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Fatehabad News: जलभराव ने बना दिया शरणार्थी, एक माह बाद भी नहीं लौट पाए अपने घर

Sun, 21 Sep 2025 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 21 Sep 2025 11:07 PM IST
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Waterlogging has turned them into refugees, unable to return home even after a month.
गांव खारा खेड़ी के खेतों में जमा पानी। 
फतेहाबाद। जिले के गांव खारा खेड़ी, चिंदड़ और कुम्हारिया में मानसून की पहली ही बारिश से जलभराव की समस्या बनी हुई है। इससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। एक माह बीतने के बावजूद गलियों में दो-दो फीट तक पानी जमा है। इसके चलते ढाणियों के लोग अपने घर को छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। गेहूं की बिजाई शुरू होने में महज एक माह का समय बचा है जबकि जमीन के हालात देखकर इस बार गेहूं की बिजाई होना नामुमकिन ही नजर आ रहा है।
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बारिश से जिले के करीब 240 गांवों में जलभराव की समस्या बनी थी। लेकिन अब इनमें अधिकतर गांवों की आबादी से पानी निकलने के बाद लोगों को राहत मिल चुकी है। लेकिन गांव खारा खेड़ी, सालमखेड़ा, धारणियां, धांगड़, चिंदड़, बड़ोपल और कुम्हारिया में पिछले एक माह से लोग जलनिकासी का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में सेम की समस्या होने के कारण जलभराव कम नहीं हो रहा है। हालांकि सिंचाई विभाग की ओर से जल निकासी का काम जारी है। ग्रामीणों की ओर से भी पानी निकालने में विभाग की मदद की जा रही है।
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जलनिकासी में 15 दिन का समय और लगने की आशंका
सिंचाई विभाग ने गांवों से पानी निकालने के लिए पाइपलाइन बिछाकर जल निकासी कार्य शुरू कर दिया है। इससे यह पानी गांव से गुजर रहीं नहरों में डाला जा रहा है। गांव कुम्हारिया के ग्रामीणों के अनुसार चार से पांच फीट तक पानी जमा था, जो कि अब कुछ कम होने के बावजूद भी दो से तीन फीट तक जमा है। ऐसे में जल भराव की समस्या से पूरी तरह निजात पाने में अभी और करीब 15 दिनों का समय और लग सकता है। गांव खारा खेड़ी, कुम्हारिया, बड़ोपल और चिंदड़ की ढाणियां खाली हो चुकी हैं और खेतों में सन्नाटा पसरा है। इतना ही नहीं, गांव खारा खेड़ी के जलघर में बने पानी की डिग्गी में सेम का पानी जमा हो गया है, जिससे दूषित पेयजल की सप्लाई हो रही है। ग्रामीण शुद्ध पेयजल की सप्लाई को तरस रहे हैं। मजबूरन, उन्हें टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत की जाए।
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किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा
गांव खारा खेड़ी, कुम्हारिया, बड़ोपल और चिंदड़ के खेतों में जलभराव हो जाने से फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है। वहीं, कई ढाणियों में भी जल भराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे ढाणियों के लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या मानसून के सीजन में हर बार बनती है। ऐसे में सरकार से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है।

गांव में मानसून के दौरान पांच-पांच फीट तक पानी जमा हो गया था। इससे गांव खारा खेड़ी के खेत व ढाणियाें में पानी भर गया है। इससे मकान क्षतिग्रस्त होने शुरू हो गए है। वहीं रबी की फसलों की बुवाई होना मुश्किल हो गया है।
-राधेश्याम, ग्रामीण खारा खेड़ी।

गांव के चारों तरफ जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे मच्छर फेल रहे हैं। वहीं जलघर में बारिश का पानी जमा होने से दूषित पेयजल की सप्लाई हो रही है। इससे पेयजल का संकट छा गया है।
-राजबीर, ग्रामीण खारा खेड़ी।

खेतों में बनी जलभराव की समस्या से लोग ढाणियों को खाली करके रिश्तेदारों के घरों में शहर लेकर रह रहे हैं। प्रशासन को जल निकासी में तेजी लानी चाहिए ताकि लोगों को जल्द जलभराव से राहत मिल सके।

-सुरेंद्र, कुमार, ग्रामीण खारा खेड़ी।
गांव चिंदड़ और खारा खेड़ी में जल निकासी का काम जारी है। इससे जल्द लोगों को जलभराव की स्थिति से राहत मिलेगी। सिंचाई विभाग दिन-रात जल निकासी के कार्य में लगा हुआ है। -विनोद कुमार, कार्यकारी अभिंयता, सिंचाई विभाग, आदमपुर।
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