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गांवों के गबरू बन रहे नशेड़ी, बच्चे भी चपेट में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 11:21 PM IST
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Villagers are becoming addicts, children are also in the grip
फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। प्रदेश जहां का खानपान दूध-दही और ये ही इसकी पहचान है। वहां के गबरू नशेड़ी बन रहे हैं। गांवों के युवा भी नशा की चपेट में आने से अछूते नहीं रहे हैं। गांवों के गबरू भी नशेड़ी बन रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र में अब तक जितने मरीज दाखिल हुए है उनमें 58 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र के युवा हैं जो कि नशे की चपेट में आ चुके हैं। ये ही नहीं महिलाएं भी नशा करने से पीछे नहीं है। महिलाएं भी नशे का शिकार हो रही हैं।
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बता दें कि नशा छोड़ने के लिए ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 12 फीसदी महिलाएं भी हैं जो कि नशा ले रही हैं। यह ऐसी महिलाएं हैं जो कि पहले तस्करी में शामिल हुई और फिर खुद नशे की आदी हो गईं। जानकारी के अनुसार नागरिक अस्पताल फतेहाबाद में हर माह करीब 700 मरीज ओपीडी में नशा छुड़वाने के लिए आ रहे हैं। अप्रैल 2021 से लेकर फरवरी 2022 तक 7416 मरीज मनेाचिकित्सक की ओपीडी में आ चुके है। मरीजों की काउंसिलिंग में सामने आ रहा है कि मरीज सबसे ज्यादा हेरोइन और मेडिकल नशा ले रहे हैं। करीब 70 फीसदी मरीज हेरोइन, चूरापोस्त और मेडिकल नशा ले रहे हैं। संवाद
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चिंता : 15 साल तक के बच्चे भी कर रहे नशा
युवा और महिलाएं नशे की चपेट में आ ही रहे हैं और सबसे बड़ी चिंता ये है कि बच्चे भी नशे की चपेट में चुके हैं। पुलिस विभाग की टीम के सर्वे में ये सामने आ चुका है। पुलिस विभाग की टीम गांव हिजरावां कलां, अयाल्की, रतनगढ़, ब्राहम्णवाला, महमड़ा, रत्ताखेड़ा में सर्वे कर रही है। एक गांव में सामने आया है कि 15 साल तक के बच्चे भी नशा कर रहे हैं। नशा छोड़ने के लिए 120 युवा तैयार हो चुके हैं। इसमें 48 मरीजों का उपचार करवा दिया है।
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पहले साथी ने थोड़ा नशा दिया और फिर आदत बन गई
नशा मुक्ति केंद्र की ओपीडी में आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग में अधिकतर केसों में सामने आ रहा है कि नशेड़ी बनाने में साथी ही जिम्मेदार है। फतेहाबाद निवासी 22 वर्षीय युवक का कहना है कि उसके साथी ने पहले हेरोइन का नशा उसे दिया, उसके बाद उसकी आदत बन गई और वह खुद नशे की तलाश करने लग गया। चिकित्सकों की माने तो 80 फीसदी केसों में नशेड़ी बनाने में उनके साथी ही जिम्मेदार हैं।
महिलाएं पहले तस्करी में जुड़ीं, फिर खुद करने लग गईं नशा
नशा छोड़ने के लिए ओपीडी में आने वाले मरीजों में महिलाएं भी शामिल हैं। ऐसी महिलाओं की संख्या करीब 12 फीसदी हैं। महिलाएं भी हेरोइन और मेडिकल नशा ले रही हैं। कई महिलाओं की काउंसिलिंग में सामने आ चुका है कि ये पहले तस्करी करती थी और धीरे-धीरे खुद नशा लेने लग गई और नशे की लत लग गईं।
नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल मरीजों की स्थिति
नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल हुए कुल मरीज : 893
नशा मुक्ति केंद्र में फतेहाबाद शहर के दाखिल हुए मरीज : 372
नशा मुक्ति केंद्र में फतेहाबाद के गांवों के दाखिल मरीज : 521
नशा मुक्ति केंद्र में फिलहाल दाखिल मरीज : 20
अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 तक ओपीडी में आए मरीज : 7416
पुलिस ने 6 गांवों में किया सर्वे 120 युवा छोड़ने को तैयार
हिजरावां कलां : 27
अयाल्की : 23
ब्राहम्णवाला : 32
रतनगढ़ : 6
महमड़ा : 4
रत्ताखेड़ा : 28
कोट
पुलिस विभाग की टीम 48 मरीजों का करवा चुकी है उपचार
जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए टीम का गठन किया गया है। टीम गांवों में जाकर लोगों का नशे के प्रति जागरूक कर रही है। छह गांवों में 120 युवा नशा छोड़ने को तैयार हो चुके हैं। सबसे ज्यादा युवा गांजा, हेरोइन और मेडिकल नशा ले रहे है। युवाओं को नशा के दलदल से निकालने के लिए मां-बाप सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभा सकते है। वह अपने बच्चे को समय दें और समय-समय पर काउंसिलिंग करते रहे।

-एसआई सुंदर मुसाफिर नशा मुक्ति अभियान टीम, पुलिस विभाग
नशा छोड़ने के लिए ओपीड़ी में रोजाना 25 से 30 मरीज आ रहे हैं, जिन्हें जरूरत है उन्हें दाखिल भी किया जा रहा है। युवा सबसे ज्यादा नशे की चपेट में आ रहे हैं। युवाओं का नशे के दलदल में फंसने का मुख्य कारण संगति है। गलत संगत में रहकर वह नशे का शिकार हो जाता है।
- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक, नोडल अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र
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