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Fatehabad News: ग्रुप में सीरिंज लगाकर नशा ले रहे युवा, 45 फीसदी काला पीलिया के शिकार मिले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jul 2023 11:10 PM IST
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Youth taking drugs by using syringes in the group, 45 percent victims of black jaundice were found
फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ मरीजों की जांच करते हुए
फतेहाबाद। नशा लेने वाले युवक भी हेपेटाइटिस सी यानि काला पीलिया के शिकार हो रहे हैं। ग्रुप में युवाओं द्वारा एक ही सीरिंज के प्रयोग से काला पीलिया बीमारी फैल रही है। नशा मुक्ति केंद्र में नशा छोड़ने के लिए आने वाले मरीजों का हेपेटाइटिस टेस्ट किया जा रहा है इसमें 45 फीसदी मरीज पॉजिटिव मिल चुके हैं। नशा मुक्ति केंद्र में 1550 मरीज दाखिल हो चुके हैं। जांच में 680 मरीज संक्रमित मिल चुके हैं।
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जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेपेटाइटिस सी और बी का उपचार किया जा रहा है। जिले में अब तक हेपेटाइटिस सी के 6900 मरीज रजिस्टर्ड हो चुके हैं। जांच में जिले में 5363 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इसमें फिलहाल 253 मरीजों का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी को लेकर जांच और उपचार समय पर करवानी जरूरी नहीं हो तो बाद में बीमारी बढऩे पर उपचार संभव नहीं हो पाता है। डॉक्टरों की माने तो हेपेटाइटिस व्यक्ति के खून के संपर्क में आने से ये बीमारी फैलती है। संवाद
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रोहतक पीजीआई भेजे जा रहे हैं सैंपल
वर्ष 2017 में जिला मुख्यालय में हेपेटाइटिस सी का उपचार शुरू हुआ था। पहले लोगों को उपचार के लिए रोहतक पीजीआई में जाना पड़ता था। पिछले 6 सालों में जिले में हेपेटाइटिस सी की जांच को लेकर 6900 मरीज रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इसमें 5363 मरीज संक्रमित मिले हैं। अभी फिलहाल 253 मरीजों का उपचार चल रहा है। पिछले साल तक जिला मुख्यालय में ही निजी लैब से हेपेटाइटिस सी और बी की जांच हो रही थी लेकिन निजी लैब से अनुबंध खत्म करके आरटीपीसीआर लैब में शुरू किया गया। लेकिन माइक्रोबायलोजिस्ट का पद खाली होने के बाद अब हर सप्ताह 20-20 सैंपल बुधवार को रोहतक पीजीआई भेजे जा रहे हैं।
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मां से बच्चे में भी आ सकती है हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस सी बीमारी को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि कोर्स पूरा होने के तीन माह बाद भी जांच जरूरी है। ये खतरनाक बीमारी मां से बच्चे में भी आ सकती है, अगर समय रहते इसका उपचार लिया जाए तो बच्चे में आने से रोका जा सकता है।
ऐसे फैलता है हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस व्यक्ति के खून के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस सी हो सकता है।
सूई व सीरिंज का दोबारा प्रयोग करने से
पहले से प्रयोग की गई सूई द्वारा टैटू बनाया जाए और नाक या कान में छेद किया जाए।
किसी दूसरे व्यक्ति का ब्लेड, टूथब्रूथ का प्रयोग करने से
असुरक्षित यौन संबंधों द्वारा हेपेटाइटिस सी फैलने की संभावना रहती है।
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हेपेटाइटिस सी के ये सामान्य लक्षण
बुखार
हमेशा थकान महसूस करना
भूख न लगना
मतली या उल्टी होना
पेट में दर्द
पेशाब गाढ़े रंग का आना
मिट्टी के रंग जैसा मल आना
जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द होना
त्वचा या आंखों में पीलापन होना
कोट
नशा लेने वाले मरीज केंद्र में दाखिल होते हैं तो उनका हेपेटाइटिस और एचआईवी टेस्ट करवाया जाता है। जांच में करीब 45 फीसदी मरीज काला पीलिया पॉजिटिव मिल चुके है। इसके पीछे कारण ये है कि नशा लेने के लिए एक ही सीरिंज का प्रयोग किया जाता है।

-डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक एवं नोडल अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र
कोट
हेपेटाइटिस सी और बी की जांच नागरिक अस्पताल में निशुल्क है और उपचार को लेकर दवाइयां भी उपलब्ध है। हेपेटाइटिस सी और बी को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जो लोग नशा करते हैं वह अपने साथियों के साथ एक ही सीरिंज का प्रयोग करते हैं इसलिए नशे से दूर रहे हैं। टैटू भी ऐसी दुकान से बनवाएं जहां हर व्यक्ति के लिए अलग नीडल प्रयोग की जाती हो। लक्षण दिखने पर जांच जरूर करवाएं, सावधानी बरतें।
- डॉ. मनीष टुटेजा, उप सिविल सर्जन
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