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शिक्षा विभाग में नहीं हो रहा व्यवस्थित तरीके से काम : अध्यापक संघ
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भट्टू कलां। शिक्षा विभाग में कोई भी काम व्यवस्थित तरीके से नहीं किया जा रहा है। 21 नवंबर को जारी की गई 6 से 12 की सेट परीक्षा की डेट शीट में 14 दिसंबर दूसरे शनिवार और 15 दिसंबर रविवार के भी पेपर दर्शाए गए हैं। यह बात हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ एवं स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कही।
राज्य उप महासचिव कृष्ण नैन, राज्य कोऑर्डिनेटर सुरजीत दुसाद, जिला प्रधान राजपाल मित्तल, जिला सचिव देसराज माचरा, वरिष्ठ उपप्रधान डॉ. नीतू डूडेजा ने कहा कि डेट शीट जारी करने के बाद गलती का आभास होने पर आनन फानन इसे रद्द करते हुए अगले दिन नए सिरे से डेट शीट जारी की गई। उसके बाद दो दिसंबर को विद्यालय मुखियाओं को ही अपने स्तर पर सेट परीक्षा लेने का फरमान जारी कर दिया गया, जबकि इसके लिए कोई बजट जारी नहीं किया गया। अब पढ़ाई के समय में प्राथमिक अध्यापकों का बाल वाटिका के लिए 5 दिनों का प्रशिक्षण रखा गया। विद्यालय स्तर पर भी बच्चों को पढ़ाई से दूर रखने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम करवाने के लिए दबाव दिया जाता है।
जिले में समय पर एसीपी के मामले नहीं सुलझाए गए। सभी अध्यापकों को 5 से 7 बार एतराज लगाकर उनके एसीपी मामले स्कूलों में वापस भेज कर तंग किया गया। जिला कार्यालय में रिश्वत का मामला चरम सीमा पर है। एसीपी मामलों में जो अध्यापक घूस नहीं देता, उसके लिए एतराज लगाए जाते रहे हैं। जिला कार्यालय की ओर से घूस देने वाले अध्यापकों के केस अपने कंप्यूटर से भी तैयार किए गए और एक सप्ताह के अंदर उनके मामले हल करके स्कूलों में भेज दिए गए जबकि कई मामले तो 6-6 महीनों से लटके हुए हैं। अध्यापकों के कई महीनों से मेडिकल मामले भी लटकाए हुए हैं।
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राज्य उप महासचिव कृष्ण नैन, राज्य कोऑर्डिनेटर सुरजीत दुसाद, जिला प्रधान राजपाल मित्तल, जिला सचिव देसराज माचरा, वरिष्ठ उपप्रधान डॉ. नीतू डूडेजा ने कहा कि डेट शीट जारी करने के बाद गलती का आभास होने पर आनन फानन इसे रद्द करते हुए अगले दिन नए सिरे से डेट शीट जारी की गई। उसके बाद दो दिसंबर को विद्यालय मुखियाओं को ही अपने स्तर पर सेट परीक्षा लेने का फरमान जारी कर दिया गया, जबकि इसके लिए कोई बजट जारी नहीं किया गया। अब पढ़ाई के समय में प्राथमिक अध्यापकों का बाल वाटिका के लिए 5 दिनों का प्रशिक्षण रखा गया। विद्यालय स्तर पर भी बच्चों को पढ़ाई से दूर रखने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम करवाने के लिए दबाव दिया जाता है।
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जिले में समय पर एसीपी के मामले नहीं सुलझाए गए। सभी अध्यापकों को 5 से 7 बार एतराज लगाकर उनके एसीपी मामले स्कूलों में वापस भेज कर तंग किया गया। जिला कार्यालय में रिश्वत का मामला चरम सीमा पर है। एसीपी मामलों में जो अध्यापक घूस नहीं देता, उसके लिए एतराज लगाए जाते रहे हैं। जिला कार्यालय की ओर से घूस देने वाले अध्यापकों के केस अपने कंप्यूटर से भी तैयार किए गए और एक सप्ताह के अंदर उनके मामले हल करके स्कूलों में भेज दिए गए जबकि कई मामले तो 6-6 महीनों से लटके हुए हैं। अध्यापकों के कई महीनों से मेडिकल मामले भी लटकाए हुए हैं।
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