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श्रीमद्भागवत कथा से जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है : दास महाराज
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भट्टू कलां। कथावाचक दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है। आत्मा को अपने स्वयं की अनुभूति से जोड़ता हैं। सांसारिक दुख, लोभ-मोह- क्षुधा जैसी तमाम प्रकार की भावनाओं के बंधन से मुक्त करते हुए नश्वर ईश्वर तथा उसी का एक अंश आत्मा से साक्षात्कार कराता है। यह बातें गांव मेहूवाला की श्री कृष्ण प्रणामी गोशाला में श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन के चौथे दिन कथावाचक ने कहीं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा एक ऐसी कथा है, जिसके सुनने मात्र से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यही नहीं धुंधकारी जैसे अत्याचारी पापी को भागवत कथा सुनने मात्र से प्रेत योनि से मुक्ति मिली थी। हम सभी को भागवत कथा का आश्रय लेकर अपनी नैया को भवसागर से पार लगाने के लिए सत्संग, भागवत कथा, राम कथा सुननी चाहिए। इसके अलावा रोग-शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है।
मदन शास्त्री ने कहा कि इस कलयुग में मनुष्य अपने भावों को सत्संग के जरिए ही स्थिर रख सकता है। सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता। इस अवसर पर प्रधान पृथ्वी सिंह, रमेश कडवासरा, जयबीर शर्मा, नोपाराम, रामसिंह कडवासरा, सतबीर, प्रमोद सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा एक ऐसी कथा है, जिसके सुनने मात्र से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यही नहीं धुंधकारी जैसे अत्याचारी पापी को भागवत कथा सुनने मात्र से प्रेत योनि से मुक्ति मिली थी। हम सभी को भागवत कथा का आश्रय लेकर अपनी नैया को भवसागर से पार लगाने के लिए सत्संग, भागवत कथा, राम कथा सुननी चाहिए। इसके अलावा रोग-शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन-चक्र से जुड़े प्राणियों को उनकी वास्तविक पहचान करता है।
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मदन शास्त्री ने कहा कि इस कलयुग में मनुष्य अपने भावों को सत्संग के जरिए ही स्थिर रख सकता है। सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता। इस अवसर पर प्रधान पृथ्वी सिंह, रमेश कडवासरा, जयबीर शर्मा, नोपाराम, रामसिंह कडवासरा, सतबीर, प्रमोद सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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