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Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   There seems to be two classes of children in room 150

दो कमरों में 150 बच्चों की लगती है कक्षाएं

Fri, 11 Jul 2014 11:19 PM IST
fatehabad
fatehabad Updated Fri, 11 Jul 2014 11:19 PM IST
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टोहाना की इंदिरा कॉलोनी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों को अपने स्कूल में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, यह बच्चों के मासूम चेहरों को देखने से ही पता चल जाता है। इंदिरा कॉलोनी में मात्र छह से सात मरला जमीन पर बने स्कूल के इस भवन में मात्र दो ही कमरे हैं। इन दोनों कमरों में 150 बच्चे बैठकर शिक्षा लेते हैं। इन हालातों में बच्चे कितना पढ़ पाते होंगे, यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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इंदिरा कॉलोनी के इस राजकीय प्राथमिक पाठशाला का डिजाइन कुछ यूं है कि यहां का प्रांगण चार फुट गहरा और सीढ़ी दार है। इस स्कूल के प्रांगण में लोहे की टीन की छत लगी है। जितने बच्चे क्लासरूम में आ जाएं ठीक है, बाकी बच्चों को लोहे की छत के नीचे ही बैठा दिया जाता है। कॉलोनी का यह स्कूल मेन सड़क से लगभग दो फुट नीचे है। ऐसे में जब भी बरसात आती है तो यह स्कूल तालाब बन जाता है। बच्चे यहां शिक्षा लेने की बजाय इसमें तैरते और खेलते नजर आते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां पांच अध्यापक कार्यरत हैं। स्कूल में कोई अन्य कक्ष न होने के कारण बच्चों के लिए मिड डे मील भी क्लास रूम में पढ़ाई के समय ही बनाया जाता है। चूल्हे का धुआं बच्चों की जान निकालने लगता है। धुएं से बच्चे रोने तक लग जाते हैं।
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इसके अलावा, जब भी बरसात आती है तो लोहे की छत से पानी टपकने लगता है। सड़क से नीचा होने के कारण मुख्य सड़क का पानी भी स्कूल में घुस जाता है। सीढ़ीनुमा प्रांगण थोड़ी देर में ही तालाब में तब्दील हो जाता है। ऐेसे में पहले तो बच्चे, स्कूल अध्यापक और हेडमास्टर मिलकर स्कूल में घुसा पानी निकालने में लग जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी लगातार बरसात जारी रहे तो छुट्टी करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता। अब मानसून सिर पर है तो अभी से ही स्कूल के बच्चों और अध्यापकों को डर सताने लगा है। इस बाबत स्कूल के हेडमास्टर और प्रबंधक कमेटी ने शिक्षा विभाग को कई बार पत्र लिखा और अपनी परेशानियों से अवगत करवाया, लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हो पाया है।
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क्या कहते हैं हेडमास्टर
स्कूल के हेडमास्टर संजय खुरपा का कहना है कि जगह की कमी के चलते बच्चों को परेशानी होती है। इस बाबत कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।




क्या कहते हैं अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी रोशनलाल ने कहा कि अमर उजाला के माध्यम से ही उन्हेें समस्या के बारे में पता चला है। अब तक वह स्कूल की इस समस्या से अनजान थे। जल्द ही स्कूल का दौरा करेंगे। स्कूल की छत को उठाया जाएगा और मिट्टी डालकर स्कूल का लेबल सड़क बराबर लाया जाएगा।
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