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तीन घंटे तड़पती रही गर्भवती, नहीं आया डॉक्टर, हालत बिगड़ी तो कर दिया रेफर

Sat, 21 Dec 2019 11:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2019 11:39 PM IST
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treatment delay, Pregnant for three hours, the doctor did not come, the condition deteriorated and referred, fatehabad
गंभीर हालत में गर्भवती को नागरिक अस्प्ताल से रेफर करते हुए - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में डिलिवरी के लिए आई गर्भवती तीन घंटे तक प्रसूता वार्ड में तड़पती रही लेकिन उसे उपचार नहीं दिया गया। जब उसकी हालत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा की जान को खतरा बताकर रेफर कर दिया। डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा उपचार न देने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने हंगामा कर दिया।
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परिजनों ने आरोप लगाया कि तीन घंटे तक गर्भवती तड़पती रही लेकिन बार-बार बुलाने के बाद भी डॉक्टर और स्टाफ नहीं आया और न ही रेफर फाइल बनाई गई। जब हालत बिगड़ गई तो उसे रेफर कर दिया। हंगामे के बाद परिजन गर्भवती को अग्रोहा मेडिकल ले गए। वहीं उप सिविल सर्जन डॉ. संगीता का कहना है कि सुबह चेकअप किया था, उस समय मरीज ठीक थी।
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मामले के मुताबिक, गांव बीघड़ निवासी गर्भवती हरप्रीत कौर की मां चरणजीत ने कहा कि लेबर पेन शुरू होने पर डिलिवरी के लिए नागरिक अस्पताल लेकर आए थे। आरोप है कि यहां पर डॉक्टरों और स्टाफ ने उपचार नहीं दिया। करीब तीन घंटे तक गर्भवती हरप्रीत कौर तड़पती रही। लेकिन न डॉक्टर आया और न ही स्टाफ। जब तीन घंटे बाद हालत बिगड़ी तो कहा कि जच्चा-बच्चा की जान को खतरा है और इस दौरान दौरा भी आ गया। यहां तक कि रेफर फाइल भी नहीं दी गई। मां चरणजीत ने कहा कि वह गांव में आंगनबाड़ी वर्कर है, जब उसकी बेटी को उपचार नहीं मिल रहा तो दूसरों को क्या मिलेगा।
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अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा, उप सिविल सर्जन संभाल रहीं ओपीडी
जिला भर के स्वास्थ्य केंद्रों पर मात्र तीन ही गायनोलॉजिस्ट तैनात हैं। जबकि गायनो के 25 पद स्वीकृत हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी भी उप सिविल सर्जन संभाल रही हैं। जबकि नागरिक अस्पताल में हर माह करीब 350 डिलिवरी हो रही हैं।

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मेरी शनिवार को ओपीडी में ड्यूटी थी। सुबह मैं मरीज को देखकर आई थी, उस समय वह ठीक थी। इसके बाद लेबर रूम में दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी थी, पता चला है कि मरीज को दौरा आया है। बाकी जो आरोप हैं वह गलत हैं।
- डॉ. संगीता अबरोल, उप सिविल सर्जन
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