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Fatehabad News: कथा में राम जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु हुए भाव विह्वल
Sat, 21 Mar 2026 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:53 PM IST
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भूना में कथा के दौरान मौजूद श्रद्वालु स्त्रोत आयोजक
भूना। बाबा राणाधीर मंदिर में शनिवार को साध्वी करुणा गिरी ने भगवान श्रीराम के दिव्य अवतरण और उनकी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का आरंभ करते हुए उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर पाप, अत्याचार और अधर्म बढ़ गया तब देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से पृथ्वी की रक्षा की प्रार्थना की।
इसके बाद भगवान विष्णु ने अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के यहां श्रीराम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बताया कि राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ पूर्ण होने पर प्राप्त दिव्य खीर को कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांटा गया। समय आने पर चैत्र मास की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही पूरी सृष्टि आनंद से भर उठी और अयोध्या नगरी उत्सवमय हो गई।
साध्वी करुणा गिरी ने कहा कि श्रीराम का अवतार केवल एक राजा के पुत्र के रूप में नहीं बल्कि धर्म की स्थापना और मानवता को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाने के लिए हुआ था। भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि सच्चा सुख धर्म और कर्तव्य पालन में ही निहित है। बाल्यकाल से ही श्रीराम करुणा, दया, सत्य, संयम और अनुशासन के प्रतीक थे। उनका स्वभाव इतना मधुर था कि अयोध्या की प्रजा उन्हें अत्यंत प्रेम करती थी।
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उन्होंने युवाओं को श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर कमेटी के प्रधान ओमप्रकाश, वीरेंद्र शर्मा, नंदलाल, राजू गिरधर, मास्टर मंगलराम, हरविंदर बागड़ी, अनिल सोनी आदि उपस्थित रहे।
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इसके बाद भगवान विष्णु ने अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के यहां श्रीराम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बताया कि राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ पूर्ण होने पर प्राप्त दिव्य खीर को कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांटा गया। समय आने पर चैत्र मास की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही पूरी सृष्टि आनंद से भर उठी और अयोध्या नगरी उत्सवमय हो गई।
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साध्वी करुणा गिरी ने कहा कि श्रीराम का अवतार केवल एक राजा के पुत्र के रूप में नहीं बल्कि धर्म की स्थापना और मानवता को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाने के लिए हुआ था। भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि सच्चा सुख धर्म और कर्तव्य पालन में ही निहित है। बाल्यकाल से ही श्रीराम करुणा, दया, सत्य, संयम और अनुशासन के प्रतीक थे। उनका स्वभाव इतना मधुर था कि अयोध्या की प्रजा उन्हें अत्यंत प्रेम करती थी।
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उन्होंने युवाओं को श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर कमेटी के प्रधान ओमप्रकाश, वीरेंद्र शर्मा, नंदलाल, राजू गिरधर, मास्टर मंगलराम, हरविंदर बागड़ी, अनिल सोनी आदि उपस्थित रहे।