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Fatehabad News: केंद्र सरकार नहीं मानने वाली, 4-5 माह और चलेगा आंदोलन

Sat, 04 Jan 2025 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 04 Jan 2025 11:10 PM IST
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The central government is not going to agree, the agitation will continue for 4-5 more months
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले किसानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देती महिला किसान। संव - फोटो : चोरी के लिए तोड़ा गया ताला।
टोहाना। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले टोहाना की एडिशनल अनाज मंडी में शनिवार को किसानों की महापंचायत हुई। इसमें आसपास के जिलों से पंजाब से भी करीब 10 हजार से अधिक किसान पहुंचे। इस महापंचायत को लेकर पूरे दिन जिला प्रशासन अलर्ट रहा।
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एसडीएम प्रतीक हुड्डा, ट्रेनी आईएएस अशोक कुमार, डीएसपी उमेद सिंह व बीएसएफ के डीएसपी भी महापंचायत के दौरान मौजूद रहे। इसके अलावा तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए, जिसमें नायब तहसीलदार रोहित कौशिक के साथ बीएसएफ के डीएसपी, कृषि विभाग के एसडीओ मुकेश मेहला के साथ फतेहाबाद डीएसपी जयपाल सिंह, कृषि विभाग के एसएमएस के साथ शहर थाना प्रभारी को लगाया गया।
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इसके अलावा बीएसएफ व हरियाणा पुलिस के जवान अनाज मंडी के पास मौजूद रहे ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। गुप्तचर विभाग के भी कर्मचारी सिविल वर्दी में तैनात रहे। जो पल-पल की रिपोर्ट आला अधिकारियों को देते रहे। महापंचायत के दौरान शहर थाना पुलिस, सीआईए, सदर थाना पुलिस व पुलिस लाइन से बुलाए गए कर्मचारियों सहित 260 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रखे गए।
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महापंचायत को देखते हुए जींद, हिसार, उकलाना, नरवाना, बरवाला, उचाना, जुलाना, सफीदों से आने वाले किसानों को हिसार रोड पर बाईपास से रतिया रोड अनाज मंडी के पास भेजा गया ताकि शहर में स्थिति खराब न हो। इसके अलावा पंजाब से आने वाले किसान शहर के विभिन्न रास्तों से होते हुए अनाज मंडी में पहुंचे। किसानों के लिए चाय व ब्रेड पकोड़े की व्यवस्था की गई। महापंचायत में महिलाओं की भी काफी भागीदारी रही।

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दो शेड और खुले आसमान के नीचे की गई बैठने की व्यवस्था

महापंचायत के दौरान दो शेड और खुले आसमान के नीचे किसानों के बैठने के लिए व्यवस्था की गई। किसान करीब 360 बसों, 80 ट्रैक्टर ट्रॉलियों और 100 से अधिक गाड़ियों व बाइकों पर सवार होकर महापंचायत में भाग लेने के लिए पहुंचे। शेड व खुले आसमान के नीचे पंडाल में बैठने वाले किसानों के अतिरिक्त काफी संख्या में किसान एडिशनल अनाज मंडी के अलग-अलग हिस्से में घूमते रहे। वक्ताओं ने आमरण अनशन पर बैठे सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल की बिगड़ रही स्वास्थ्य की स्थिति पर भी गंभीर चिंता प्रकट की।

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बिहार के किसान हरियाणा में मजदूरी करते हैं क्योंकि वहां मंडी खत्म हो गई

राष्ट्रीय किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि टोहाना आंदोलन की धरती है। टोहाना में जोगिंद्र उग्राहां के नेतृत्व में पहले आंदोलन चला तो हमें थाने में ही रहना पड़ा था। अब दिल्ली की बैठक की भी तैयारी जल्दी करनी पड़ेगी क्योंकि अगला किसान आंदोलन दिल्ली के अंदर नहीं केएमपी पर होगा। केएमपी को बंद करने के बाद पूरी दिल्ली बंद हो जाएगी। आंदोलन की रूपरेखा वे संयुक्त किसान मोर्चा को देंगे। एमएसपी गारंटी कानून के लिए पूरे देश के किसान को एक विचारधारा बनानी पड़ेगी। सरकार से यही मांग है कि फसल की खरीद एमएसपी पर की जाए, इससे कम खरीद न की जाए। टिकैत ने कहा कि बिहार के लोग मजदूरी करने के लिए हरियाणा आते हैं। इसका कारण यह है कि बिहार में मंडियां खत्म हो गई हैं। वहां धान चावल का रेट 800 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। किसानों को वहां मजदूरी का रेट नहीं मिलता, इसलिए उन्हें यहां मजदूरी के लिए आना पड़ता है।

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डल्लेवाला साहब को कुछ हुआ तो शव भी नहीं देगी कमेटी

टिकैत ने कहा कि खनौरी बॉर्डर पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की मदद केंद्र सरकार ही कर सकती है, हम नहीं क्योंकि सरकार किसानों की मांग को मानें तो वे आंदोलन खत्म कर सकते हैं। सिख समाज शहादत से पीछे नहीं हटता। यदि डल्लेवाल साहब को कुछ हुआ तो वहां की कमेटी के लोग उनके शव को भी नहीं देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई है, लेकिन सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है। खनौरी बॉर्डर का यह आंदोलन 4 से 5 महीने और चलेगा, सरकार इससे पहले मानने वाली नहीं है।

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किसानों को एकता बनाने की जरूरत : जोगेंद्र सिंह उग्राहां

किसान नेता जोगेंद्र सिंह उग्राहां ने किसानों को संबोधित करते कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 25 नवंबर को जो मसौदा जारी किया गया है, उससे अनाज का व्यापार काॅरपोरेट के हाथ में चला जाएगा। विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के खिलाफ तीखी और बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। आज के दिन किसानों को एकता बनाकर संघर्ष करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृषि विपणन के राष्ट्रीय प्रारुप के मसौदे को केंद्र सरकार तुरंत वापस लें और संगठनों से वार्तालाप शुरू करें।

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10 जनवरी तक अस्वीकार करके प्रस्ताव भेजें ग्राम पंचायत

महापंचायत में कामरेड इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कृषि मंडी के राष्ट्रीय प्रारूप के मसौदे को एक स्वर से अस्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों से आग्रह किया कि वह सभी इस प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए 10 जनवरी तक केंद्र सरकार को भेजें ताकि किसानों की मांग मजबूत हो सके।

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आने वाला किसान आंदोलन सहन नहीं कर पाएंगी सरकारें : कमलजीत

हरियाणा एकता उग्राहां के प्रदेशाध्यक्ष मास्टर कमलजीत ने कहा कि संयुक्त किसान ऐसा मोर्चा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर बड़ा मजबूत है। सुबह से पड़ रहे कड़ाके के कोहरे के बीच हरियाणा में कोई 200 किलोमीटर तो कोई 300 किलोमीटर से टोहाना पहुंचे हैं। हरियाणा और पंजाब में धान के हालात हमने देखे हैं। सरकार कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है, हमें स्वामीनाथन सीटू पल्स का फार्मूला नहीं आता। हम इस नीति और दिल्ली की नीति को अस्वीकार करते हैं। दोनों सरकारों को चुनौती देते हैं कि आने वाले किसान आंदोलन सहन नहीं कर पाओगे।

महापंचायत को घासीराम नैन गुट की किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जोगिंद्र नैन, डाॅ. दर्शन पाल, कृष्ण प्रसाद, रमिंदर पटियाला, मनजीत सिंह धनेर, सुखदेव जम्मू, आर वेंकैया, सत्यवान, सुरेश कोथ, बलदेव निहालगढ़, इंद्रजीत सिंह, अमरीक सिंह, किरण जीत शेखों, विकास सीसर, रुलदू सिंह मानसा, प्रेम सिंह गहलावत, कर्मजीत सिंह, बाबा गुरदीप सिंह, सूबेदार रणबीर मलिक, जगमती ने भी संबोधित किया। मंच संचालन लाभ सिंह ने किया।
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