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Fatehabad News: बुवान गांव की निलंबित सरपंच परमजीत कौर बहाल
Sat, 12 Jul 2025 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 12 Jul 2025 12:21 AM IST
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बुवान गांव की निलंबित सरपंच परमजीत कौर।
भूना (फतेहाबाद)। ग्राम पंचायत बुवान की सरपंच परमजीत कौर को 26 जून को पद से निलंबित करने के बाद उपायुक्त मनदीप कौर ने शुक्रवार को लिखित आदेश देकर बहाल कर दिया। सरपंच परमजीत पर पंचायत निधि के दुरुपयोग का आरोप था।
उन पर आरोप था कि नशे के खिलाफ निकाली गई साइकिल यात्रा के दौरान झूठे बिल लगाए गए। इस यात्रा में दो डीएसपी, अन्य अधिकारी और कई गांवों के लोग शामिल हुए थे। गांव बुवान से भी बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल हुए थे। पंचायत ने इन लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था की थी। बतरा स्वीट्स बुवान का करीब 38,000 रुपये का बिल पंचायत फंड से चेक के माध्यम से किया गया था।
इससे पहले भी 16 सितंबर 2024 को उन्हें पंचायती जोहड़ की जमीन से कब्जा खाली न करवाने के मामले में निलंबित किया गया था। उस बार दो अक्तूबर को बहाल कर दिया गया था। उस मामले में भी सरपंच ने खुद को निर्दोष बताया था। सरपंच का कहना है कि नशा मुक्ति यात्रा के दौरान लोगों और अधिकारियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी।
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सरपंच के अनुसार सामान खरीदने वाले को चेक दिया गया। इसके बावजूद उन्हें निलंबित किया गया। उन्होंने कहा कि वह निर्दोष थीं, फिर भी कार्रवाई की गई। अब दो बार निलंबन और बहाली के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि आरोप की पुष्टि बिना कार्रवाई करना गलत था। अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी तो सरपंच की मानहानि नहीं की जानी चाहिए।
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उन पर आरोप था कि नशे के खिलाफ निकाली गई साइकिल यात्रा के दौरान झूठे बिल लगाए गए। इस यात्रा में दो डीएसपी, अन्य अधिकारी और कई गांवों के लोग शामिल हुए थे। गांव बुवान से भी बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल हुए थे। पंचायत ने इन लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था की थी। बतरा स्वीट्स बुवान का करीब 38,000 रुपये का बिल पंचायत फंड से चेक के माध्यम से किया गया था।
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इससे पहले भी 16 सितंबर 2024 को उन्हें पंचायती जोहड़ की जमीन से कब्जा खाली न करवाने के मामले में निलंबित किया गया था। उस बार दो अक्तूबर को बहाल कर दिया गया था। उस मामले में भी सरपंच ने खुद को निर्दोष बताया था। सरपंच का कहना है कि नशा मुक्ति यात्रा के दौरान लोगों और अधिकारियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी।
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सरपंच के अनुसार सामान खरीदने वाले को चेक दिया गया। इसके बावजूद उन्हें निलंबित किया गया। उन्होंने कहा कि वह निर्दोष थीं, फिर भी कार्रवाई की गई। अब दो बार निलंबन और बहाली के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि आरोप की पुष्टि बिना कार्रवाई करना गलत था। अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी तो सरपंच की मानहानि नहीं की जानी चाहिए।