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Fatehabad News: दिव्यांग की गर्दन काटकर बेरहमी से हत्या करने के दोषी भाई को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

Thu, 16 Jan 2025 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 16 Jan 2025 11:00 PM IST
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The court sentenced the brother guilty of brutally killing a handicapped person by cutting his neck to death
भाई की हत्या का दोषी अशोकफाइल फोटो - फोटो : इटावा रेलवे स्टेशन पर खिलाड़ी मनीष का स्वागत करते शिक्षक।
फतेहाबाद। टोहाना में बेरहमी से छोटे 40 वर्षीय दिव्यांग भाई दीपक की गला काटकर हत्या करने के दोषी भाई अशोक को वीरवार को फतेहाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक अग्रवाल की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना है।
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पुलिस के अनुसार आरोपी ने 17 जून 2020 को मकान के झगड़े में दिव्यांग भाई की गला काटकर हत्या कर दी थी। फिर उसकी गर्दन एक थैले में डालकर अपने साथ ले गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया था कि उसने सिर को भाखड़ा नहर टोहाना में फेंक दिया था। पुलिस ने सर्च अभियान चलाया लेकिन लेकिन सिर बरामद नहीं हुआ था।
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अदालत ने इस मामले में वीरवार को फैसला सुनाते हुए धारा 302 में फांसी और 20 हजार रुपये जुर्माना, 457, 506, 201 धारा में 5-5 साल कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला उप न्यायवादी अरुण कुमार द्वारा पैरवी की गई। जिला न्यायवादी देवेंद्र मित्तल ने बताया कि इस मामले में पंजाब के संगरूर निवासी सुषमा देवी पत्नी मनजीत सिंह ने बयान दर्ज करवाए थे। सुषमा के अनुसार उसके भाई अशोक ने छोटे भाई दीपक की रंजिशन तेजधार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी है।
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पुलिस को दी शिकायत में शिकायतकर्ता सुषमा ने बताया था कि वे छह भाई-बहन हैं, जिनमें दो भाइयों की मौत हो चुकी है। उसका छोटा भाई 40 वर्षीय दीपक दिव्यांग है और उसका तलाक हो चुका है। वह अपनी मां के पास टोहाना की गुगामेड़ी के पास रहता था। मां ने 10 साल पहले अपना मकान दीपक के नाम करवा दिया। इस बात से उसका दूसरा भाई अशोक रंजिश रखता था और कई बार उसे मारने की बात कह चुका था।
शिकायतकर्ता अनुसार गांव डांगरा निवासी सुरजीत उसके भाई दीपक का धर्म भाई बना हुआ था। 18 जून 2020 को सुरजीत ने उसे फोन कर बताया कि 17 जून को वह दीपक के घर था, तब अशोक आया और उसके सामने बैठकर शराब पी, जिसके बाद वह अपने गांव आ गया। 18 तारीख को सुबह वह दीपक के घर पहुंचा तो दरवाजे नहीं खुल रहे। जिस पर सुषमा अपने पति के साथ मौके पर पहुंची और पुलिस को सूचित किया।
शिकायतकर्ता अनुसार जब दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो घर के बरामदे में भाई दीपक का शव खून से लथपथ बिना सिर के मिला। तेजधार हथियार से हत्या कर उसकी गर्दन काटी गई थी। सुषमा ने अपने भाई अशोक पर ही हत्या करने और सिर साथ ले जाने के आरोप जड़े थे। घर में लगे कैमरों की डीवीआर भी गायब थी। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। अब अदालत ने इसी मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई है।

न्यायाधीश की टिप्पणी- दोषी में कोई मानवता नहीं थी
सेशन जज दीपक अग्रवाल ने अपने फैसले में लिखा है कि आरोपी ने अपने दिव्यांग भाई दीपक पर सुनियोजित और निर्दयी तरीके से हमला किया, जो अब मर चुका है। अपराध स्थल पर खून का एक तालाब और शव के चारों ओर खून का फव्वारा देखा गया, जैसा कि फोटोग्राफ्स अपराधस्थल की यात्रा रिपोर्ट से स्पष्ट है, जो उसके भाई के खिलाफ क्रूर और अमानवीय तरीके से किए गए हमले को और भी दर्शाता है। अपने आप में अपराध को निस्संदेह अत्यंत क्रूर, विचित्र, शैतानी, विद्रोही या नृशंस तरीके से किया गया, ताकि समुदाय का तीव्र और अत्यधिक आक्रोश पैदा हो सके के रूप में वर्णित किया जा सकता है। वह पहले से ही योजना बनाकर धारदार हथियार यानी काप से लैस था और उसने व्हील-चेयर पर अकेले रह रहे अपने भाई दीपक उर्फ दीप की काप से लगातार वार करके हत्या कर दी ताकि वह संबंधित घर पर कब्जा कर सके। दोषी ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया, काप, सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर और घर की चाबी के साथ उसे ले गया और सबूत मिटाने के लिए नहर में फेंक दिया। अपने भाई की हत्या करते समय दोषी द्वारा प्रदर्शित भयानक और चरम आपराधिकता ने न केवल न्यायिक विवेक को बल्कि समाज के सामूहिक विवेक को भी झकझोर दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि दोषी में कोई बुनियादी मानवता नहीं थी और किसी भी सुधार के लिए मानसिकता और मानसिकता का पूरी तरह से अभाव था। दोषी का घिनौना और शैतानी कृत्य निश्चित रूप से इस मामले को दुर्लभतम से दुर्लभतम मामले की श्रेणी में रखता है। इस प्रकार, दोषी को मृत्युदंड की चरम सजा के अलावा कुछ भी नहीं मिलना चाहिए। दोषी के विद्वान वकील द्वारा तथ्यात्मक स्थिति में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की दलील बहुत ही गलत है। इतना ही नहीं, इस जघन्य कृत्य के लिए कोई पश्चाताप न दिखाते हुए, उसने अपने परिचित को मोबाइल फोन पर कॉल करके घोषणा की कि उसने लड़ाई जीत ली है (मोर्चा फतेह कर दिया है)। ऊपर की गई चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि गंभीर परिस्थितियां कम करने वाली परिस्थितियों से अधिक हैं। इस प्रकार, इस न्यायालय की सुविचारित राय में, दोषसिद्धि ने अत्यधिक भ्रष्टता का अनुपात ग्रहण कर लिया है जिसके लिए विशेष कारणों को वैध रूप से मौजूद कहा जा सकता है।
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