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असेसमेंट शीट मे किए गए डॉक्टरों के हस्ताक्षरों का भी होगा मिलान
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फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्रों को लेकर आए फर्जीवाड़े को लेकर जांच रिपोर्ट जल्द आने वाली है और इसको लेकर चौंकाने वाले खुलासे भी होंगे। कमेटी ने दिव्यांग प्रमाण पत्रों को लेकर लगभग जांच पूरी कर ली है और बताया जा रहा है कि संदिग्ध फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों को आंकड़ा एक हजार पार कर चुका है।
अब इस मामले में फाइनल रिपोर्ट आने वाली है हालांकि इससे पहले कमेटी असेसमेंट शीट में किए गए डॉक्टरों के हस्ताक्षरों की भी जांच करेगी और इसको लेकर मिलान होगा। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों से पूछा जाएगा कि असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर उनके हैं या नहीं। कमेटी डॉक्टरों के हस्ताक्षरों की भी जांच करेगी ताकि पता चल सके कि असेसमेंट शीट में जो हस्ताक्षर है वह सही है या नहीं या फिर इसमें भी फर्जीवाड़ा किया गया है। मेडिकल बोर्ड में फतेहाबाद के अलावा बाहर से भी डॉक्टर आते हैं। उच्च अधिकारी भी मान रहे हैं कि दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर फर्जीवाड़ा हुआ है और इसमें लापरवाही भी बरती गई है। ऐसे में कई अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा का पूरा खेल कंप्यूटर पर किया गया है।
ऐसे सामने आया है फर्जीवाड़ा
सरकार के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग दिव्यांग प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन कर रहा है। वेरिफिकेशन के दौरान दो मामले ऐसे सामने आए जिसमें गड़बड़ी मिली। दिव्यांग प्रमाण पत्र का एक मामला ऐसा था जिसमें ओपीडी में केस नहीं आया है और इसके बावजूद दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके अलावा एक अन्य केस में विशेषज्ञ ने 50 प्रतिशत दिव्यांग बताया गया लेकिन उसकी जगह 100 फीसदी का दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पोर्टल पर असेसमेंट शीट ही अपलोड नहीं की गई। ये दो मामले सामने आने के बाद फर्जीवाड़ा का शक हुआ और सिविल सर्जन ने छह डॉक्टरों की कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए। जांच में अब तक सामने आ चुका है कि जिन दिव्यांग प्रमाण पात्रों में गड़बड़ी की गई उनकी असेसमेंट शीट ही अपलोड नहीं की गई। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग कर दी गई या फिर धुंधला करके पोर्टल पर चढ़ा दिया गया। दिव्यांग प्रमाण पत्र को वर्ष 2019 में ऑनलाइन किया गया था। इसके बाद ही दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर फर्जीवाड़ा शुरू हुआ।
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कोट
दिव्यांग प्रमाण पात्रों की जांच में काफी कमियां मिली है। अभी हस्ताक्षर की परेशानी है। मेडिकल बोर्ड में कई डॉक्टर है जो कि दूसरे जिले से भी आते है और यहां के भी है। उनसे भी हस्ताक्षर करवाने पड़ेंगे कि ये हस्ताक्षर उनके है या नहीं। एक या दो दिन में मामले में पूरी जांच रिपोर्ट आ जाएगी।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
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अब इस मामले में फाइनल रिपोर्ट आने वाली है हालांकि इससे पहले कमेटी असेसमेंट शीट में किए गए डॉक्टरों के हस्ताक्षरों की भी जांच करेगी और इसको लेकर मिलान होगा। मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों से पूछा जाएगा कि असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर उनके हैं या नहीं। कमेटी डॉक्टरों के हस्ताक्षरों की भी जांच करेगी ताकि पता चल सके कि असेसमेंट शीट में जो हस्ताक्षर है वह सही है या नहीं या फिर इसमें भी फर्जीवाड़ा किया गया है। मेडिकल बोर्ड में फतेहाबाद के अलावा बाहर से भी डॉक्टर आते हैं। उच्च अधिकारी भी मान रहे हैं कि दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर फर्जीवाड़ा हुआ है और इसमें लापरवाही भी बरती गई है। ऐसे में कई अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा का पूरा खेल कंप्यूटर पर किया गया है।
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ऐसे सामने आया है फर्जीवाड़ा
सरकार के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग दिव्यांग प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन कर रहा है। वेरिफिकेशन के दौरान दो मामले ऐसे सामने आए जिसमें गड़बड़ी मिली। दिव्यांग प्रमाण पत्र का एक मामला ऐसा था जिसमें ओपीडी में केस नहीं आया है और इसके बावजूद दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके अलावा एक अन्य केस में विशेषज्ञ ने 50 प्रतिशत दिव्यांग बताया गया लेकिन उसकी जगह 100 फीसदी का दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पोर्टल पर असेसमेंट शीट ही अपलोड नहीं की गई। ये दो मामले सामने आने के बाद फर्जीवाड़ा का शक हुआ और सिविल सर्जन ने छह डॉक्टरों की कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए। जांच में अब तक सामने आ चुका है कि जिन दिव्यांग प्रमाण पात्रों में गड़बड़ी की गई उनकी असेसमेंट शीट ही अपलोड नहीं की गई। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग कर दी गई या फिर धुंधला करके पोर्टल पर चढ़ा दिया गया। दिव्यांग प्रमाण पत्र को वर्ष 2019 में ऑनलाइन किया गया था। इसके बाद ही दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर फर्जीवाड़ा शुरू हुआ।
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दिव्यांग प्रमाण पात्रों की जांच में काफी कमियां मिली है। अभी हस्ताक्षर की परेशानी है। मेडिकल बोर्ड में कई डॉक्टर है जो कि दूसरे जिले से भी आते है और यहां के भी है। उनसे भी हस्ताक्षर करवाने पड़ेंगे कि ये हस्ताक्षर उनके है या नहीं। एक या दो दिन में मामले में पूरी जांच रिपोर्ट आ जाएगी।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन