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Fatehabad News: नागरिक अस्पताल में सिरे नहीं चढ़ा ब्लड सेपरेटर कंपोनेंट प्रोजेक्ट
Sun, 19 Oct 2025 09:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 19 Oct 2025 09:57 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में ब्लड सेंटर जहां पर कंपोनेट सेपरेटर प्रोजेक्ट शुरू होना संवाद
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट एक बार फिर से ठंडे बस्ते में चला गया है। लोक निर्माण विभाग प्रोजेक्ट के लिए कक्ष तैयार करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मशीनों को लेकर प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
वर्ष 2018 में इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हुई थी और मशीनें भी भेजी गई लेकिन जगह न होने का हवाला देकर मशीनें अग्रोहा मेडिकल भेज दी गई थी। फिलहाल स्थिति ये है कि मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए अग्रोहा मेडिकल जाना पड़ता है या फिर निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत रहती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर प्लेटलेट्स कई मरीजों में कम हो जाते है। ऐसी स्थिति में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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वर्ष 2018 में जारी हुई थी मशीनें
स्वास्थ्य विभाग ने कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कोरोना महामारी शुरू होने से पहले वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। लेकिन भवन न होने के चलते मशीन पड़ी रही। इन मशीनों को कोरोना महामारी के दौरान अग्रोहा मेडिकल में भेज दी थी। इसके बाद कुछ मशीनें दोबारा भेजी गई। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर वर्ष 2021 में डीजी कार्यालय के अधिकारियों ने स्टेटस देखने के लिए निरीक्षण किया था। यहां डिब्बे में बंद मशीनें देखकर फटकार लगाई थी और इनके लिए जल्द हॉल बनाने के लिए एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2023 में एस्टीमेट बना और डिमांड की गई। फरवरी 2024 में हॉल का निर्माण शुरू हुआ था।
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एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
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नागरिक अस्पताल में ब्लड सेपरेटर कंपोनेंट प्रोजेक्ट को लेकर प्रक्रिया जारी है। मुख्यालय की तरफ से कक्ष का निर्माण किया जा चुका है।
-डॉ. बुधराम, एसएमओ, नागरिक अस्पताल
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वर्ष 2018 में इसको लेकर प्रक्रिया शुरू हुई थी और मशीनें भी भेजी गई लेकिन जगह न होने का हवाला देकर मशीनें अग्रोहा मेडिकल भेज दी गई थी। फिलहाल स्थिति ये है कि मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए अग्रोहा मेडिकल जाना पड़ता है या फिर निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत रहती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर प्लेटलेट्स कई मरीजों में कम हो जाते है। ऐसी स्थिति में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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वर्ष 2018 में जारी हुई थी मशीनें
स्वास्थ्य विभाग ने कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कोरोना महामारी शुरू होने से पहले वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। लेकिन भवन न होने के चलते मशीन पड़ी रही। इन मशीनों को कोरोना महामारी के दौरान अग्रोहा मेडिकल में भेज दी थी। इसके बाद कुछ मशीनें दोबारा भेजी गई। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर वर्ष 2021 में डीजी कार्यालय के अधिकारियों ने स्टेटस देखने के लिए निरीक्षण किया था। यहां डिब्बे में बंद मशीनें देखकर फटकार लगाई थी और इनके लिए जल्द हॉल बनाने के लिए एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2023 में एस्टीमेट बना और डिमांड की गई। फरवरी 2024 में हॉल का निर्माण शुरू हुआ था।
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एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
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नागरिक अस्पताल में ब्लड सेपरेटर कंपोनेंट प्रोजेक्ट को लेकर प्रक्रिया जारी है। मुख्यालय की तरफ से कक्ष का निर्माण किया जा चुका है।
-डॉ. बुधराम, एसएमओ, नागरिक अस्पताल