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Fatehabad News: घग्गर में बाढ़ आने पर गेट खोल कर पानी भाखड़ा नहर में डाला जा सकेगा
Sat, 08 Mar 2025 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 08 Mar 2025 11:27 PM IST
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सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी बिश्नोई जानकारी देते हुए।
फतेहाबाद। जिले को बाढ़ से बचाने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी बिश्नोई ने एक आयोजित कार्यक्रम में बताया कि बाढ़ के बाद सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं।
बिश्नोई ने बताया कि म्योंद चौकी के पास पटरी बना कर एस्केप गेट बनाने का प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है। भविष्य में घग्गर में बाढ़ आने पर एस्केप गेट खोल कर बाढ़ का पानी भाखड़ा नहर में डाला जा सकेगा। रंगाई का प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है। रंगोई की दीवारों को पक्का किया जाएगा।
हिजरावां खुर्द तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी ताकि बाढ़ का पानी एक जगह रुके नहीं। 2010 में रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता 500 क्यूसेक थी अब 575 कर दी गई है। यदि सरकार चैनल के साथ लगती भूमि अधिग्रहण कर ले तो रंगोई को चौड़ा किया जा सकता है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि गिरते भूजल को रोकने के लिए सरकार द्वारा अटल भूजल योजना व जल शक्ति अभियान चलाया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को भूजल के प्रति व्यवहार में परिवर्तन करना है। उन्होंने कहा भूजल स्तर के लिए जनभागीदारी जरूरी है।
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इसके अतिरिक्त उन्होंने व्यवहार परिवर्तन पर बल देते हुए कहा कि हम यूरिन करने के बाद फ्लश में 10 लीटर पानी बहा देते हैं। यदि फ्लश के बजाय यूरिनल पाट में यूरिन किया जाए तो मात्र 100 मिलीलीटर से काम चल सकता है। उन्होंने बताया कि 1986-87 में रतिया का वाटर लेवल 34-35 फुट था। सरकार को पानी ऊपर आने का खतरा था इसलिए एमआईटीसी महकमे ने रतिया ट्यूबवेल लगा कर जमीन से पानी निकाल कर नहरों में डाला लेकिन वहीं आज रतिया में 300 फुट पर पानी पहुंच गया है।
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बिश्नोई ने बताया कि म्योंद चौकी के पास पटरी बना कर एस्केप गेट बनाने का प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है। भविष्य में घग्गर में बाढ़ आने पर एस्केप गेट खोल कर बाढ़ का पानी भाखड़ा नहर में डाला जा सकेगा। रंगाई का प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है। रंगोई की दीवारों को पक्का किया जाएगा।
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हिजरावां खुर्द तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी ताकि बाढ़ का पानी एक जगह रुके नहीं। 2010 में रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता 500 क्यूसेक थी अब 575 कर दी गई है। यदि सरकार चैनल के साथ लगती भूमि अधिग्रहण कर ले तो रंगोई को चौड़ा किया जा सकता है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि गिरते भूजल को रोकने के लिए सरकार द्वारा अटल भूजल योजना व जल शक्ति अभियान चलाया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को भूजल के प्रति व्यवहार में परिवर्तन करना है। उन्होंने कहा भूजल स्तर के लिए जनभागीदारी जरूरी है।
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इसके अतिरिक्त उन्होंने व्यवहार परिवर्तन पर बल देते हुए कहा कि हम यूरिन करने के बाद फ्लश में 10 लीटर पानी बहा देते हैं। यदि फ्लश के बजाय यूरिनल पाट में यूरिन किया जाए तो मात्र 100 मिलीलीटर से काम चल सकता है। उन्होंने बताया कि 1986-87 में रतिया का वाटर लेवल 34-35 फुट था। सरकार को पानी ऊपर आने का खतरा था इसलिए एमआईटीसी महकमे ने रतिया ट्यूबवेल लगा कर जमीन से पानी निकाल कर नहरों में डाला लेकिन वहीं आज रतिया में 300 फुट पर पानी पहुंच गया है।