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चार साल बाद फिर सड़कों पर दिखने लगे लावारिस पशु

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 11:00 PM IST
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Unclaimed animals started appearing on the streets again after four years
भूना मोड़ के पास खड़ी गायें। - फोटो : Fatehabad
शहर में लावारिस पशु फिर सड़कों पर दिखने लगे हैं। करीब चार साल तक शहरवासी इस समस्या से राहत महसूस कर रहे थे। अब समाजसेवियों का जज्बा भी कम हो रहा है और प्रशासन का रवैया भी उदासीन है। समस्या को लेकर कोई गंभीर नहीं है। वर्ष 2017 में प्रशासन ने जिले को स्ट्रे कैटल फ्री घोषित किया था। तब यह बड़ी कामयाबी मानी गई। तब सिर्फ प्रशासन ही नहीं, कई संस्थाएं भी जोर-शोर से सहयोग दे रही थीं। तब एक बारगी तमाम पशुओं को नंदीशाला भेज दिया गया। मगर उसके बाद प्रशासन ने नंदीशाला की व्यवस्था पर कोई ध्यान ही नहीं दिया। इसके चलते अब धीरे-धीरे तमाम पशु शहर की तरफ आ रहे हैं। अब सड़कों पर सिर्फ सांड़ नहीं, बल्कि गाय भी काफी संख्या में आ चुकी हैं। संवाद
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लाइव रिपोर्ट
सुबह 05:20 बजे। शहर के बीच से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर पुराने बस स्टैंड के पास एक सांड़ बैठा है। पास से वाहन गुजर रहे हैं। सुबह हल्का अंधेरा होने के कारण दूर से सांड़ दिखाई नहीं देता। करीब आने पर चलता है कि आगे सांड़ बैठा है। वाहन चालकों को एकदम ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है। रात को यही समस्या रहती है कि सांड़ सड़क पर बैठ जाते हैं।
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सुबह 08:00 बजे। मेन रोड पर एक्सिस बैंक के सामने गायों का झुंड पेड़ के नीचे बैठा है। आमतौर पर कहा जाता है कि गोशाला संचालक गायों को तो रख लेते हैं, बल्कि नंदियों के लिए समस्या रहती है। मगर फिलहाल शहर में गाय ज्यादा संख्या में घूम रही हैं।
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दोपहर 11:40 बजे। तीन-चार गायों का एक समूह भूना मोड़ के पास पेड़ के नीचे खड़ा है। दूर से वाहन सामान्य गति में आते हैं, लेकिन गायों को देखकर उन्हें गति धीमी करनी पड़ती है ताकि कोई हादसा न हो जाए। यहां पर बीच-बीच में जाम की भी स्थिति बनती रही।
दोपहर 12:20 बजे। यह दृश्य नई सब्जी मंडी के पास स्थित एक होटल के सामने का है। यहां तीन गाय व नंदी सड़क के बीच खड़े हैं। वाहन चालक वहां से बच-बच कर निकलते हैं। कोई हॉर्न बजा रहा है। कोई साइड तलाश रहा है। गायें जगह नहीं दे रहीं। यह समस्या अक्सर देखी जा सकती है।
वर्ष 2008 से उठने लगी थी मांग
शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त करने की मांग वर्ष 2008 से उठी थी। उस समय नगर परिषद के कर्मचारी गायों व बैलों को गाड़ी में चढ़ाकर खेतों में छोड़ आते थे। मगर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। वर्ष 2011 के बाद समस्याओं को लेकर लोगों ने ज्ञापन व मांग पत्र देने शुरू किए। उन दिनों तत्कालीन एसडीएम बलजीत सिंह ने भी काफी प्रयास किए। मगर समस्या बढ़ती जा रही थी। वर्ष 2014 के बाद प्रशासन ने अभियान तेज किया। इसके बाद गांव स्तर पर बाड़बंदी कर नंदीशालाएं बनाई गईं। शहर में भी मताना रोड पर नंदीशाला स्थापित की गई। हालांकि नंदीशाला आज भी चल रही है। मगर स्थायी ग्रांट नहीं मिल रही।
पुलिस ने बंद किया सहयोग देना
करीब पांच साल पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ओपी नरवाल के कार्यकाल में नंदीशाला में पुलिस विभाग का भी योगदान शुरू हुआ। पुलिस कर्मचारी हर माह कुछ राशि एकत्र करके नंदीशाला के सहयोग के लिए देते थे। मगर धीरे-धीरे यह सहयोग भी बंद हो गया। अब कुछेक कर्मचारी व्यक्तिगत आस्था से दान कर रहे हैं।
शहर में करीब 300 पशु
इस समय शहर के विभिन्न वार्डों, मुख्य मार्गों, सेक्टर व कॉलोनियों आदि में करीब 300 पशु घूम रहे हैं। इनकी तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
कोट
समस्या क्यों आई, पता नहीं : ईओ
लावारिस पशुओं की समस्या दोबारा क्यों आई, इस बारे में सफाई निरीक्षक ही बता सकते हैं। वही इस समस्या को देखते हैं। मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है।
-अरविंद बाल्यान, ईओ, नगर परिषद।
गांववाले छोड़कर जा रहे हैं : सफाई निरीक्षक
जहां तक मुझे जानकारी मिली है, इन पशुओं को गांवों के लोग छोड़कर जा रहे हैं। जब घरों में गायें दूध देना बंद कर देती हैं तो उन्हें शहर में छोड़ जाते हैं। इसका समाधान किया जाएगा।

मुकेश कुमार, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद।
दो दिन बाद आकर देखता हूं : एसडीएम
यह समस्या अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं थी। मैं कुछ दिन से अवकाश पर हूं। दो दिन बाद ड्यूटी ज्वाइन कर लूंगा। आते ही समस्या को देखूंगा। इसका निवारण किया जाएगा।
-कुलभूषण बंसल, एसडीएम, फतेहाबाद।

एक्सिस बैंक के सामने बैठी गायें।

एक्सिस बैंक के सामने बैठी गायें।- फोटो : Fatehabad

पुराने बस स्टैंड के पास रोड पर बैठा सांड।

पुराने बस स्टैंड के पास रोड पर बैठा सांड।- फोटो : Fatehabad

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