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Fatehabad News: धान खरीद से पहले ही सरकार-मिलर्स में बढ़ी तकरार

Sat, 26 Sep 2026 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 26 Sep 2026 11:14 PM IST
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Tensions escalate between government and millers ahead of paddy procurement
शहर की नई अनाज मंडी के बाहर गेट पास जारी होने का इंतजार करते किसान। स्रोत किसान
फतेहाबाद। धान की खरीद शुरू में मात्र एक सप्ताह का समय शेष बचा है। धान खरीद से पहले ही मिलिंग को लेकर सरकार और राइस मिलर्स आमने-सामने हैं। पिछले साल का सीएमआर नहीं उठने, बकाया भुगतान अटकने और नई नीति में एफडी राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किए जाने से नाराज मिलर्स ने मिलिंग से हाथ खींचने की चेतावनी दी है।
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जिले की करीब 300 राइस मिलों में से अब तक सिर्फ चार मिलों ने ही सरकार के पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवाया है। राइस मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि जब तक मिलों से पुराना चावल नहीं उठता, बकाया नहीं मिलता और सरकार की ओर से नियमों में जो बदलाव किए गए है उन्हें नहीं बदलती है। तब तक पंजीकरण और एग्रीमेंट नहीं होंगे। धान की मिलिंग भी नहीं की जाएगी।
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धान की खरीद शुरू होने से पहले ही राइस मिलर्स और सरकार के बीच नियमों को लेकर तनातनी के हालात बने हुए हैं। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने मांगें पूरी नहीं होने पर धान की मिलिंग के साथ-साथ पंजीकरण और एग्रीमेंट प्रक्रिया के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
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एसोसिएशन सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले साल की समस्याओं का समाधान किए बिना मिलर्स से नए सीजन के लिए पंजीकरण और एग्रीमेंट करवाने का दबाव बनाया जा रहा है। मिलर्स का कहना है कि पिछले साल की मिलिंग का तैयार सीएमआर अभी तक पूरी तरह नहीं उठाया गया है। इसका सीधा असर मिलर्स की नई मिलिंग व्यवस्था पर पड़ रहा है।
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पिछले साल 261 मिलों ने किया था काम
धान खरीद शुरू होने से पहले सरकार राइस मिलों से पोर्टल पर पंजीकरण करवाती है। सरकार की ओर से लागू की गई नई शर्ताें को लेकर मिलर्स पंजीकरण न करवाकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। पिछले साल जिले में 261 मिलों ने धान मिलिंग का काम किया था। जिले में करीब 300 राइस मिलें हैं, लेकिन इस बार अब तक केवल 4 मिलों ने ही पंजीकरण कराया है। एसोसिएशन का कहना है कि कम पंजीकरण इस बात का संकेत है कि मिलर्स मौजूदा व्यवस्था और नई नीति को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। मिलर्स ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती और पिछले सीजन की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे पंजीकरण और एग्रीमेंट प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
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गोदामों में चावल पड़ा, मिलों में धान खराब होने का डर
मिलर्स के अनुसार पिछले सीजन का चावल समय पर नहीं उठने के कारण मिलों में धान की समस्या बनी हुई है। नए धान की आवक शुरू होने के साथ मिलों में स्टॉक रखने की चुनौती बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि धान और चावल के लंबे समय तक पड़े रहने से खराब होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा गोदामों और मिलों में स्टॉक संभालने के लिए किराया, लेबर और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिलर्स का कहना है कि जब पुराना स्टॉक ही समय पर नहीं उठाया जा रहा है तो नए सीजन की मिलिंग शुरू करना उनके लिए मुश्किल होगा। एसोसिएशन ने सरकार से लंबित पिछले सीजन के मिलिंग मामलों का समाधान करने की मांग की है।

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एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
राइस मिल एसोसिएशन फतेहाबाद के प्रधान बजरंग गर्ग ने बताया कि एसोसिएशन की कुछ प्रमुख मांगे है कि पिछले साल का लंबित सीएमआर तत्काल उठाया जाए, एफसीआई और सरकारी स्तर पर पर्याप्त गोदाम स्पेस उपलब्ध कराया जाए, मिलिंग से जुड़े पुराने किराए, बकाया और अन्य बकायों का भुगतान किया जाए, एफडी की राशि 50 लाख से घटाकर पूर्व व्यवस्था के अनुसार 10 लाख रुपये की जाए, मिलिंग चार्ज बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
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