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दोपहर तक छाई धुंध, पेड़ों से टपकती रहीं ओस की बूंदें

Sun, 14 Feb 2021 12:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2021 12:02 AM IST
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The mist kept on till noon
शनिवार सुबह 10 बजे हाईवे पर छाई धुध से गुजरती कार। - फोटो : Fatehabad
पिछले चार दिन से आ रही धुंध का शनिवार को सबसे ज्यादा प्रभाव रहा। अनुमान है कि इस सीजन की यह सबसे ज्यादा खतरनाक धुंध थी। हालांकि ठंड कम महसूस हो रही थी मगर धुंध का प्रकोप जबरदस्त था। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। धुंध में नमी की मात्रा बहुत ज्यादा रहती है इसलिए पेड़ों से ओस की बूंदें बारिश की तरह टपकती हैं। सड़कें सुबह ऐसी होती है जैसे ताजा बारिश हुई है। शनिवार को दोपहर 12 बजे के बाद मौसम साफ हुआ। उससे पहले खूब धुंध थी। जनवरी के अंतिम सप्ताह में धुंध आनी लगभग बंद हो गई थी। इसके बाद धूप बढ़ने लगी और धीरे धीरे तापमान में बढ़ोतरी हो रही थी। अब पिछले चार दिन से सुबह दोबारा धुंध आ रही है। तीन दिन तक धुंध तो आई लेकिन 10 बजे के बाद मौसम साफ हो जाता है और रात को धुंध नहीं होती। शुक्रवार की रात को भी खूब धुंध आई। शाम को करीब छह बजे धुंध आनी शुरू हो गई। देखते ही देखते चारों तरफ धुंध छा गई और सड़कों पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। कहीं कहीं पर पेड़ों और मकानों के आसपास धुंध कम थी लेकिन जहां दोनों तरफ खेत थे वहां पर जबरदस्त धुंध थी। दस फुट आगे भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार एकदम थम गई। रात को कई जगहों पर वाहनों में भिड़ंत भी हुई लेकिन कहीं बड़ा नुकसान नहीं हुआ। गांव भूथनकलां के पास ट्राली से टक्कर लगने के कारण एक बाइक सवार घायल हो गया। इसके अलावा अहरवां के पास एक बाइक का संतुलन बिगड़ गया और खेतों में जा गिरी। हालांकि किसी को चोट नहीं लगी।
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इस धुंध में मुख्य मार्गों की बजाय लिंक मार्गों पर ज्यादा खतरा रहता है। वजह ये है कि हाइवे पर सफेद पट्टी बनी होती है, जिस पर वाहन की लाइट लगने से रास्ता दिख जाता है और मोड़ आदि का पता चल जाता है। लिंक मार्गों पर खतरा ज्यादा रहता है। सफेद पट्टी होती नहीं है और रोड संकरी होते हैं। ऐसे में सामने से आ रहे वाहन से टकराने की संभावना ज्यादा रहती है। कई बार वाहन पीछे से टकरा जाते हैं।
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धुंध में हादसों का खतरा बढ़ जाता है। जिन वाहनों के पीछे लाइट नहीं है उन्हें रिफलेक्टर लगवाना चाहिए। खासकर, साइकिल, ट्राली, बैल गाड़ी जैसे वाहनों पर रिफलेक्टर जरूरी है ताकि पीछे आ रहे वाहन चालक को दिखाई दे सके। -राजेश कुमार, एसपी।
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