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Fatehabad News: जिले में 54 पशु चिकित्सालय और 91 पशु डिस्पेंसरी में चिकित्सक तैनात दवाइयों की कमी
Fri, 21 Nov 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 21 Nov 2025 11:38 PM IST
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गांव मेहूवाला में बना पशुचिकिसालय जिसमें नहीं है पर्याप्त दवाइयां। संवाद
फतेहाबाद। जिले के 54 पशु चिकित्सालय और 91 पशु डिस्पेंसरी में दवाइयों की कमी ने पशुपालकों और चिकित्सकों दोनों को परेशान कर दिया है। सामान्य और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध न होने के कारण बीमार पशुओं का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।
पशुपालकों का कहना है कि जब वे अपने बीमार पशु अस्पताल लेकर जाते हैं, तो डॉक्टर उन्हें बाहर से दवाइयां लाने को कहते हैं। मजबूरी में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है। जबकि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए हर साल करोड़ों का बजट देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ नहीं मिलता।
पशु अस्पतालों एवं डिस्पेंसरी में ग्लूकोज और कीड़े मारने वाली दवाइयों (वर्मिसाइड्स) जैसी साधारण और बुनियादी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं।पशु चिकित्सक भी दवाइयों के अभाव से गंभीर स्थिति में उपचार करने में असमर्थ हैं। कई बार उन्हें जरूरी दवाइयां स्टोर से मंगवानी पड़ती हैं, ताकि किसी पशु की जान बचाई जा सके।
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पशुपालक, राम सिंह मेहूवाला, रायसिंह भट्टू कलां, अशोक दैयड़ और कुलदीप आदि ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल तो बनाए गए हैं, लेकिन दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं । इससे उनको जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सरकार पशुपालकों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावे करती है।
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जरूरत के अनुसार नहीं हो रही दवाइयों की आपूर्ति
जिले के सभी पशु चिकित्सा संस्थानों में जरूरत के अनुसार डेयरी एवं पशुपालन विभाग की ओर से दवाइयों की आपूर्ति नहीं की जा रही है। फिलहाल अस्पतालों में केवल 16 प्रकार की ही दवाइयां उपलब्ध हैं, जो पशुओं में होने वाली सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं हैं। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बजट की कमी या आपूर्ति शृंखला में गड़बड़ी के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है, लेकिन इसका सीधा खामियाजा पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। अगर दवाइयां उपलब्ध होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन को बचाया जा सकेगा और पशुपालकों को राहत मिल सकेगी।
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अस्पताल में फिलहाल ये स्टॉक है उपलब्ध
फेनबेंडाजोल टैबलेट
हर्बल हेपेटोप्रोटेक्टिव बोलस
हर्बल एंटी-इंफ्लेमेटरी क्रीम 50 ग्राम
हर्बल एंटी-डायरियल बोलस
हर्बल ऐपेटोनिक बोलस
इवरमेक्टिन फेनबेंडाजोल 3 ग्राम
स्ट्रेप्टोपेनिसिलिन 5 ग्राम इंजेक्शन
ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन 30 मिली इंजेक्शन
ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन 100 मिली इंजेक्शन
हर्बल एंटीसेप्टिक स्प्रे
हर्बल एंटी-सेप्टिक क्रीम 50 ग्राम
हर्बल भूख बढ़ाने वाला 10 ग्राम
हर्बल गैलेक्टोगॉग बोलस
हर्बल एंटी-इंफ्लेमेटरी क्रीम 50 ग्राम
एंटी-ब्लोट लिक हर्बल 100 मिली
हर्बल इकोबोलिक लिक 500 मिली
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अस्पतालों में जल्द ही पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि कुछ ही दिन पहले सभी अस्पतालों में दवाइयां भेजी गई थी। अगर फिर भी कमी है तो उसका समाधान किया जाएगा।
-सुखविंद्र सिंह, उपनिदेशक, डेयरी एवं पशुपालन विभाग।
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पशुपालकों का कहना है कि जब वे अपने बीमार पशु अस्पताल लेकर जाते हैं, तो डॉक्टर उन्हें बाहर से दवाइयां लाने को कहते हैं। मजबूरी में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है। जबकि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए हर साल करोड़ों का बजट देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ नहीं मिलता।
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पशु अस्पतालों एवं डिस्पेंसरी में ग्लूकोज और कीड़े मारने वाली दवाइयों (वर्मिसाइड्स) जैसी साधारण और बुनियादी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं।पशु चिकित्सक भी दवाइयों के अभाव से गंभीर स्थिति में उपचार करने में असमर्थ हैं। कई बार उन्हें जरूरी दवाइयां स्टोर से मंगवानी पड़ती हैं, ताकि किसी पशु की जान बचाई जा सके।
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पशुपालक, राम सिंह मेहूवाला, रायसिंह भट्टू कलां, अशोक दैयड़ और कुलदीप आदि ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल तो बनाए गए हैं, लेकिन दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं । इससे उनको जेब से हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सरकार पशुपालकों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावे करती है।
जरूरत के अनुसार नहीं हो रही दवाइयों की आपूर्ति
जिले के सभी पशु चिकित्सा संस्थानों में जरूरत के अनुसार डेयरी एवं पशुपालन विभाग की ओर से दवाइयों की आपूर्ति नहीं की जा रही है। फिलहाल अस्पतालों में केवल 16 प्रकार की ही दवाइयां उपलब्ध हैं, जो पशुओं में होने वाली सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं हैं। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बजट की कमी या आपूर्ति शृंखला में गड़बड़ी के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है, लेकिन इसका सीधा खामियाजा पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। अगर दवाइयां उपलब्ध होगी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन को बचाया जा सकेगा और पशुपालकों को राहत मिल सकेगी।
अस्पताल में फिलहाल ये स्टॉक है उपलब्ध
फेनबेंडाजोल टैबलेट
हर्बल हेपेटोप्रोटेक्टिव बोलस
हर्बल एंटी-इंफ्लेमेटरी क्रीम 50 ग्राम
हर्बल एंटी-डायरियल बोलस
हर्बल ऐपेटोनिक बोलस
इवरमेक्टिन फेनबेंडाजोल 3 ग्राम
स्ट्रेप्टोपेनिसिलिन 5 ग्राम इंजेक्शन
ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन 30 मिली इंजेक्शन
ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन 100 मिली इंजेक्शन
हर्बल एंटीसेप्टिक स्प्रे
हर्बल एंटी-सेप्टिक क्रीम 50 ग्राम
हर्बल भूख बढ़ाने वाला 10 ग्राम
हर्बल गैलेक्टोगॉग बोलस
हर्बल एंटी-इंफ्लेमेटरी क्रीम 50 ग्राम
एंटी-ब्लोट लिक हर्बल 100 मिली
हर्बल इकोबोलिक लिक 500 मिली
अस्पतालों में जल्द ही पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि कुछ ही दिन पहले सभी अस्पतालों में दवाइयां भेजी गई थी। अगर फिर भी कमी है तो उसका समाधान किया जाएगा।
-सुखविंद्र सिंह, उपनिदेशक, डेयरी एवं पशुपालन विभाग।