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आजादी के 75 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ बच्चों में कुपोषण का दंश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2022 11:12 PM IST
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The bite of malnutrition among children did not end even after 75 years of independence
फतेहाबाद के गुरुनानक पुरा मोहल्ले में आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को जानकारी देती आंगनबाड़ी का? - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिले में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह चल रहा है, इसके बावजूद भी कुपोषित बच्चों के आंकड़े में कमी नहीं हो रही है। आजादी के 75 साल बाद भी नवजात बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। इस साल जून महीने तक 46 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। कोरोना काल के बाद से कुपोषित बच्चों की संख्या में अधिक बढ़ोतरी हुई है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ स्लम एरिया के बच्चों में ही कुपोषण है, बल्कि शहर व गांवों में भी कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं।
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हालांकि, कुपोषण को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की कई योजनाएं चल रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार देने से लेकर बच्चों को कुपोषण से बचाने की जानकारी तक दी जाती है। मगर कहीं जागरूकता के अभाव में तो कहीं संसाधनों की कमी कुपोषण को जड़ से खत्म नहीं होने दे रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के कुपोषित होने की पहचान की जाती है। इनमें अगर नवजात बच्चे का जन्म के समय वजन ढाई किलोग्राम से कम हो और उसका कद भी 45 सेंटीमीटर से कम हो तो उसे कुपोषित माना जाता है। इसके बाद बच्चे की डाइट और उसकी मां को बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग व अच्छा भोजन लेने की सलाह दी जाती है।
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सात सालों में 2021 में मिले थे सबसे अधिक कुपोषित बच्चे
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की जांच के दौरान कुपोषण के शिकार बच्चों की जानकारी मिल रही है। पिछले सात सालों में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे साल 2021 में मिले हैं। साल 2021 का आंकड़ा सबसे अधिक रहा था। 2021 में 343 बच्चे कुपोषण का शिकार हुए थे। इस साल जून 2022 तक 46 बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं। जून के बाद जुलाई और अगस्त महीने में कुपोषित बच्चों का आंकड़ा एकत्रित ही नहीं किया गया है।
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जिले में 1096 आंगनबाड़ी केंद्र
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए व गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार के लिए जागरूक करने के लिए जिले में 1096 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर जहां शून्य से पांच साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है, वहीं उनसे अनेक गतिविधियां भी करवाई जाती हैं। साथ ही महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए टिप्स दिए जाते हैं।
ये हैं लक्षण
अगर बच्चा कुपोषित है तो उसमें चिड़चिड़ापन आ सकता है। कुपोषण के कारण बच्चे को सूजन की समस्या हो सकती है। बच्चे को पेट से जुड़े संक्रमण हो सकते हैं। दिल का ठीक से काम नहीं करना का भी लक्षण है। त्वचा में खुजली या जलन की समस्या हो रही है तो मतलब बच्चा कुपोषित है। सांस लेने में समस्या या कमजोरी हो तो भी कुपोषण का लक्षण हैं।
कुपोषण के कारण
1. कुपोषण का मुख्य कारण है पोषक आहार की कमी। बच्चे को समय पर पौष्टिक आहार नहीं मिलता तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है।
2. जिन बच्चों को डायरिया की समस्या होती है, वे कुपोषित हो सकते हैं।
3. अगर बच्चे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो भी बच्चे को कुपोषण की समस्या हो सकती है।
4. गंदे वातावरण में रहने के कारण भी बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। अगर बच्चे कारखानों के पास रहें तो भी कुपोषण का जोखिम बढ़ जाता है।
5. अगर बच्चे को स्तनपान नहीं करवाया जाता तो भी बच्चा कुपोषित हो सकता है।
6. अगर प्रीमेच्योर डिलिवरी के कारण बच्चा समय से पहले जन्म ले लेता है तो उसे कुपोषण की समस्या हो सकती है।
इस प्रकार बचाएं बच्चों को कुपोषण से
बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता को इस बात पर ध्यान देना है कि बच्चा कितना एक्टिव है। इसका भी ध्यान रखना कि बच्चा अच्छी तरह से ब्रेस्टफीड कर पाए। अगर किसी कारण से शिशु स्तनपान नहीं करता है या स्तनपान करवाने वाली मां बच्चे को स्तनपान नहीं करवा पाती है, तो चिकित्सकों की सलाह लें। बच्चे को अनाज देना शुरू करें तो ध्यान रखना है कि उसे फैट, विटामिन, मिनरल, फाइबर, प्रोटीन आदि की सही खुराक मिले।

सात सालों में कुपोषित मिले बच्च े
2015 : 115
2016 : 55
2017 : 22
2018 : 19
2020 : 123
2021 : 343
कोट
जिले में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं को जागरूक किया जाता है। समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम होते हैं। महिलाएं पौष्टिक आहार लें और नवजात बच्चों को स्तनपान अवश्य करवाएं।
-डॉ. दर्शना सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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