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Fatehabad News: खिल उठे फिर से जम्मू की वादियां, पहलगाम में फिर से...

Mon, 28 Apr 2025 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 28 Apr 2025 12:18 AM IST
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The valleys of Jammu are blooming again, do such good work again in Pahalgam: Randhir
संवाद न्यूज एजेंसी
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फतेहाबाद। सेंट जोसफ इंटरनेशनल स्कूल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान रहे। मंच संचालन शिक्षक व कवि डॉ. सुदामा शास्त्री ने किया।
कविता पाठ से पहले पहलगाम में आतंकवाद का शिकार हुए लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। काव्य पाठ करते समय कवियों में आतंकवादियों, पाकिस्तान तथा भारत विरोधी गद्दारों के खिलाफ गुस्सा साफ झलक रहा था। कवि गोष्ठी की शुरुआत युवा कवि व हिन्दी के प्राध्यापक देवेन्द्र कुमार ‘अशंक’ ने उग्रवादियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए की।
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उन्होंने देश के गद्दारों के प्रति कहा कि ‘आतंकवाद से पहले गद्दारों को संवारो, जल रोको जल्लादों का, गोली के बदले गोले दागो।’ जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग जींद के जिला सलाहकार व कवि रणधीर मताना ने अपनी कविता के माध्यम से आह्वान किया कि ‘उठो धरा के वीर जवानो, पुन: नया निर्माण करो, खिल उठे फिर से जम्मू की वादियां, पहलगाम में फिर से ऐसा सुकाम करो।’
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रणधीर मताना ने अपनी दूसरी कविता में उग्रवाद व पाकिस्तान को कभी न भूलने वाला सबक सिखाने की बात कही तो मानावाली गांव के वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश पंचारिया ‘संस्कारी’ ने पहलगाम की घटना से दु:खी होकर व्याकुल मन से कहा ‘नित नयनों से पींघल-पींघल कर, मन की पीड़ा बरसे, पता नहीं घर लौटेगा भी, जो निकला है घर से।’
डॉ. पंचारिया ने पूरे जोश, किंतु दु:खी हृदय से चार कविताएं सुनाई। शिक्षक व कवि डॉ. सुदामा शास्त्री ने उग्रवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा ‘आतंकिस्तान के नापाक इरादों को कुचलना होगा, विषधर के विष को खाक में दफन करना होगा, मानवता के दुश्मनों को जहन्नुम में भेजना होगा।’ कार्यक्रम में अन्य लोगों, कवियों व विद्वानों के साथ-साथ राजीव धमीजा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सर्वजीत मान ने पहलगाम की घटना को दुखद व हिंसक बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आतंकवाद का कोई समाधान निकले। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार व यायावर छायाकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान ने कहा कि उग्रवाद देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पर ऐसा काला व दुखद धब्बा है जो भाइचारे व अहिंसा की जड़े खोखली कर रहा है। कोई भी उग्रवादी किसी भी धर्म का रक्षक हो ही नहीं सकता।

उसकी न कोई जात है, न धर्म, न उसके पास मानवता है, न समाज-देश के प्रति वफादारी। वह केवल राक्षस प्रवृति वाले ऐसे लोग हैं जो शांति व विकास में बड़े बाधक हैं। अंत में सर्वजीत मान ने सभी कवियों का धन्यवाद किया।
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