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Fatehabad News: दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा मामले में विजिलेंस दोबारा तैयार करेगा सोर्स रिपोर्ट
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फतेहाबाद का सिविल सर्जन कार्यालय।
फतेहाबाद। दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा मामले में शामिल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। विजिलेंस मुख्यालय इस मामले में जल्द जांच को लेकर कार्रवाई शुरू कर सकता है। विजिलेंस मुख्यालय ने मामले को लेकर जिला विजिलेंस कार्यालय से दोबारा सोर्स रिपोर्ट मांगी है। सोर्स रिपोर्ट में पूछा गया है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने में कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के लिए प्रक्रिया क्या है और किस तरह इसमें फर्जीवाड़ा हुआ है।
हालांकि विजिलेंस ने इस मामले में करीब तीन माह पहले ही सोर्स रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी थी लेकिन अब रिपोर्ट मांगी गई है। सोर्स रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस मुख्यालय के उच्च अधिकारी जांच के लिए आदेश देंगे। विजिलेंस अपने स्तर पर भी मामले की जांच करेगी। बता दें कि सिविल सर्जन द्वारा बनाई गई कमेटी की जांच में 80 दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी मिले थे और 842 प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए थे। सिविल सर्जन ने जांच रिपोर्ट शहर थाना को भेजी थी लेकिन मामला विजिलेंस के पास होने के चलते इसमें मामला अब तक दर्ज नहीं हुआ है।
चार साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा
दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर फर्जीवाड़ा पिछले चार सालों से चल रहा था। कमेटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक सिविल सर्जन कार्यालय ने 3769 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए। जांच के दौरान 842 संदिग्ध पाए गए। टीम ने जब संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच की तो 80 दिव्यांग प्रमाण पत्रों का रिकार्ड मिला। रिकार्ड जांच के दौरान करीब 30 प्रमाण पत्र ऐसे पाए गए जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में प्रतिशत अलग-अलग मिली। करीब 32 दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनकी असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर नहीं थे। इसके अलावा अन्य प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर नहीं मिले और प्रतिशत अलग-अलग थी। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग भी मिली।
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कोट
दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा मामले में मुख्यालय को सोर्स रिपोर्ट भेजी थी, उसको लेकर कुछ जानकारी मुख्यालय ने मांगी है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
-राकेश मलिक, डीएसपी, विजिलेंस
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हालांकि विजिलेंस ने इस मामले में करीब तीन माह पहले ही सोर्स रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी थी लेकिन अब रिपोर्ट मांगी गई है। सोर्स रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस मुख्यालय के उच्च अधिकारी जांच के लिए आदेश देंगे। विजिलेंस अपने स्तर पर भी मामले की जांच करेगी। बता दें कि सिविल सर्जन द्वारा बनाई गई कमेटी की जांच में 80 दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी मिले थे और 842 प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए थे। सिविल सर्जन ने जांच रिपोर्ट शहर थाना को भेजी थी लेकिन मामला विजिलेंस के पास होने के चलते इसमें मामला अब तक दर्ज नहीं हुआ है।
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चार साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा
दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर फर्जीवाड़ा पिछले चार सालों से चल रहा था। कमेटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक सिविल सर्जन कार्यालय ने 3769 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए। जांच के दौरान 842 संदिग्ध पाए गए। टीम ने जब संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच की तो 80 दिव्यांग प्रमाण पत्रों का रिकार्ड मिला। रिकार्ड जांच के दौरान करीब 30 प्रमाण पत्र ऐसे पाए गए जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में प्रतिशत अलग-अलग मिली। करीब 32 दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनकी असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर नहीं थे। इसके अलावा अन्य प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर नहीं मिले और प्रतिशत अलग-अलग थी। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग भी मिली।
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दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा मामले में मुख्यालय को सोर्स रिपोर्ट भेजी थी, उसको लेकर कुछ जानकारी मुख्यालय ने मांगी है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
-राकेश मलिक, डीएसपी, विजिलेंस