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बेटे के उपचार के लिए किया संघर्ष, अब दूसरों की मदद कर रहे जोगिंद्र
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हीमोफीलिया हेल्थ सोसायटी के प्रधान जोगिंद्र सेठी।
- फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। हीमोफीलिया बीमारी रक्तस्राव का विकार है। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज को अगर चोट लगती है तो उसका रक्त नहीं रुकता है। बीमारी को लेकर समय पर उपचार लेना जरूरी है। अगर नहीं लिया तो मौत भी हो सकती है। हीमोफीलिया बीमारी के उपचार के लिए किसी को भटकना न पड़े, समय पर जांच करवा पाएं, इसके लिए भूना निवासी जोगिंद्र सोसायटी बनाकर हीमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त मरीजों की मदद कर रहे हैं।
जोगिंद्र सेठी का बेटा भी इसी बीमारी से ग्रस्त है। उसके उपचार के लिए जोगिंद्र ने लंबे समय तक संघर्ष किया और दिल्ली के बड़े अस्पतालों में उपचार करवाया। किसी और को संघर्ष न करना पड़े, इसलिए सोसायटी बनाकर मरीजों तक मदद पहुंचा रहे है। जोगिंद्र सेठी बताते हैं कि हीमोफीलिया हेल्थ सोसायटी बना रखी है। सोसायटी इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को स्मार्ट कार्ड बनाकर देती है। इमरजेंसी में मरीज को अस्पताल पहुंचाते हैं। मरीज को इमरजेंसी में टीका की व्यवस्था करवाते है। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज को अगर चोट लग जाती है तो उसका खून नहीं रुकता है। ऐसे में समय पर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। अगर समय पर इंजेक्शन न लगवाया जाए तो मौत भी हो जाती है। जोगिंद्र बताते हैं कि पहले ये इंजेक्शन रोहतक पीजीआई में ही मिलते थे लेकिन अब जिला के सरकारी अस्पताल में भी उपलब्ध है।
जिले में है 55 हीमोफीलिया से ग्रस्त मरीज
हीमोफीलिया हेल्थ सोसायटी के प्रधान जोगिंद्र सेठी का कहना है कि जिले में करीब 55 मरीज हीमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त है। ये बीमारी पुरुषों में पाई जाती है। इस बीमारी के उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन मौजूद है। सरकार से मांग है कि गंभीर मरीजों के लिए इंजेक्शन घर पर उपलब्ध करवाएं जाएं ताकि समय रहते मरीज को उपचार मिल सके।
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हीमोफीलिया बीमारी के ये हैं लक्षण :
रक्तस्राव होना हीमोफीलिया का एक प्राथमिक लक्षण है। त्वचा के नीचे रक्तस्राव होना, मुंह में या मसूड़ों से खून बहना, टीकाकरण के बाद खून निकलना, जोड़ों में सूजन या दर्द होना, बार-बार नाक से खून बहना आदि हीमोफीलिया के लक्षण है।
बीमारी से ग्रस्त रखें ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक जोड़ों पर ज्यादा दबाव न पड़े इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें और उनकी देखभाल रखें। अपना पहचान पत्र साथ रखें, जिसमें ब्लड ग्रुप लिखा होना चाहिए। यात्रा के दौरान विशेष सावधानियां बरतें। यदि किसी को हीमोफीलिया है तो उसे किसी भी तरह ब्लीडिंग होने पर तुरंत इलाज करना चाहिए। खून संबंधी या अन्य किसी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतें और समय-समय पर जांच अवश्य कराते रहें।
कोट
हीमोफीलिया बीमारी में ब्लीडिंग होती है, इसे रोकने के लिए फेक्टर के इंजेक्शन लगाए जाते है। जिला अस्पताल में इसके इंजेक्शन उपलब्ध है और सरकार द्वारा निशुल्क लगाए जाते है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन भी होता है जिससे उन्हें बस पास की सुविधा मिलती है।
-डॉ. नेहा, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग फतेहाबाद
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जोगिंद्र सेठी का बेटा भी इसी बीमारी से ग्रस्त है। उसके उपचार के लिए जोगिंद्र ने लंबे समय तक संघर्ष किया और दिल्ली के बड़े अस्पतालों में उपचार करवाया। किसी और को संघर्ष न करना पड़े, इसलिए सोसायटी बनाकर मरीजों तक मदद पहुंचा रहे है। जोगिंद्र सेठी बताते हैं कि हीमोफीलिया हेल्थ सोसायटी बना रखी है। सोसायटी इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों को स्मार्ट कार्ड बनाकर देती है। इमरजेंसी में मरीज को अस्पताल पहुंचाते हैं। मरीज को इमरजेंसी में टीका की व्यवस्था करवाते है। इस बीमारी से ग्रस्त मरीज को अगर चोट लग जाती है तो उसका खून नहीं रुकता है। ऐसे में समय पर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। अगर समय पर इंजेक्शन न लगवाया जाए तो मौत भी हो जाती है। जोगिंद्र बताते हैं कि पहले ये इंजेक्शन रोहतक पीजीआई में ही मिलते थे लेकिन अब जिला के सरकारी अस्पताल में भी उपलब्ध है।
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जिले में है 55 हीमोफीलिया से ग्रस्त मरीज
हीमोफीलिया हेल्थ सोसायटी के प्रधान जोगिंद्र सेठी का कहना है कि जिले में करीब 55 मरीज हीमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त है। ये बीमारी पुरुषों में पाई जाती है। इस बीमारी के उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन मौजूद है। सरकार से मांग है कि गंभीर मरीजों के लिए इंजेक्शन घर पर उपलब्ध करवाएं जाएं ताकि समय रहते मरीज को उपचार मिल सके।
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हीमोफीलिया बीमारी के ये हैं लक्षण :
रक्तस्राव होना हीमोफीलिया का एक प्राथमिक लक्षण है। त्वचा के नीचे रक्तस्राव होना, मुंह में या मसूड़ों से खून बहना, टीकाकरण के बाद खून निकलना, जोड़ों में सूजन या दर्द होना, बार-बार नाक से खून बहना आदि हीमोफीलिया के लक्षण है।
बीमारी से ग्रस्त रखें ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक जोड़ों पर ज्यादा दबाव न पड़े इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें और उनकी देखभाल रखें। अपना पहचान पत्र साथ रखें, जिसमें ब्लड ग्रुप लिखा होना चाहिए। यात्रा के दौरान विशेष सावधानियां बरतें। यदि किसी को हीमोफीलिया है तो उसे किसी भी तरह ब्लीडिंग होने पर तुरंत इलाज करना चाहिए। खून संबंधी या अन्य किसी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतें और समय-समय पर जांच अवश्य कराते रहें।
कोट
हीमोफीलिया बीमारी में ब्लीडिंग होती है, इसे रोकने के लिए फेक्टर के इंजेक्शन लगाए जाते है। जिला अस्पताल में इसके इंजेक्शन उपलब्ध है और सरकार द्वारा निशुल्क लगाए जाते है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन भी होता है जिससे उन्हें बस पास की सुविधा मिलती है।
-डॉ. नेहा, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग फतेहाबाद