया कि उनके संगठन के लोग यात्रा के साथ चल रहे है और नौ मार्च को दूसरे प्रदेशों से 37 हजार भक्त दिल्ली बॉर्डर पर यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों के भक्त शामिल हैं।