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30 फीसदी लोग ही भर रहे पानी का बिल, बढ़ाई जाएगी रिकवरी

Sat, 19 Jun 2021 11:04 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 11:04 PM IST
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Water bill is being paid by only 30 percent people, recovery will be increased
जनस्वास्थ्य विभाग अब पेयजल के बिलों की रिकवरी बढ़ाने पर जोर देगा। अभी तक मात्र 30 फीसदी लोग ही अपना पेयजल बिल चुका रहे हैं। वे भी मात्र शहरी क्षेत्र में। ग्रामीण क्षेत्रों से बिलों की रिकवरी नहीं हो पा रही। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने योजना तैयार कर ली है। जुलाई महीने से नियमित रूप से बिजली की तरह पानी के बिल भी आने लगेंगे। जो लोग बिल नहीं भरेंगे, उन्हें खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा। पेयजल बिलों की रिकवरी के मामले में सिर्फ आमजन लापरवाही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य विभाग के स्तर पर भी ठोस प्रयास नहीं किए गए।
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दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में पिछले करीब तीन साल से पेयजल के बिल ही नहीं भेजे जा रहे। हालांकि कई सालों से लोग मुफ्त पानी पी रहे हैं। वर्ष 2017 में विभाग ने एक सर्वे करवाकर बिल भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। मगर बाद में सारी प्रक्रिया सुस्त पड़ गई। वर्ष 2020 में लॉकडाउन के बाद विभाग ने भी खास ध्यान नहीं दिया।
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20 व 40 रुपये होगा बिल
विभाग ने बिजली बिल निर्धारित भी कर दिए हैं। अनुसूचित जाति परिवारों के लिए प्रति माह 20 रुपये व अन्य जातियों के लिए 40 रुपये बिल राशि निर्धारित की गई है। यानी एक साल में मात्र 240 व 480 रुपये बिल आएगा।
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मीटर लगाने की योजना अटकी
विभाग ने पहले पेयजल के मीटर लगाने की भी योजना बनाई थी। इस योजना पर काम नहीं हो पाया। विभाग की योजना थी कि नलों पर मीटर लगाए जाएंगे। मीटर की रीडिंग के आधार पर बिल वसूला जाएगा। यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इसकी वजह ये है कि अक्सर पानी में रेत आदि आने के कारण मीटर खराब हो जाते हैं। इसके अलावा मीटरों की रीडिंग के लिए विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है।

आंकड़ों जानिये स्थिति
जिले में कुल ग्राम पंचायतें : 256
कुल घर : 1 लाख 40 हजार
ढाणियां शामिल : 18 हजार
कुल पेयजल कनेक्शन : 1 लाख 22 हजार
कोट
विभाग ने गांवों में पेयजल बिलों की रिकवरी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। एक तो संसाधनों की कमी रही है। दूसरा, विभाग का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है, बल्कि लोगों को स्वच्छ व पर्याप्त जल मुहैया करवाना है। बिल इसलिए लिए जाते हैं ताकि लोगों को पानी की कीमत पता चले। इससे पानी की बचत के प्रति रुचि पैदा होती है।
-शर्माचंद लाली, जिला जल संरक्षण अधिकारी।
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