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Fatehabad News: पेयजल संकट पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
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गांव भड़ोलावांली में पानी की डिग्गी में फैली गंदगी। स्रोत : ग्रामीण
- फोटो : 1
फतेहाबाद। गांव भड़ौलांवाली में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा वीरवार को फूट पड़ा। पिछले कई दिनों से जलघर में नहरी पानी की आपूर्ति बंद होने और दूषित पेयजल की समस्या से परेशान ग्रामीण एकत्रित होकर जलघर परिसर पहुंचे और जनस्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीण रामनिवास, रमेश कुमार और राजोरानी ने बताया कि गांव के जलघर में काफी समय से नहरी पानी की सप्लाई नहीं पहुंच रही है। इससे पहले करीब 15 दिन के लिए पानी आया था, लेकिन जलघर की डिग्गियों में मात्र 2 फीट पानी ही जमा हो पाया। भीषण गर्मी के बीच अब डिग्गियां सूखने के कगार पर हैं और उनमें गंदगी जमा हो चुकी है।
ग्रामीणों ने बताया कि डिग्गी का पानी इतना दूषित और बदबूदार हो गया है कि वह पशुओं के पीने योग्य भी नहीं बचा है। पिछले चार दिनों से गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव का भूजल खारा और शोरे वाला है जिसके कारण मजबूरी में इसका इस्तेमाल करने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 1995 से लगे पंप सेट भी अब जर्जर हो चुके हैं और सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
नहरी पानी की कमी और पुरानी मशीनरी के कारण गांव की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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ग्रामीण रामनिवास, रमेश कुमार और राजोरानी ने बताया कि गांव के जलघर में काफी समय से नहरी पानी की सप्लाई नहीं पहुंच रही है। इससे पहले करीब 15 दिन के लिए पानी आया था, लेकिन जलघर की डिग्गियों में मात्र 2 फीट पानी ही जमा हो पाया। भीषण गर्मी के बीच अब डिग्गियां सूखने के कगार पर हैं और उनमें गंदगी जमा हो चुकी है।
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ग्रामीणों ने बताया कि डिग्गी का पानी इतना दूषित और बदबूदार हो गया है कि वह पशुओं के पीने योग्य भी नहीं बचा है। पिछले चार दिनों से गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव का भूजल खारा और शोरे वाला है जिसके कारण मजबूरी में इसका इस्तेमाल करने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 1995 से लगे पंप सेट भी अब जर्जर हो चुके हैं और सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
नहरी पानी की कमी और पुरानी मशीनरी के कारण गांव की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।