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Fatehabad News: करोड़ों रुपये की लागत से तैयार फुटबाल मैदान हो गया वीरान
Sat, 28 Sep 2024 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 28 Sep 2024 10:16 PM IST
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फतेहाबाद के गांव दरियापुर में बना फुटबाल मैदान।
फतेहाबाद। जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर स्थित गांव दरियापुर में बनाया गया पूरे उत्तर भारत का एकमात्र अंतरराष्ट्रीयस्तर का सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ फुटबाल मैदान वीरान पड़ा है। इस फुटबाल मैदान का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने करोड़ों रुपये की लागत से किया था। निर्माण के बाद इस अकादमी को खेल विभाग को सौंपा जाना था, लेकिन नौ साल बाद भी ऐसा नहीं हो सका है।
यहां पर राष्ट्रीयस्तर की फुटबाल अकादमी और छात्रावास भी बनना था। फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन बजट के अभाव में छात्रावास बनाने का काम अधूरा है। देखरेख के अभाव में स्टेडियम बदहाल हो चुका है। स्टेडियम की दीवार कई जगह से टूट चुकी है। फुटबाल रैक अपने स्थान से दूर पड़ा है।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2012 में गांव दरियापुर में सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ फुटबाल मैदान की घोषणा की थी। पूर्व केंद्रीय खेल एवं युवा राज्य मंत्री अजय माकन ने इसका शिलान्यास किया था। करीब तीन साल बाद 2015 में तीन करोड़ रुपये की लागत से फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन छात्रावास नहीं बन सका। इस कारण यहां राष्ट्रीयस्तर की फुटबाल अकादमी नहीं बन सकी।
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इस कारण यहां फुटबाल के बजाय ग्रामीण क्रिकेट और अन्य खेलों का अभ्यास करते हैं। गांव के आसपास के युवा यहां पर सेना और अन्य रक्षा बलों में भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ भी लगाते हैं। पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत साल 2020 में इस गांव को गोद लिया था। इसके बावजूद गांव का समुचित विकास नहीं हो सका। संवाद
टूटा गोल पोस्ट, झुकी ग्रिल
फुटबाल मैदान में लगा गोल पोस्ट टूट गया है। इस मैदान के चारों ओर लगाई गई जाली भी गायब हो चुकी है। सुरक्षा के लिए लगाई गई इसकी ग्रिल भी झुककर गिरने के कगार पर है। देखभाल न होने के कारण मैदान की चहारदीवारी भी टूट गई है। मैदान के आसपास पशु बैठे रहते हैं। इस कारण यहां गंदगी हो जाती है। इसकी कभी सफाई भी नहीं हो पाती।
पंचायत ने कई बार किए व्यवस्था सुधारने के प्रयास
ग्राम पंचायत ने कई बार व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए, लेकिन प्रशासन और सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया। खेल विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह स्टेडियम उनके पास नहीं है। लोग कई बार उपायुक्त से इस मैदान की व्यवस्था सुधारने की मांग कर चुके हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना में शामिल होने के बावजूद तत्कालीन विधायक और सांसद भी इसका काम पूरा नहीं करवा सके। - सुरेश कंबोज, सरपंच प्रतिनिधि।
स्टेडियम को बनाकर छोड़ दिया गया। उसके बाद इसका रखरखाव नहीं किया गया। इस स्टेडियम में कोई प्रशिक्षक भी तैनात नहीं है। गांव के बच्चे खाली मैदान में क्रिकेट और अन्य खेल खेलते हैं। सरकार और जनप्रतिनिधियों को इसे पूरा कराना चाहिए।
- दलीप, ग्रामीण।
स्टेडियम में सफाई रहे। इसके लिए गांव के युवाओं ने पंचायत के सहयोग से काफी प्रयास किए लेकिन संसाधनों के अभाव में प्रयास सफल नहीं हो सके। स्टेडियम को पूर्णता दिलाने के लिए शासन, प्रशासन या विभाग सार्थक प्रयास नहीं कर रहा है।
- ओमप्रकाश, ग्रामीण।
यह स्टेडियम बनते समय गांव के युवाओं में जोश था। प्रशिक्षण के लिए काफी समय तक संसाधनों का इंतजार रहा लेकिन करीब नौ साल बाद भी प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हो सका। पंचायत ने कई बार मैदान के हालात सुधारने के लिए प्रयास भी किए। - राकेश, युवा।
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यहां पर राष्ट्रीयस्तर की फुटबाल अकादमी और छात्रावास भी बनना था। फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन बजट के अभाव में छात्रावास बनाने का काम अधूरा है। देखरेख के अभाव में स्टेडियम बदहाल हो चुका है। स्टेडियम की दीवार कई जगह से टूट चुकी है। फुटबाल रैक अपने स्थान से दूर पड़ा है।
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तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2012 में गांव दरियापुर में सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ फुटबाल मैदान की घोषणा की थी। पूर्व केंद्रीय खेल एवं युवा राज्य मंत्री अजय माकन ने इसका शिलान्यास किया था। करीब तीन साल बाद 2015 में तीन करोड़ रुपये की लागत से फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन छात्रावास नहीं बन सका। इस कारण यहां राष्ट्रीयस्तर की फुटबाल अकादमी नहीं बन सकी।
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इस कारण यहां फुटबाल के बजाय ग्रामीण क्रिकेट और अन्य खेलों का अभ्यास करते हैं। गांव के आसपास के युवा यहां पर सेना और अन्य रक्षा बलों में भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ भी लगाते हैं। पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत साल 2020 में इस गांव को गोद लिया था। इसके बावजूद गांव का समुचित विकास नहीं हो सका। संवाद
टूटा गोल पोस्ट, झुकी ग्रिल
फुटबाल मैदान में लगा गोल पोस्ट टूट गया है। इस मैदान के चारों ओर लगाई गई जाली भी गायब हो चुकी है। सुरक्षा के लिए लगाई गई इसकी ग्रिल भी झुककर गिरने के कगार पर है। देखभाल न होने के कारण मैदान की चहारदीवारी भी टूट गई है। मैदान के आसपास पशु बैठे रहते हैं। इस कारण यहां गंदगी हो जाती है। इसकी कभी सफाई भी नहीं हो पाती।
पंचायत ने कई बार किए व्यवस्था सुधारने के प्रयास
ग्राम पंचायत ने कई बार व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए, लेकिन प्रशासन और सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया। खेल विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह स्टेडियम उनके पास नहीं है। लोग कई बार उपायुक्त से इस मैदान की व्यवस्था सुधारने की मांग कर चुके हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना में शामिल होने के बावजूद तत्कालीन विधायक और सांसद भी इसका काम पूरा नहीं करवा सके। - सुरेश कंबोज, सरपंच प्रतिनिधि।
स्टेडियम को बनाकर छोड़ दिया गया। उसके बाद इसका रखरखाव नहीं किया गया। इस स्टेडियम में कोई प्रशिक्षक भी तैनात नहीं है। गांव के बच्चे खाली मैदान में क्रिकेट और अन्य खेल खेलते हैं। सरकार और जनप्रतिनिधियों को इसे पूरा कराना चाहिए।
- दलीप, ग्रामीण।
स्टेडियम में सफाई रहे। इसके लिए गांव के युवाओं ने पंचायत के सहयोग से काफी प्रयास किए लेकिन संसाधनों के अभाव में प्रयास सफल नहीं हो सके। स्टेडियम को पूर्णता दिलाने के लिए शासन, प्रशासन या विभाग सार्थक प्रयास नहीं कर रहा है।
- ओमप्रकाश, ग्रामीण।
यह स्टेडियम बनते समय गांव के युवाओं में जोश था। प्रशिक्षण के लिए काफी समय तक संसाधनों का इंतजार रहा लेकिन करीब नौ साल बाद भी प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हो सका। पंचायत ने कई बार मैदान के हालात सुधारने के लिए प्रयास भी किए। - राकेश, युवा।