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Fatehabad News: जिले में हर साल घट रही पशुओं की संख्या, दूध उत्पादन में आई 30 फीसदी की कमी
Sun, 31 May 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 31 May 2026 11:32 PM IST
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गांव बड़ोपल में बाड़े में रखी दुधारू गाय। स्रोत पशुपालक
फतेहाबाद। जिले में हर साल दुधारू पशुओं की संख्या घटती जा रही हैं। पांच साल में 50 हजार के करीब हजार दुधारू पशु कम हुए हैं। इससे दूध उत्पादन में भी करीब 30 फीसदी की कमी आई है। वहीं जमीन के रेट अधिक होने, सेम की समस्या और चारा महंगा होने के कारण पशुपालन करने वाले लोग भी इस कारोबार को छोड़ रहे हैं।
जिले में हर साल विकास के नाम पर कृषि की भूमि कम हो रही है और करीब 40 गांवों में सेम की समस्या से हरा व अन्य फसल नहीं उग रही है। इस कारण अधिकांश किसानों ने पशुपालन बंद कर दिया है। वहीं जो जमीन बची है उसमें भी धान, गेहूं समेत सब्जी की बुआई होती है। इस क्षेत्र में हरे चारे की बुआई नहीं होती।
चारा महंगा होने के कारण पशुपालन करने वाले लोगों की संख्या भी कम हो रही है। पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार जिले में 2019 में भैंस 234323, गाय 42,050, बकरी 15,146 थीं। इन पशुओं का पालन दूध के लिए किया जाता था। इनकी कुल संख्या 3,77,416 थी। पांच साल बाद 2025 की पशु गणना के अनुसार कुल पशुओं की संख्या करीब 3 लाख रह गई है।
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पशुपालक रोहताश, बलबीर सिंह, हरीराम और गुलाब आदि ने बताया कि इन दिनों दूध 70 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है लेकिन पशु को खाना, रखरखाव समेत खर्चे लगातार महंगे हो रहे हैं। इससे दूध की कीमत 100 रुपये से भी अधिक आ रही है। दूध बेचने के लिए पशुपालन करना घाटे का कारोबार है। इसके चलते पांच से दस भैंसों का पालन करके डेयरी चलाने वाले कारोबार बंद हो रहे हैं।
जिले के ग्रामीण इलाकों में दुधारू पशुओं की संख्या कम होने से 30 से 35 फीसदी दूध का उत्पादन कम हो गया है। कई गांवों में इन दिनों ग्रामीण भी बाजार से थैली का दूध खरीद रहे हैं।
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सेम की समस्या से पशुपालन हुआ मुश्किल
जिले के गांव चिंदड़, ढाबीकलां, जांडवाला बागड़, कुम्हारिया, खाराखेड़ी और शेखुपुर सहित 40 गांवों में सेम की समस्या बनी होने से जमीन बंजर हो चुकी है। ऐसे में पशुपालकों को भूसा व हरा चारा खरीदना पड़ता है और जमीन दलदल हो चुकी है जिससे पशुपालन महंगा हो गया है। मजबूरन पशुपालकों को पशुपालन छोड़ना पड़ा है। इससे दूध उत्पादन में आई कमी आई है।
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:: जिले में दुधारु पशुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। पशुओं की संख्या लगातार कम होने के पीछे कई कारण है। हालांकि दुधारू पशु पालन के लिए सरकार की कई योजनाएं चल रहीं हैं। उम्मीद है कि इससे पशुओं की संख्या में वृद्धि होगी।
- डॉ. रविंद्र भांभू, पशु सर्जन, फतेहाबाद।
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जिले में हर साल विकास के नाम पर कृषि की भूमि कम हो रही है और करीब 40 गांवों में सेम की समस्या से हरा व अन्य फसल नहीं उग रही है। इस कारण अधिकांश किसानों ने पशुपालन बंद कर दिया है। वहीं जो जमीन बची है उसमें भी धान, गेहूं समेत सब्जी की बुआई होती है। इस क्षेत्र में हरे चारे की बुआई नहीं होती।
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चारा महंगा होने के कारण पशुपालन करने वाले लोगों की संख्या भी कम हो रही है। पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार जिले में 2019 में भैंस 234323, गाय 42,050, बकरी 15,146 थीं। इन पशुओं का पालन दूध के लिए किया जाता था। इनकी कुल संख्या 3,77,416 थी। पांच साल बाद 2025 की पशु गणना के अनुसार कुल पशुओं की संख्या करीब 3 लाख रह गई है।
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पशुपालक रोहताश, बलबीर सिंह, हरीराम और गुलाब आदि ने बताया कि इन दिनों दूध 70 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है लेकिन पशु को खाना, रखरखाव समेत खर्चे लगातार महंगे हो रहे हैं। इससे दूध की कीमत 100 रुपये से भी अधिक आ रही है। दूध बेचने के लिए पशुपालन करना घाटे का कारोबार है। इसके चलते पांच से दस भैंसों का पालन करके डेयरी चलाने वाले कारोबार बंद हो रहे हैं।
जिले के ग्रामीण इलाकों में दुधारू पशुओं की संख्या कम होने से 30 से 35 फीसदी दूध का उत्पादन कम हो गया है। कई गांवों में इन दिनों ग्रामीण भी बाजार से थैली का दूध खरीद रहे हैं।
सेम की समस्या से पशुपालन हुआ मुश्किल
जिले के गांव चिंदड़, ढाबीकलां, जांडवाला बागड़, कुम्हारिया, खाराखेड़ी और शेखुपुर सहित 40 गांवों में सेम की समस्या बनी होने से जमीन बंजर हो चुकी है। ऐसे में पशुपालकों को भूसा व हरा चारा खरीदना पड़ता है और जमीन दलदल हो चुकी है जिससे पशुपालन महंगा हो गया है। मजबूरन पशुपालकों को पशुपालन छोड़ना पड़ा है। इससे दूध उत्पादन में आई कमी आई है।
:: जिले में दुधारु पशुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। पशुओं की संख्या लगातार कम होने के पीछे कई कारण है। हालांकि दुधारू पशु पालन के लिए सरकार की कई योजनाएं चल रहीं हैं। उम्मीद है कि इससे पशुओं की संख्या में वृद्धि होगी।
- डॉ. रविंद्र भांभू, पशु सर्जन, फतेहाबाद।