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Fatehabad News: भगवान विश्वकर्मा की महिमा का किया गुणगान
Wed, 22 Oct 2025 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 22 Oct 2025 10:32 PM IST
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विश्वकर्मा दिवस पर आयोजित हवन में भाग लेते मंदिर कमेटी व अन्य। संवाद
टोहाना। भूना रोड स्थित भगवान विश्वकर्मा मंदिर परिसर में विश्वकर्मा डे के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके तहत सबसे पहले हवन आयोजित किया गया।
मंदिर कमेटी के प्रधान के नेतृत्व में सभी कार्यकारिणी व अन्य लोगों ने पूर्ण आहुति डालकर क्षेत्र की सुख शांति की कामना की। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की महिमा का गुणगान किया गया। कार्यक्रम में नगर परिषद चेयरमैन नरेश बंसल ने शिरकत की और लंगर का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। वक्ताओं ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र ने नाराज होकर गोकुल पर भारी बारिश की तो भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की थी। यह पूजा अहंकार पर भक्ति और प्रकृति की शक्ति की विजय का प्रतीक है।
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प्रधान बलवान जांगड़ा, महासचिव चंद्रभान जांगड़ा व कैशियर संजय धीमान ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण, परिश्रम और कौशल के प्रतीक हैं। भारत की संस्कृति में श्रम को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और भगवान विश्वकर्मा हमें यह सिखाते हैं कि श्रम ही सच्ची पूजा है, कर्म ही धर्म है। मेहनतकश लोगों के हाथों में देश की प्रगति और विकास की असली शक्ति निहित है।
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मंदिर कमेटी के प्रधान के नेतृत्व में सभी कार्यकारिणी व अन्य लोगों ने पूर्ण आहुति डालकर क्षेत्र की सुख शांति की कामना की। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की महिमा का गुणगान किया गया। कार्यक्रम में नगर परिषद चेयरमैन नरेश बंसल ने शिरकत की और लंगर का शुभारंभ किया।
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कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। वक्ताओं ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र ने नाराज होकर गोकुल पर भारी बारिश की तो भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की थी। यह पूजा अहंकार पर भक्ति और प्रकृति की शक्ति की विजय का प्रतीक है।
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प्रधान बलवान जांगड़ा, महासचिव चंद्रभान जांगड़ा व कैशियर संजय धीमान ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण, परिश्रम और कौशल के प्रतीक हैं। भारत की संस्कृति में श्रम को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और भगवान विश्वकर्मा हमें यह सिखाते हैं कि श्रम ही सच्ची पूजा है, कर्म ही धर्म है। मेहनतकश लोगों के हाथों में देश की प्रगति और विकास की असली शक्ति निहित है।