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Fatehabad News: बच्चों के फेफड़े कमजोर कर रही टीबी, जांच में मिल रहे संक्रमित
Sun, 23 Mar 2025 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 23 Mar 2025 10:36 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में टीबी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़संवाद
फतेहाबाद। हर साल जांच के दौरान जिले में दो से तीन फीसदी बच्चे टीबी संक्रमित मिल रहे हैं। टीबी बच्चों के फेफड़े कमजोर कर रही है। हालांकि समय पर उपचार लेने से बच्चे टीबी बीमारी पर जीत भी हासिल कर रहे हैं।
बता दें कि जिले में वर्ष 2024 में लैब में सैंपल की जांच के दौरान 2,406 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इसमें 0 से 14 साल के 72 बच्चे भी मिले हैं। हालांकि जिले में पिछले साल 2681 टीबी मरीजों का उपचार शुरू हुआ है। जिले में महिलाओं के मुकाबले पुरुष सबसे ज्यादा टीबी के शिकार हो रहे हैं। जिले में 1452 पुरुष जहां टीबी संक्रमित मिले हैं तो 954 महिलाओं में टीबी की पुष्टि हुई है।
स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करना है लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। हालांकि विभाग ने जिले में सैंपलों की संख्या बढ़ाई है। वर्ष 2023 में जहां करीब 17 हजार सैंपल लिए गए थे वहीं वर्ष 2024 में 31 हजार मरीजों के सैंपल लेकर जांच की गई। चिकित्सकों का कहना है कि टीबीग्रस्त मरीज बीच में दवा छोड़ देते है ऐसे में वह ठीक नहीं हो पाता। बीमारी को खत्म करने और दोबारा इससे पीड़ित न हो इसके लिए पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने निक्षय पोषण योजना शुरू की हुई है। इसके तहत जब तक मरीज की दवाई चलती है स्वास्थ्य विभाग उसे हर माह एक हजार रुपये जारी करता है।
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वर्ष 2024 में ये रही टीबी मरीजों की स्थिति
टीबी को लेकर मरीजों की हुई जांच - 31,279
जिले में टीबी के मिले मरीज - 2406
जिले में टीबी मरीजों का शुरू हुआ उपचार - 2681
जांच के दौरान टीबी मरीज मिले एचआईवी पॉजिटिव - 40
जांच के दौरान टीबी मरीजों में मधुमेह - 203
एमडीआर श्रेणी में शामिल हुए मरीज - 92
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टीबी बीमारी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहना
- रात को सोते समय पसीना आना, ठंड में भी पसीना आना
- बुखार आना, संक्रमण बढऩे के साथ बढ़ना
- थकावट और वजन कम होना
-सांस लेने में दिक्कत होना
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एमटीबी जिवाणु के कारण होती है टीबी
चिकित्सकों के मुताबिक क्षय रोग यानि टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्युलोसिस जीवाणु के कारण होता है। रोगाणु हवा के माध्यम से फैलते हैं और आमतौर पर फेफड़ों को संक्रमित करते हैं। ये शरीर के अन्य भागों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
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विभाग को नहीं मिली प्रतिमा, अभी सम्मानित नहीं होंगी ग्राम पंचायतें
जिले की 84 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इसमें 22 ग्राम पंचायतें सिल्वर और 62 ग्राम पंचायतों को कांस्य पदक के लिए चुना गया है। विभाग ने इन ग्राम पंचायतों को विश्व टीबी दिवस पर सम्मानित करना था, लेकिन अभी ये सम्मानित नहीं होंगी। वजह ये है कि विभाग ने प्रतिमा के लिए जैम पोर्टल पर ऑर्डर किया है। विभाग को अभी तक प्रतिमा नहीं मिली हैं। दूसरी वजह ये भी है कि जिले को सिविल सर्जन तो मिल गया है लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। तीसरी वजह ये भी है कि टीबी दिवस को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में कार्यक्रम होना है, जिसमें जिले की स्वास्थ्य विभाग टीम भी शामिल होंगी।
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टीबी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जब तक लोग इसको लेकर गंभीर नहीं होंगे तब तक इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। अगर टीबी के लक्षण हैं तो जांच जरूर करवाएं और पूरा उपचार लें। विभाग की तरफ से योजनाएं भी चलाई जा रही है ताकि उपचार के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी मिल सके।
- डॉ. मनीष टुटेजा, टीबी रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।
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बता दें कि जिले में वर्ष 2024 में लैब में सैंपल की जांच के दौरान 2,406 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इसमें 0 से 14 साल के 72 बच्चे भी मिले हैं। हालांकि जिले में पिछले साल 2681 टीबी मरीजों का उपचार शुरू हुआ है। जिले में महिलाओं के मुकाबले पुरुष सबसे ज्यादा टीबी के शिकार हो रहे हैं। जिले में 1452 पुरुष जहां टीबी संक्रमित मिले हैं तो 954 महिलाओं में टीबी की पुष्टि हुई है।
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स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करना है लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। हालांकि विभाग ने जिले में सैंपलों की संख्या बढ़ाई है। वर्ष 2023 में जहां करीब 17 हजार सैंपल लिए गए थे वहीं वर्ष 2024 में 31 हजार मरीजों के सैंपल लेकर जांच की गई। चिकित्सकों का कहना है कि टीबीग्रस्त मरीज बीच में दवा छोड़ देते है ऐसे में वह ठीक नहीं हो पाता। बीमारी को खत्म करने और दोबारा इससे पीड़ित न हो इसके लिए पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने निक्षय पोषण योजना शुरू की हुई है। इसके तहत जब तक मरीज की दवाई चलती है स्वास्थ्य विभाग उसे हर माह एक हजार रुपये जारी करता है।
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वर्ष 2024 में ये रही टीबी मरीजों की स्थिति
टीबी को लेकर मरीजों की हुई जांच - 31,279
जिले में टीबी के मिले मरीज - 2406
जिले में टीबी मरीजों का शुरू हुआ उपचार - 2681
जांच के दौरान टीबी मरीज मिले एचआईवी पॉजिटिव - 40
जांच के दौरान टीबी मरीजों में मधुमेह - 203
एमडीआर श्रेणी में शामिल हुए मरीज - 92
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टीबी बीमारी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहना
- रात को सोते समय पसीना आना, ठंड में भी पसीना आना
- बुखार आना, संक्रमण बढऩे के साथ बढ़ना
- थकावट और वजन कम होना
-सांस लेने में दिक्कत होना
एमटीबी जिवाणु के कारण होती है टीबी
चिकित्सकों के मुताबिक क्षय रोग यानि टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबर्क्युलोसिस जीवाणु के कारण होता है। रोगाणु हवा के माध्यम से फैलते हैं और आमतौर पर फेफड़ों को संक्रमित करते हैं। ये शरीर के अन्य भागों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
विभाग को नहीं मिली प्रतिमा, अभी सम्मानित नहीं होंगी ग्राम पंचायतें
जिले की 84 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इसमें 22 ग्राम पंचायतें सिल्वर और 62 ग्राम पंचायतों को कांस्य पदक के लिए चुना गया है। विभाग ने इन ग्राम पंचायतों को विश्व टीबी दिवस पर सम्मानित करना था, लेकिन अभी ये सम्मानित नहीं होंगी। वजह ये है कि विभाग ने प्रतिमा के लिए जैम पोर्टल पर ऑर्डर किया है। विभाग को अभी तक प्रतिमा नहीं मिली हैं। दूसरी वजह ये भी है कि जिले को सिविल सर्जन तो मिल गया है लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। तीसरी वजह ये भी है कि टीबी दिवस को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में कार्यक्रम होना है, जिसमें जिले की स्वास्थ्य विभाग टीम भी शामिल होंगी।
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टीबी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जब तक लोग इसको लेकर गंभीर नहीं होंगे तब तक इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। अगर टीबी के लक्षण हैं तो जांच जरूर करवाएं और पूरा उपचार लें। विभाग की तरफ से योजनाएं भी चलाई जा रही है ताकि उपचार के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी मिल सके।
- डॉ. मनीष टुटेजा, टीबी रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।