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Fatehabad News: जिले में पिछले साल की तुलना में पराली जलाने के मामले कम आए
Tue, 18 Nov 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 18 Nov 2025 11:20 PM IST
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फतेहाबाद के माजरा रोड पर पराली प्रबंधन करके रखी गांठें। संवाद
फतेहाबाद। जिले में धान की कटाई का काम अंतिम चरण में है। दूसरी तरफ खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामले भी आ रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की सख्ती और किसानों की जागरूकता के चलते मामलों में पिछले साल के मुकाबले काफी कमी आई है। सोमवार को जिले में फसल अवशेष जलाने की एक नई लोकेशन भूना खंड से प्राप्त हुई है, जिस पर कृषि एवं कल्याण विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिले में इस वर्ष 3 लाख 70 हजार एकड़ में धान की बिजाई हुई थी। कृषि विभाग के अनुसार, इसमें से जिले में अब तक लगभग 95 फीसदी धान की कटाई और पराली प्रबंधन का काम पूरा हो चुका है। किसानों ने इस बार पराली को खेत में ही मिलाया है या बेलर से गांठें बनवाकर बेची है। पराली प्रबंधन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
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83 में से 46 लोकेशन निकली गलत
प्रशासन को हरसेक से फसल अवशेष जलाने की अब तक कुल 83 लोकेशन मिली हैं। इनमें से मौके पर जाकर जांच करने पर 46 लोकेशन गलत पाई गई। कई बार खेत में मिट्टी या अन्य कारण से धुआं उठने को भी सैटेलाइट पराली जलाने की घटना मान लेता है। हालांकि, विभाग हर लोकेशन की गंभीरता से जांच कर रहा है। इससे कृषि विभाग के कर्मचारियों को काफी मेहनत करनी पड़ी।
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36 किसानों पर जुर्माना, कम हुई एफआईआर
फसल अवशेष जलाने के मामले में प्रशासन ने अब तक 36 किसानों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पिछले साल 106 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि इस साल यह 36 है। प्रशासन की मॉनिटरिंग और जागरूकता अभियान रंग ला रहा है। प्रशासन का दावा है कि अगले वर्ष तक फसल अवशेष जलाने के मामले पूरी तरह से बंद हो जाएंगे।
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:: जिले में पराली प्रबंधन के लिए टीमें बनाकर खेतों में लगातार गश्त करवाई गई हैं। किसानों से अपील है की वे भी पराली न जलाएं और इसके प्रबंधन के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता और वातावरण शुद्ध बने रहेंगे।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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जिले में इस वर्ष 3 लाख 70 हजार एकड़ में धान की बिजाई हुई थी। कृषि विभाग के अनुसार, इसमें से जिले में अब तक लगभग 95 फीसदी धान की कटाई और पराली प्रबंधन का काम पूरा हो चुका है। किसानों ने इस बार पराली को खेत में ही मिलाया है या बेलर से गांठें बनवाकर बेची है। पराली प्रबंधन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
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83 में से 46 लोकेशन निकली गलत
प्रशासन को हरसेक से फसल अवशेष जलाने की अब तक कुल 83 लोकेशन मिली हैं। इनमें से मौके पर जाकर जांच करने पर 46 लोकेशन गलत पाई गई। कई बार खेत में मिट्टी या अन्य कारण से धुआं उठने को भी सैटेलाइट पराली जलाने की घटना मान लेता है। हालांकि, विभाग हर लोकेशन की गंभीरता से जांच कर रहा है। इससे कृषि विभाग के कर्मचारियों को काफी मेहनत करनी पड़ी।
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36 किसानों पर जुर्माना, कम हुई एफआईआर
फसल अवशेष जलाने के मामले में प्रशासन ने अब तक 36 किसानों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पिछले साल 106 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि इस साल यह 36 है। प्रशासन की मॉनिटरिंग और जागरूकता अभियान रंग ला रहा है। प्रशासन का दावा है कि अगले वर्ष तक फसल अवशेष जलाने के मामले पूरी तरह से बंद हो जाएंगे।
:: जिले में पराली प्रबंधन के लिए टीमें बनाकर खेतों में लगातार गश्त करवाई गई हैं। किसानों से अपील है की वे भी पराली न जलाएं और इसके प्रबंधन के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता और वातावरण शुद्ध बने रहेंगे।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।