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Fatehabad News: राशन डिपो में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, 50% आवंटन की तैयारी
Fri, 26 Dec 2025 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 26 Dec 2025 11:35 PM IST
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शहर के एक राशन डिपू पर राशन बांटती महिला। फाइल फोटो
फतेहाबाद। ग्रामीण और शहरी विकास में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने के सरकारी दावों के बीच जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चलने वाले राशन डिपो के संचालन में महिलाओं की हिस्सेदारी फिलहाल 14 प्रतिशत है। इस भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार की ओर नए राशन डिपो खोलने के लिए पॉलिसी तैयार की गई है।
इसके तहत प्रत्येक जिले में 50 प्रतिशत राशन डिपो महिलाओं को दिए जाएंगे। हालांकि इस बारे में अभी मुख्यालय की ओर से आदेश जारी नहीं हुए हैं। उम्मीद है कि साल 2026 के जनवरी या फरवरी माह में इस बारे में आदेश जारी हो जाएंगे। इसके तहत जिले में महिला संचालित राशन डिपो की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
फिलहाल जिले में 369 राशन डिपो हैं, जिसे कुल 328 लोग चला रहे हैं। इसमें करीब 46 महिलाएं ही शामिल हैं। जो महिलाएं इस क्षेत्र में जुड़ी हैं, वे न केवल सफलतापूर्वक डिपो चला रही हैं बल्कि इसे अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
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आजीविका का सशक्त माध्यम बने राशन डिपो
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में राशन डिपो का संचालन कर रही महिला दीपिका, मंजू रानी का मानना है कि यह कार्य उन्हें समाज में एक नई पहचान दे रहा है। डिपो के माध्यम से गरीब परिवारों तक अनाज, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाकर वे न केवल सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। जिला मुख्यालय के अलावा भट्टू और रतिया जैसे क्षेत्रों की महिला डिपो धारकों कमलेश व रीना का कहना है कि शुरुआत में तकनीकी कार्यों में कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन अब वे इसमें पूरी तरह निपुण हैं।
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बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
प्रदेश सरकार की ओर से राशन डिपो आवंटन में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की गई है। जानकारी के अनुसार, आगामी डिपो आवंटन प्रक्रिया में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण या विशेष प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रोत्साहित करना है।
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जिले में 369 राशन डिपो 328 लोगों को अलॉट हैं। इसमें कुल 46 महिलाएं हैं। जिले के राशन डिपो में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से पॉलिसी में बदलाव किया जा रहा है। उम्मीद है कि नए साल में सरकार इसको पचास प्रतिशत तक लेकर जा सकती है।
- विनीत जैन, डीएफएससी फतेहाबाद।
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इसके तहत प्रत्येक जिले में 50 प्रतिशत राशन डिपो महिलाओं को दिए जाएंगे। हालांकि इस बारे में अभी मुख्यालय की ओर से आदेश जारी नहीं हुए हैं। उम्मीद है कि साल 2026 के जनवरी या फरवरी माह में इस बारे में आदेश जारी हो जाएंगे। इसके तहत जिले में महिला संचालित राशन डिपो की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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फिलहाल जिले में 369 राशन डिपो हैं, जिसे कुल 328 लोग चला रहे हैं। इसमें करीब 46 महिलाएं ही शामिल हैं। जो महिलाएं इस क्षेत्र में जुड़ी हैं, वे न केवल सफलतापूर्वक डिपो चला रही हैं बल्कि इसे अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
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आजीविका का सशक्त माध्यम बने राशन डिपो
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में राशन डिपो का संचालन कर रही महिला दीपिका, मंजू रानी का मानना है कि यह कार्य उन्हें समाज में एक नई पहचान दे रहा है। डिपो के माध्यम से गरीब परिवारों तक अनाज, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाकर वे न केवल सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। जिला मुख्यालय के अलावा भट्टू और रतिया जैसे क्षेत्रों की महिला डिपो धारकों कमलेश व रीना का कहना है कि शुरुआत में तकनीकी कार्यों में कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन अब वे इसमें पूरी तरह निपुण हैं।
बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
प्रदेश सरकार की ओर से राशन डिपो आवंटन में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की गई है। जानकारी के अनुसार, आगामी डिपो आवंटन प्रक्रिया में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण या विशेष प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रोत्साहित करना है।
जिले में 369 राशन डिपो 328 लोगों को अलॉट हैं। इसमें कुल 46 महिलाएं हैं। जिले के राशन डिपो में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से पॉलिसी में बदलाव किया जा रहा है। उम्मीद है कि नए साल में सरकार इसको पचास प्रतिशत तक लेकर जा सकती है।
- विनीत जैन, डीएफएससी फतेहाबाद।