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Fatehabad News: गांवों में कर्मचारियों का टोटा, सरपंच खुद के खर्चे पर करवा रहे सफाई कार्य
Sun, 05 Jan 2025 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 05 Jan 2025 11:18 PM IST
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गांव मेहूवाला में बने सार्वजनिक शौचालय में उगी झाड़िया। संवाद
फतेहाबाद। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालयों की हालात खस्ता हो चुकी है। इन शौचालयों के निर्माण के बाद इनकी सफाई नहीं हो सकी है। ऐसे में जिले के कुछ शौचालय ऐसे भी है, जिनका निर्माण कार्य दो साल पहले बनी ग्राम पंचायतों के द्वारा करवाया गया है।
जिसके कारण अब ये शाैचालय गंदगी से अट चुके हैं। जिससे अब ये प्रयोग करने योग्य नहीं रहे हैं। सरकार के स्वच्छता अभियान को मजबूती देने व इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया है। जिले के गांवों में भी सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण इन्हीं योजनाओं से करवाया गया है।
इन सार्वजनिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों की होगी, ताकि इनकी साफ-सफाई होती रहे। वहीं गांवों में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण इसलिए भी करवाया गया था कि, गांव में होने वाले सामूहिक कार्यक्रमों, बाहर से आने वाली लेबर और फेरी वालों के अलावा अन्य लोगों को खुले में शौच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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जन-जन को स्वच्छता की मुहिम से जोड़ने में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण अहम भूमिका निभा सके, लेकिन जमीनी हकीकत पर इस अभियान का सही प्रयोग नहीं हो सका है। जिसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सफाईकर्मियों की संख्या कम हो व ग्राम पंचायतों की अनदेखी होना है।
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गांव में बने शौचालयों की सफाई नहीं होने के कारण प्रयोग करने योग्य नहीं रहे हैं। जिससे अब इन शौचालयों में लगी पानी की टोंटी और सीटें टूट गई हैं। ऐसे में अब बाहर से आने वाले लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
-बलजिंद्र सिंह, मेहूवाला।
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शौचालयों की सफाई नहीं होने से मात्र दो वर्षों में इनकी हालात जर्जर हो गई है। जिससे अब शौचालय को झाड़ियों ने घेर लिया है। ग्राम पंचायत को इनकी सफाई का काम करवानी चाहिए ताकि इनका उपयोग किया जा सके।
-सुरेश गांव, मेहूवाला।
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गांव में बने सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जानी चाहिए। वहीं शौचालयों के मरम्मत कार्य को जल्द पूरा करवाना चाहिए।
-रामनिवास, गांव भोड़िया खेड़ा।
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गांव के बस स्टैंड के पास सार्वजनिक शौचालय बने है। लेकिन सफाई नहीं होने से ये गंदगी से अट चुके हैं। इनकी सफाई और मरम्मत कार्य जल्दी करना जल्दी करना चाहिए।
-ओमप्रकाश, गांव ढिंगसरा।
-:: गांव में कुल 5 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है, लेकिन दो ही तैनात हैं। जिसके कारण शौचालयों की सफाई नहीं हो पाती है। ऐसे में इन शौचालयों की सफाई ग्राम पंचायत के द्वारा पैसे खर्च करके करवाई जा रही है।
सुभाष मूंड, सरपंच गांव ढिंगसरा।
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जिसके कारण अब ये शाैचालय गंदगी से अट चुके हैं। जिससे अब ये प्रयोग करने योग्य नहीं रहे हैं। सरकार के स्वच्छता अभियान को मजबूती देने व इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया है। जिले के गांवों में भी सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण इन्हीं योजनाओं से करवाया गया है।
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इन सार्वजनिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों की होगी, ताकि इनकी साफ-सफाई होती रहे। वहीं गांवों में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण इसलिए भी करवाया गया था कि, गांव में होने वाले सामूहिक कार्यक्रमों, बाहर से आने वाली लेबर और फेरी वालों के अलावा अन्य लोगों को खुले में शौच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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जन-जन को स्वच्छता की मुहिम से जोड़ने में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण अहम भूमिका निभा सके, लेकिन जमीनी हकीकत पर इस अभियान का सही प्रयोग नहीं हो सका है। जिसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सफाईकर्मियों की संख्या कम हो व ग्राम पंचायतों की अनदेखी होना है।
गांव में बने शौचालयों की सफाई नहीं होने के कारण प्रयोग करने योग्य नहीं रहे हैं। जिससे अब इन शौचालयों में लगी पानी की टोंटी और सीटें टूट गई हैं। ऐसे में अब बाहर से आने वाले लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
-बलजिंद्र सिंह, मेहूवाला।
शौचालयों की सफाई नहीं होने से मात्र दो वर्षों में इनकी हालात जर्जर हो गई है। जिससे अब शौचालय को झाड़ियों ने घेर लिया है। ग्राम पंचायत को इनकी सफाई का काम करवानी चाहिए ताकि इनका उपयोग किया जा सके।
-सुरेश गांव, मेहूवाला।
गांव में बने सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जानी चाहिए। वहीं शौचालयों के मरम्मत कार्य को जल्द पूरा करवाना चाहिए।
-रामनिवास, गांव भोड़िया खेड़ा।
गांव के बस स्टैंड के पास सार्वजनिक शौचालय बने है। लेकिन सफाई नहीं होने से ये गंदगी से अट चुके हैं। इनकी सफाई और मरम्मत कार्य जल्दी करना जल्दी करना चाहिए।
-ओमप्रकाश, गांव ढिंगसरा।
-:: गांव में कुल 5 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है, लेकिन दो ही तैनात हैं। जिसके कारण शौचालयों की सफाई नहीं हो पाती है। ऐसे में इन शौचालयों की सफाई ग्राम पंचायत के द्वारा पैसे खर्च करके करवाई जा रही है।
सुभाष मूंड, सरपंच गांव ढिंगसरा।