{"_id":"612a71cc8ebc3e7a191cb0d6","slug":"thieves-roaming-from-the-city-to-the-fields-on-an-average-three-cases-are-being-registered-daily-fatehabad-news-hsr6101760169","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर से लेकर खेतों तक घूम रहे चोर, रोजाना दर्ज हो रहे औसतन तीन केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर से लेकर खेतों तक घूम रहे चोर, रोजाना दर्ज हो रहे औसतन तीन केस
विज्ञापन
शहर से लेकर खेतों तक में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिले में दुपहिया वाहन चोरी तो आम बात हो गई है। चोर खेतों में लगे ट्यूबवेल की तारें व सोलर सिस्टम तक उतार कर ले जा रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर गौर करें तो हर रोज औसतन 3 से 4 चोरी हो रही हैं। एक सप्ताह में अब तक जिले में 20 से ज्यादा चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। बारिश का सीजन शुरू होने से पहले अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों की बैठक ली थी। बैठक में कहा गया था कि बारिश के मौसम में चोरी जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस मौसम में रात को लोग घरों से बाहर नहीं निकलते। चोर उसका फायदा उठाते हैं।
मगर धरातल पर दिशा निर्देशों का असर दिख नहीं रहा। अब ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जिस दिन कोई चोरी का मुकदमा दर्ज न हो। सरकार कहती है कि बिजली की बचत के लिए किसान खेतों में भी सोलर सिस्टम लगवाए। मगर हकीकत ये है कि खेतों में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। चोर ट्यूबवेल की कीमती तार काट कर ले जाते हैं। ट्रांसफार्मरों से तेल निकाल कर ले जाते हैं। चार दिन पहले ही गांव सरवरपुर में चोर एक किसान के खेत से सोलर सिस्टम व ट्यूबवेल की तार चोरी करके ले गए। इस महीने की सबसे बड़ी चोरी वीरवार रात भूना में हुई है, जहां पर चोरों ने छह दुकानों के ताले तोड़े। खास बात ये रही कि सभी दुकानें अलग-अलग जगह पर हैं। पुलिस को भी भनक तक नहीं लगी।
पचास फीसदी मामलों में बाइक चोरी
पुलिस के पास दर्ज मामलों के मुताबिक करीब 50 फीसदी केस बाइक चोरी के हैं। बाइक चोरी के मामलों को पुलिस ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती। दरअसल, ज्यादातर वाहनों के इंश्योरेंस होते हैं। एफआईआर दर्ज होने के थोड़े ही दिन बाद वाहन मालिकों को बीमा क्लेम मिल जाता है। इसके बाद न तो पुलिस मामले में दिलचस्पी लेती है और न ही वाहन चालक चिंता करते हैं। हर माह बाइक चोरी के 40 से 50 केस दर्ज हो रहे हैं।
विज्ञापन
इन कमियों का फायदा उठाते हैं चोर
1. खेतों में रात को कोई नहीं होता। वहां पर बिजली उपकरण व तारें चोरी करने में आसानी रहती है। खेतों में पुलिस का भी डर नहीं रहता।
2. चोर रोजाना गलियों में घूम कर चेक करते हैं कि किस मकान को शाम तक ताला हुआ है। ताला लगा है तो मतलब घर में कोई नहीं है। ऐसे में चोरी करना आसान हो जाता है।
3. चोर पुलिस पर भी नजर रखते हैं। जिस दिन पुलिस किसी रैली, रोष प्रदर्शन या बड़े मामले को निपटाने में व्यस्त हो, उस दिन चोरों के पास मौका होता है। मसलन, जब किसानों ने टोहाना थाने का घेराव किया था तो पुलिस तीन दिन वहीं रही।
4. बारिश, धुंध व सर्द रातों में भी चोरों के पास मौके होते हैं। रात को लोग घरों से नहीं निकलते। उस मौसम में चोर अपना काम आसानी से कर जाते हैं।
5. पुलिस अक्सर रात को गाड़ी या दुपहिया वाहनों पर गश्त करती है। वाहनों पर पुलिस की बत्ती लगी होती है। उससे चोरों को दूर से पता चल जाता है कि पुलिस आ रही है। चोर फायदा उठाकर इधर-उधर हो जाते हैं।
रिकवरी की दर करीब 30 प्रतिशत
चोरी होने के बाद उम्मीद रहती है कि पुलिस चोर को पकड़ेगी और सामान बरामद करवाएगी। मगर यह उम्मीद ही बेकार है। लगभग पचास फीसदी मामलों में चोर ही नहीं पकड़े जाते। यदि चोर पकड़ लिए जातें तो उनसे चोरीशुदा माल की रिकवरी नहीं हो पाती। नकदी व जेवर को चोर आसानी से ठिकाने लगा देते हैं। वाहन बरामद होने की उम्मीद रहती है। कुल मिलाकर पुलिस करीब 30 प्रतिशत ही माल बरामद कर पाती है। कभी कभार यह अनुपात कम या ज्यादा हो जाता है।
कोट
पुलिस चोरी की हर शिकायत को गंभीरता से ले रही है। कई बार कोई गिरोह सक्रिय हो जाता है। फिर भी शहर में 15 दिनों में कोई चोरी नहीं हुई है। काफी नियंत्रण है। कुछ चोर पकड़े भी गए थे।
-राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।
विज्ञापन
मगर धरातल पर दिशा निर्देशों का असर दिख नहीं रहा। अब ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जिस दिन कोई चोरी का मुकदमा दर्ज न हो। सरकार कहती है कि बिजली की बचत के लिए किसान खेतों में भी सोलर सिस्टम लगवाए। मगर हकीकत ये है कि खेतों में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। चोर ट्यूबवेल की कीमती तार काट कर ले जाते हैं। ट्रांसफार्मरों से तेल निकाल कर ले जाते हैं। चार दिन पहले ही गांव सरवरपुर में चोर एक किसान के खेत से सोलर सिस्टम व ट्यूबवेल की तार चोरी करके ले गए। इस महीने की सबसे बड़ी चोरी वीरवार रात भूना में हुई है, जहां पर चोरों ने छह दुकानों के ताले तोड़े। खास बात ये रही कि सभी दुकानें अलग-अलग जगह पर हैं। पुलिस को भी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
पचास फीसदी मामलों में बाइक चोरी
पुलिस के पास दर्ज मामलों के मुताबिक करीब 50 फीसदी केस बाइक चोरी के हैं। बाइक चोरी के मामलों को पुलिस ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती। दरअसल, ज्यादातर वाहनों के इंश्योरेंस होते हैं। एफआईआर दर्ज होने के थोड़े ही दिन बाद वाहन मालिकों को बीमा क्लेम मिल जाता है। इसके बाद न तो पुलिस मामले में दिलचस्पी लेती है और न ही वाहन चालक चिंता करते हैं। हर माह बाइक चोरी के 40 से 50 केस दर्ज हो रहे हैं।
विज्ञापन
इन कमियों का फायदा उठाते हैं चोर
1. खेतों में रात को कोई नहीं होता। वहां पर बिजली उपकरण व तारें चोरी करने में आसानी रहती है। खेतों में पुलिस का भी डर नहीं रहता।
2. चोर रोजाना गलियों में घूम कर चेक करते हैं कि किस मकान को शाम तक ताला हुआ है। ताला लगा है तो मतलब घर में कोई नहीं है। ऐसे में चोरी करना आसान हो जाता है।
3. चोर पुलिस पर भी नजर रखते हैं। जिस दिन पुलिस किसी रैली, रोष प्रदर्शन या बड़े मामले को निपटाने में व्यस्त हो, उस दिन चोरों के पास मौका होता है। मसलन, जब किसानों ने टोहाना थाने का घेराव किया था तो पुलिस तीन दिन वहीं रही।
4. बारिश, धुंध व सर्द रातों में भी चोरों के पास मौके होते हैं। रात को लोग घरों से नहीं निकलते। उस मौसम में चोर अपना काम आसानी से कर जाते हैं।
5. पुलिस अक्सर रात को गाड़ी या दुपहिया वाहनों पर गश्त करती है। वाहनों पर पुलिस की बत्ती लगी होती है। उससे चोरों को दूर से पता चल जाता है कि पुलिस आ रही है। चोर फायदा उठाकर इधर-उधर हो जाते हैं।
रिकवरी की दर करीब 30 प्रतिशत
चोरी होने के बाद उम्मीद रहती है कि पुलिस चोर को पकड़ेगी और सामान बरामद करवाएगी। मगर यह उम्मीद ही बेकार है। लगभग पचास फीसदी मामलों में चोर ही नहीं पकड़े जाते। यदि चोर पकड़ लिए जातें तो उनसे चोरीशुदा माल की रिकवरी नहीं हो पाती। नकदी व जेवर को चोर आसानी से ठिकाने लगा देते हैं। वाहन बरामद होने की उम्मीद रहती है। कुल मिलाकर पुलिस करीब 30 प्रतिशत ही माल बरामद कर पाती है। कभी कभार यह अनुपात कम या ज्यादा हो जाता है।
कोट
पुलिस चोरी की हर शिकायत को गंभीरता से ले रही है। कई बार कोई गिरोह सक्रिय हो जाता है। फिर भी शहर में 15 दिनों में कोई चोरी नहीं हुई है। काफी नियंत्रण है। कुछ चोर पकड़े भी गए थे।
-राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।