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तप से आत्मा निर्मल एवं काया निरामय बनेगी : साध्वी समन्वय प्रभा
Wed, 11 Sep 2024 03:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 11 Sep 2024 03:28 AM IST
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टोहाना। तेरापंथ धर्मसंघ के शांति दूत आचार्य महाश्रमण की शिष्या साध्वी समन्वय प्रभा के सानिध्य में तेरापंथ भवन में तप अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि तप से आत्मा निर्मल एवं काया निरामय बनती है।
इस दौरान चार तपस्वी सुंदरलाल जैन, नरेश जैन, विनोद जैन तथा लाजपत जैन के तप की अनुमोदना एवं तप अभिनंदन किया। टोहाना तेरापंथ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक साथ चार तपस्वियों का संवत्सरी अवसर पर तप अभिनंदन किया गया। साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि भगवान महावीर ने मोक्ष के चार मार्ग बताए हैं, उनमें से एक सशक्त मार्ग तप है। तप से घनघाती कर्मों का क्षय होता है और आत्मा मोक्षगामी बनती है।
जिस प्रकार सोना तप कर कुंदन बनता है, उसी प्रकार तप से आत्मा भी उज्ज्वल, पवित्र तथा पावन बन जाती है। उन्होंने कहा कि तप की अनुमोदना से भी कर्मों की निर्जरा होती है। साध्वी चारुलता ने मधुर गीतिका के माध्यम से तप के महत्व के बारे में जानकारी दी। साध्वी संयम प्रभा ने मूक भाव से तप की अनुमोदना की। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल ने मंगलाचरण से किया। इसके बाद महिला मंडल ने गीतिका के माध्यम से तपस्वी नरेश जैन के परिवार से कृष्णा जैन, उषा जैन, मनीषा व पंकज जैन के तप की अनुमोदना की।
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तेरापंथ सभा के मंत्री सुभाष जैन, महिला मंडल अध्यक्ष रजनी जैन तथा प्रांतीय सभा मंत्री अमित जैन ने भी अपनी भावना व्यक्त की। अंत में तेरापंथ सभा की ओर से सभी चार तपस्वियों को पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विनोद जैन एवं लाजपत राय जैन में इस चातुर्मास में दूसरी बार तपस्या कर इतिहास रचा है। कार्यक्रम का संयोजन सभा के मंत्री सुभाष जैन ने किया।
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इस दौरान चार तपस्वी सुंदरलाल जैन, नरेश जैन, विनोद जैन तथा लाजपत जैन के तप की अनुमोदना एवं तप अभिनंदन किया। टोहाना तेरापंथ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक साथ चार तपस्वियों का संवत्सरी अवसर पर तप अभिनंदन किया गया। साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि भगवान महावीर ने मोक्ष के चार मार्ग बताए हैं, उनमें से एक सशक्त मार्ग तप है। तप से घनघाती कर्मों का क्षय होता है और आत्मा मोक्षगामी बनती है।
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जिस प्रकार सोना तप कर कुंदन बनता है, उसी प्रकार तप से आत्मा भी उज्ज्वल, पवित्र तथा पावन बन जाती है। उन्होंने कहा कि तप की अनुमोदना से भी कर्मों की निर्जरा होती है। साध्वी चारुलता ने मधुर गीतिका के माध्यम से तप के महत्व के बारे में जानकारी दी। साध्वी संयम प्रभा ने मूक भाव से तप की अनुमोदना की। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल ने मंगलाचरण से किया। इसके बाद महिला मंडल ने गीतिका के माध्यम से तपस्वी नरेश जैन के परिवार से कृष्णा जैन, उषा जैन, मनीषा व पंकज जैन के तप की अनुमोदना की।
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तेरापंथ सभा के मंत्री सुभाष जैन, महिला मंडल अध्यक्ष रजनी जैन तथा प्रांतीय सभा मंत्री अमित जैन ने भी अपनी भावना व्यक्त की। अंत में तेरापंथ सभा की ओर से सभी चार तपस्वियों को पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विनोद जैन एवं लाजपत राय जैन में इस चातुर्मास में दूसरी बार तपस्या कर इतिहास रचा है। कार्यक्रम का संयोजन सभा के मंत्री सुभाष जैन ने किया।