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जहां गाय का वास वहां नकारात्मकता नहीं आती : मधु
Mon, 15 Dec 2025 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 15 Dec 2025 11:06 PM IST
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भूना।कथा के दौरान उपस्थित महिला श्रद्धालु गण। संवाद
- फोटो : 1
भूना। कथा वाचक मधु बिश्नोई ने गाय के धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वे श्रीकृष्ण गोशाला सेवा समिति नाढोड़ी के तत्वावधान में आयोजित धेनु मानस गो-कथा के छठे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं को प्रवचन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि दीपावली सहित अनेक पर्वों पर घर की शुद्धि के लिए गाय के गोबर से लेप किया जाता है, जिसे पवित्र माना गया है। शास्त्रों में गाय के गोबर को लक्ष्मी का वास बताया गया है, इसलिए वर्षों से हमारे पूर्वज अपवित्र स्थानों को पवित्र करने के लिए इसका उपयोग करते आ रहे हैं। डॉ. बिश्नोई ने कहा कि यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि सतयुग से चली आ रही है।
जिस घर में गाय का आवागमन रहता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां स्वत: दूर रहती हैं। उन्होंने बताया कि गाय केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी माध्यम है। जो लोग मानसिक रूप से परेशान रहते हैं, यदि वे प्रतिदिन गाय माता की अपने हाथों से मालिश करें तो उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
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कथावाचक डॉ. बिश्नोई ने एक रोचक प्रसंग के माध्यम से बताया कि यदि घर के किसी सदस्य को किसी भी कार्य में बाधा आ रही हो, तो स्नान कर शुद्ध मन से गोमाता के कान में अपनी समस्या कहें। इससे मन को शांति मिलती है और परिणाम भी सकारात्मक देखने को मिलता है।कार्यक्रम में गोशाला सेवा समिति के प्रधान फकीरचंद गोदारा, पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह भांभू, राम सिंह गोदारा, हरि सिंह गोदारा, केसरा राम भांभू, जसकरण गोदारा सहित बड़ी संख्या में समिति सदस्य एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि दीपावली सहित अनेक पर्वों पर घर की शुद्धि के लिए गाय के गोबर से लेप किया जाता है, जिसे पवित्र माना गया है। शास्त्रों में गाय के गोबर को लक्ष्मी का वास बताया गया है, इसलिए वर्षों से हमारे पूर्वज अपवित्र स्थानों को पवित्र करने के लिए इसका उपयोग करते आ रहे हैं। डॉ. बिश्नोई ने कहा कि यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि सतयुग से चली आ रही है।
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जिस घर में गाय का आवागमन रहता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां स्वत: दूर रहती हैं। उन्होंने बताया कि गाय केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी माध्यम है। जो लोग मानसिक रूप से परेशान रहते हैं, यदि वे प्रतिदिन गाय माता की अपने हाथों से मालिश करें तो उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
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कथावाचक डॉ. बिश्नोई ने एक रोचक प्रसंग के माध्यम से बताया कि यदि घर के किसी सदस्य को किसी भी कार्य में बाधा आ रही हो, तो स्नान कर शुद्ध मन से गोमाता के कान में अपनी समस्या कहें। इससे मन को शांति मिलती है और परिणाम भी सकारात्मक देखने को मिलता है।कार्यक्रम में गोशाला सेवा समिति के प्रधान फकीरचंद गोदारा, पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह भांभू, राम सिंह गोदारा, हरि सिंह गोदारा, केसरा राम भांभू, जसकरण गोदारा सहित बड़ी संख्या में समिति सदस्य एवं ग्रामीण मौजूद रहे।